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Duty Pass क्या है? | ड्यूटी पास के Rules & Benefits


ड्यूटी पास, ड्यूटी पर यात्रा करने के लिए दिये जाते है. ये धातु पास, कार्ड पास और चेक पास के रूप में होते है।

1. धातु पास – राजपत्रित अधिकारियों को स्थायी तौर पर दिये जाते है. अधिकारी, उसका परिवार और एक परिचर (दूसरे दर्जे में) यात्रा कर सकते है अधिक – से – अधिक 4 बर्थ या चेयर आरक्षित हो सकती है।

धातु पास चार प्रकार के है :प्लेटिनम, स्वर्ण , रजत और कांस्य 

(1) प्लेटिनम पास :बोर्ड सदस्यों को सेवा अवधि में और रिटायर्ड होने पर मिलने वाली सुविधाये अन्य अधिकारियों से भिन्न होती है. उनके लिए बोर्ड ने प्लेटिनम पास जारी करने का निर्णय किया. 30.4.97 को बोर्ड के सभी वर्तमान सदस्य जिसमें अध्यक्ष और वित्त आयुक्त शामिल होंगे, इस पास पर वह ड्यूटी पर और सुविधा खाते पर यात्रा कर सकेगे, रिटायर्ड होने पर कार्ड पास पर नियमानुसार पास सुविधा मिलेगी।  पहले रिटायर्ड होने पर भी प्लेटिनम पास देने की व्यवस्था थी जिसे वापिस ले लिया गया।

अनुशासनिक कार्यवाही एवं दंड संबंधी महत्वपूर्ण आदेश



1. निलंबित कर्मचारी को निलंबन के दौरान पदोन्नत नही किया जा सकता, भले ही वह चयनित सूची / पैनल पर हो (RBE 13 /93)

2.अनुशासनिक कार्यवाही के दौरान, निचले वेतनमान, श्रेणी, पद पर पदोन्नति की जा सकती है जो अधिकतम भर्ती ग्रेड तक होगी (RBE 68 / 89)

3. बड़ी शास्ति का मामला विचाराधीन होने पर पदोन्नति नही हो सकती लेकिन सिर्फ छोटी शास्ति संबंधी मामला विचाराधीन हो तो पदोन्नति हेतु विचार किया जा सकता है।(RBE 13/93) 4. ऐसा कर्मचारी जो निलंबित है या जिसके विरुध्द बड़ी या छोटी शास्ति का मामला विचाराधीन या लम्बित है तो उसे चयन में बुलाया जायेगा लेकिन योग्य पाये जाने पर उसी कर्मचारी को पैनल पर रखा जायेगा जिसके विरुध्द सिर्फ छोटी शास्ति का मामला लम्बित है, निलंबित या बड़ी शास्ति विचाराधीन कर्मचारी का नाम पैनल पर लेने / न लेने के संबंध में निर्णय निलम्बन / बड़ी शास्ति संबंधी मामले के अंतिम होने पश्चात होगा।(RBE 13/93)

चाइल्ड केयर लीव के संबंध में स्पष्टीकरण

महिला रेलवे कर्मचारियों  की  चाइल्ड केयर लीव के संबंध में  स्पष्टीकरण


1. क्या किसी भी प्रयोजन के लिए ली गई औसत छुट्टी को चाइल्ड केयर लीव में बदला जा सकता है? उन आवेदनों पर कैसे कार्रवाई की जाए जिनमे छुट्टी लेने का कारण ‘अत्यावश्यक कार्य’ दिया गया हो लेकिन आवेदक ने दावा किया हो कि उसने बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी का इस्तेमाल किया है?

उत्तर – चाइल्ड केयर लीव उन महिला कर्मचारियों, जिनके नाबालिक बच्चे हो, को बच्चो के पालन – पोषण अथवा परीक्षा, बीमारी आदि जैसी आवश्यकता में उनकी देखभाल के लिए स्वीकृत की जाती है। अत: विशेष रूप से इस प्रयोजन के लिए ली गई औसत वेतन छुट्टी को ही चाइल्ड केयर लीव में बदला जा सकता है 

रेल कर्मचारी के विधवा को मानार्थ पास के सामान्य नियम




कर्मचारी जो 12.3.87 को या इसके बाद से नौकरी में आये थे, उनकी मृत्यु हो जाने पर विधवा /विधुर को मानार्थ पास मिलता है. नौकरी के दौरान प्रतिवर्ष 2 सेट सुविधा टिकट आदेश कम करके इस योजना में शामिल होते है.

यह सुविधा उन कर्मचारियों की विधवा/विधुर को भी मिलेगी जो 12.3.87 से पहले सेवा में थे किन्तु उन्हें सुविधा टिकट आदेशों के दो सेटों के कल्पित मूल्य के रूप में एक बार 250/- रु.का भुगतान करना होगा. यह भुगतान मंडलीय कैशियर व्दारा नगद या उस रेलवे से जहाँ विधवा पास लेना चाहती है, उसके वित्त सलाहकार एवं मु.ले.अधि के नाम डिमांड ड्राफ्ट व्दारा स्वीकार किया जा सकता है.

अनुशासन एवं अपील नियम के अंतर्गत बिना जांच , दण्ड देने की प्रक्रिया (नियम 14)

किसी कर्मचारी को अनुशासन एवं अपील नियम के अंतर्गत बिना जांच, दण्ड दिया जा सकता है, उसकी प्रक्रिया अनुशासन एवं अपील के नियम14 में दिया गया है ।  

नियम 14 (i)

किसी कर्मचारी पर नियम 14 (i) तभी लागू किया  जा सकेगा जब किसी कर्मचारी को किसी आपराधिक मामले में सक्षम न्यायालय व्दारा 

(i) सजा सुना दी गयी हो और 

(ii) वह अपराध जिसके लिए सजा सुनाई गयी हो, सम्बन्धित रेल सेवा नियमो के अंतर्गत कदाचार (मिस्कंडक्ट) की परिभाषा के अंतर्गत आता हो।

पदोन्नति पर वेतन निर्धारण के सामान्य नियम

निचले पद से उच्चतर पद पर, स्थायी अथवा अस्थायी आधार पर पदोन्नति के समय नियम 1313 आर II मूल नियम - 22 (क) (i) के अधीन वेतन - निर्धारण किया जाएगा।  

1. एक पद से दूसरे ऐसे पद पर नियुक्ति के समय वेतन - निर्धारण, जब पद उच्चतर कार्यभार तथा अधिक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व से जुड़ा हो - 

जब किसी रेल कर्मचारी को जो किसी पद पर स्थायी, अस्थायी अथवा स्थानापन्न आधार  पर कार्यरत हो, किसी ऐसे पद पर स्थायी अथवा अस्थायी स्थानापन्न आधार पर नियुक्त किया जाए जिसका कार्यभार तथा उत्तरदायित्व अधिक महत्वपूर्ण हो तो पहले निम्नतर पद के उसके वेतन में एक वेतनवृध्दि जोड़ी जाएगी जिससे उसका काल्पनिक (नोटेशनल) वेतन बनेगा।  

“निवारण पोर्टल” सेवारत और पूर्व रेल कर्मचारियों की शिकायतों के लिए बने पोर्टल के बारे में

रेल कर्मचारियों की कार्य से संबंधित शिकायतों का निवारण करने के लिए एक ऑन-लाइन सिस्टवम का सृजन करके उन्हेंत सीधे टैक्नो लॉजी के लाभ प्रदान करने के लिए माननीय रेल मंत्री द्वारा निवारण की शुरूआत की गई है।

देश में एकमात्र सबसे बड़ा नियोक्तान होने के नाते भारतीय रेल पर बहुत बड़ी जिम्मेनदारी है कि वह इस विशाल देश के विभिन्नज भागों में फैले लगभग दस मिलियन सेवारत और पूर्व रेल कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों की विभिन्न जरूरतोंकोपूरा करे।

रेल कर्मचारियों से संबंधित सभी मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक बहु-विभागीय विशाल तंत्र की सहायता से इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर रही है। बहरहाल, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जबरदस्त  उन्नकति से हमारे सामाजिक वातावरण में बदलाव आया है, जिससे कर्मचारियों और उनके आश्रितों की आकांक्षाएं बढ़ी हैं, जिन्हेंि प्रौद्योगिकी की सहायता के बिना पूरा करना संभव नहीं है। 

Indian Railway जन्म तारीख का अंकन एवं परिवर्तन के सामान्य नियम



(1) रेल सेवा में आते समय प्रत्येक कर्मचारी को अपनी जन्म की तारीख घोषित करना होता है। यह जन्म की तारीख रेल सेवा में प्रवेश करने से पहले किसी सार्वजनिक रूप से घोषित की गई किसी तारीख से भिन्न नही होगी। साक्षर कर्मचारी जन्म की तारीख को सेवा अभिलेख में स्वयं अपने हस्तलेख में लिखेगा, निरक्षर कर्मचारी की जन्म को घोषित तारीख को कोई वरिष्ठ रेल कर्मचारी उसके अभिलेख में लिखेगा और कोई दूसरा रेल कर्मचारी उसका साक्षी होगा। 

(2) जो व्यक्ति अपनी आयु बताने में असमर्थ हो उसे सेवा में नियुक्त नही किया जाएगा। 

(3) जन्म की तारीख मैट्रिकुलेट परीक्षा के प्रमाणपत्र या म्युनिसिपल प्रमाणपत्र या स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र या न्यायालय के शपथ के आधार पर होगी। 

Indian Railway गुमशुदा रेल कर्मचारी के मामले में अनुकंपा नियुक्ति

मौजूदा अनुदेशों का अधिक्रमण करते हुए बोर्ड ने नीचे लिखे निर्णय किये है –

(i) अनुकंपा नियुक्ति का लाभ प्रदान करने के अनुरोध पर रेल कर्मचारी के गुम होने की तारीख से कम – से कम दो वर्ष बीत जाने के बाद विचार किया जा सकता है, बशर्ते कि गुमशुदा होने के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गयी हो तथा उस गुमशुदा व्यक्ति की तलाश नही की जा सकती हो तथा सक्षम प्राधिकारी को यह लगे कि यह मामला वास्तविक है।

(ii) यह लाभ निम्न रेल कर्मचारी पर लागू नही होगा 

(क) जिसे लापता होने की तारीख से दो वर्ष के भीतर सेवानिवृत्ति होना हो अथवा –

(ख) जिसके संबंध में यह संदेह हो कि उसने कपट किया है, अथवा उसके किसी आतंकवादी संगठन में शामिल हो जाने अथवा विदेश चले जाने का संदेह हो। 

अन्तर रेलवे/ डिवीजन स्थानान्तरण (Inter Railway / DivisionTransfer) के लिए रेलवे बोर्ड के महत्वपूर्ण आदेश

विशेष -ग्रुप सी और डी के रेल कर्मचारियों की विशेष कठिनाइयो में एक रेलवे से दूसरी रेलवे में उनके स्वयं के अनुरोध पर रेल प्रशासनों व्दारा अनुकूल रूप से विचार किया जाये, ऐसे कर्मचारियों को जो एक रेलवे से दूसरी रेलवे में उनके अनुरोध पर स्थानांतरित किये गये हो, उन्हें नई स्थापना में संबंधित ग्रेड के पदोन्नति समूह में सभी वर्तमान, स्थायी, स्थानापन्न और अस्थायी कर्मचारियों के नीचे रखा जाएगा।(बोर्ड का पात्र सं. ई. 55 / एस. आर. 6/6/3, दिनांक 19.5.55)

(1) स्थानांतरण के निवेदन देने की अनुमति केवल सीधी भर्ती वाले ग्रेडों या उन मध्यवर्ती ग्रेडों के लिए है, जिनमें सीधी भर्ती की जा सकती है।  

(इस्टेब्लिशमेंट मैनुअल का पैरा 312 और बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी.) 1-71 //टी.आर./1,दिनांक 31.3.71.)

नोट -स्थानांतरण के मामले में केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण, चंडीगढ़ व्दारा आनन्द प्रकाश तथा अन्य व्दारा दायर ओ.ए.स. 413 /एचआर /98 पर दिनांक 22.9.98 के निर्णय और इस निर्णय के विरुद उच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा तथा उच्चतम न्यायालय में प्रशासन व्दारा दी गई याचिकाओं के ख़ारिज हो जाने के परिणाम स्वरूप यह आदेश जारी किया गया है कि सीधी भर्ती के ग्रेडो में निम्नतम वरिष्ठता स्वीकार करने की शर्तें पर अनुरोध किये जाने पर यह अवश्य जाँच कर ली जाए कि कर्मचारी के पास सीधी भर्ती के लिए निर्धारित शैक्षिक अर्हता होने पर ही स्थानांतरण की अनुमति दी जाएगी । (आर.बी.ई.24/2000, दिनांक 8.2,2000) 

(2) पारस्परिक अदला - बदली के आधार पर स्थानानतरण किसी ग्रेड में हो सकता है इस  तरह की अदला - बदली के लिए किसी कर्मचारी को उपयुक्त राजी व्यक्ति मिल सके इसके लिए प्रशासन को मुख्यालय में एक सेल की स्थापना करनी चाहिये, जहाँ उसी रेलवे में एक प्रवरता इकाई से दूसरी में और किसी दूसरी रेल में स्थानांतरण के लिए आवेदनों का रजिस्टर रखा जाये। 

आवेदन प्राप्त होने पर रेलवे प्रशासन दूसरी रेल को लिखेगा ताकि यह आवेदन रेल गजट में प्रकाशित हो और इच्छुक कर्मचारी उसके बारे में जान सके। यह आवेदन प्रार्थियो की वरीयता के आधार पर रजिस्टर में नोट किये जायेगे और प्रत्येक वर्ष में एक बार उन पर जरूरी कार्यवाही की जायेगी। यह सेल में निबटारा होता रहे और उनके कारण कर्मचारियों को उनकी वरीयता की हानि कम हो सके 

(बोर्ड का पत्र सं. वही दिनांक 31.3.71)

(2) पारस्परिक अदला -बदली के आधार पर अंतर रेलवे और अंतरा रेलवे स्थानांतरण के आदेश दोनों पार्टियों की सहमति से किए जाते है। इनके आवेदन पत्रों को अग्रेषित करते समय यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि किन्ही भी परिस्थितियों में इस व्यवस्था में परिवर्तन के किसी अनुरोध को स्वीकार नही किया जाएगा और कर्मचारी को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। बोर्ड ने इसका कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिये है 

(आर.बी.ई. 21 /2006, दिनांक 21.4.2006 , 200 /2009 दिनांक 12.11.2009 )

(3) स्थानांतरण के आवेदन कर्मचारी की अपनी रेल के अलावा दूसरी रेल पर भी रजिस्टर में नोट किये जाने चाहिये।  उपयुक्त रजिस्टर मंडल, कारखाना और मुख्यालय सभी इकाईयो में रखने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. /रेप /1 - 83 ऐ ई 1 /मिस. /स्टाफ ग्री. दिनांक 25.5.83.) 

(4) स्थानांतरण के आवेदनों पर सुसंगठित ढंग से कार्यवाही करनी चाहिये इस बारे में किसी कर्मचारी के मन में शिकायत का अवसर न आये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई (एन.जी.) 1 -8 /टी. आर. /26, दिनांक 8.6.83.)

(5) जिस जगह कर्मचारी स्थानांतरण चाहता है, वहाँ संवर्ग मं. कोई रिक्ति हो तो तुरंत आवेदन स्वीकार करने में कोई कठिनाई नही होनी चाहिये और तुरंत संबंधित अधिकारियो को सूचित कर देना चाहिये। (बोर्ड का पत्र सं. वही दिनांक 6.6.83 )

5(क) निम्नतम वरिष्ठता पर अंतर क्षेत्रीय स्थानांतरण के अनुरोध:-निम्नतम वरिष्ठता पर स्थानांतरण के लिए रेल सेवको व्दारा अनुरोध कठिन परिस्थितियों के विशेष मामलो के आधार पर किए जाते है, इसलिए रिक्तियों की मौजूदगी की आधार पर अस्वीकार न किया जाए।  यदि रिक्तियों की मौजूदगी की आधार पर अस्वीकार न किया जाए तो सीधी भर्ती अथवा पदोन्नति, जैसा भी मामला हो, के व्दारा रिक्तियों को भरने के लिए एक समयबध्द कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिये । 

(सं. ई (एन. जी.) 1-2005/(टी.आर.)22, दिनांक 6.10.2005 (आर.बी.ई. 170 /2005)

(6) जब रेल भर्ती बोर्डो को इंडेंट भेजे जाये तो जितने कर्मचारियों ने विभिन्न संवर्गो में आने या उससे बाहर जाने के लिए आवेदन किया हो उनकी संख्या को ध्यान में रखते हुए निर्णय करना चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन.जी.) 11 -70 /आर.आर.1/31, दिनांक 11.1.71 और उपर्युक्त वही दिनांक 25.5.83 तथा 6.6.83) 

(7) नई इकाई/संवर्ग में वरीयता सबके नीचे निर्धारित होने के बावजूद यदि नई इकाई में पदोन्नति की शर्त के रूप में न्यूनतम सेवा अवधि निर्धारित हो तो पात्रता निश्चय करने के लिए पुरानी इकाई में की गई सेवा की गणना की जा सकती है, बशर्ते वह नई इकाई में उसके आसन्न वरिष्ठ की सेवा अवधि से अधिक न हो यह लाभ तभी मिलेगा जब दोनों इकाईयो में वह समान कोटि के पद पर काम करे । 

(आर. बी. ई. 34/2006, दिनांक 21.3.2006)

(8) उसी वरीयता इकाई में स्थानान्तरण के आवेदन:

(क) उसी वरीयता इकाई में अपनी पसंद के स्टेशन के लिए स्थानांतरण के लिए भी आवेदनों के रजिस्टर रखने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी. ) 1- 91 /टी. आर /14, दिनांक 1.10.71) यही (ख) और (ग) के लिए भी 

(ख) यदि कुछ स्टेशन पोस्टिंग के लिए लोकप्रिय न हो तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनमे सभी अधिकृत पद भरे रहे, कोई निश्चित अवधि तय की जा सकती है जिसमे वहाँ काम करने के बाद ही अधिक लोकप्रिय स्थान पर स्थानांतरण किया जाये ।

(9) स्कूल सेशन के मध्य में स्थानांतरण केवल प्रशासन के हित में कम - से - कम होने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. वही दिनांक 1.17.71.)

(10) दिक्कतों के आधार पर स्थानांतरण के आवेदनों पर सहानुभूति पूर्ण विचार करना चाहिये । 

(नियम 226 आर. पर दिया निर्णय )

(11) विकलांग कर्मचारियों के अपने मूल निवास - स्थान या उसके समीप स्थानांतरण के आवेदनों को प्राथमिकता देनी चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई (एन जी.) 1-91/टी. आर /13, दिनांक 11.2,92) 

(12) यदि कोई माता - पिता, जिसका बच्चा मानसिक रूप से अपंग हो, अपनी पसंद की जगह पर स्थानांतरण के लिए आवेदन करे तो जहाँ तक संभव हो उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिये।  

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन.जी.) 1-91 / टी. आर./15, दिनांक 13.5.91)

13. स्थानांतरण के आवेदन के जो रजिस्टर नियमानुसार रखे जाते है उन्हें समय - समय पर पूरा करते रहना चाहिये, जैसे वर्ष में एक बार या छमाही। जो लोग स्थानांतरण के इच्छुक न हो उनके नाम उसमें से काट देने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी.) 1-61/ टी. आर. /28 दिनांक 6.12.96, आर. बी. ई. 122 /96 - मास्टर सर्कुलर सं. 24 के संदर्भ में) 

अनुकम्पा नियुक्ति की समय सीमा - Indian Railway

1) सामान्यतः: ड्यूटी करते हुए जिन कर्मचारियों की मृत्यु हो जाए या जो स्थाई तौर पर अपंग हो जाएके मामले में नियुक्ति 1 माह में कर दी जानी चाहिये और अन्य मामलो में 3 माह के अंदर। यह समय सीमा होते हुए भी नियुक्ति यथाशीघ्र करने का प्रयास किया जाना चाहिये। 

घटना के पश्चात अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति के लिए पात्रता की अवधि 5 वर्ष तक रखी गई है। जिसे महाप्रबंधक की अनुमति से 20 वर्ष बढ़ाया जा सकता है। यदि कर्मचारी की मृत्यु सेवा – काल में हो जाये, उसकी विधवा नौकरी करने की स्थिति में न हो और उसके बच्चे वयस्क न हो तो अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति का मामला तब तक रोक जा सकता है जब तक पहला बेटा /बेटी व्यस्क नही हो जाता। महाप्रबंधक अनुकम्पाके आधार पर नियुक्तियां 5 वर्ष के बाद और 20 वर्ष तक भी स्वीकृत कर सकते है – यदि निम्न शर्ते पूरी होती हो – 

अनुकम्पा भर्ती में निकट संबंधी की नियुक्ति के सामान्य नियम

यदि स्वर्गीय कर्मचारी केवल विधवा को ही पीछे छोड़ जाता है, अर्थात उसके बच्चे नही होते, तो प्रत्येक मामले की परिस्थिति के आधार पर और निकटता की दृष्टि से मृत्यु के पांच वर्ष के भीतर किसी निकट संबंधी की नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है। बशर्ते कि रेलवे बोर्ड के पत्र (सं. ई. (एन.जी.) III/78 / आर.सी. 1/1 दिनांक 3.2.81 तथा ई. (एन.जी.) II/ 88/ आर. सी. 1/1 दिनांक 12.2.90 )के प्रावधान पूरे होते हो। 

(रेलवे बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी.) II/88/ आर. सी. 1/1 पालिसी,दिनांक 16.5.91 बाहरी का 102/91 तथा ई. (एन.जी.) 11/91 आर.सी. 1/1/65 बाहरी का 143/91.) 

किसी निकट संबंधी की अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति निम्नलिखित शर्तो पर की जाएगी – 

अनुकम्पा भर्ती के लिए न्यूनतम शैक्षिक अर्हता में छूट

(1) सामान्यत: किसी पद के लिए निर्धारित शैक्षिक अर्हता में कोई छूट नही दी जानी चाहिये। तदपि यदि महाप्रबंधक महसूस करते है कि किसी केस की परिस्थितियो के आधार पर ऐसी छूट अनिवार्य है तो रेल मंत्रालय को ऐसा मामला भेजा जा सकता है परन्तु उसमे इस बात का उल्लेख किया जाएगा कि अभ्यर्थी निश्चित समय – सीमा में वह अर्हता प्राप्त कर लेगा। 

यह सुनिश्चित करने के लिए कि अभ्यर्थी कम – से – कम समय में अपेक्षित अर्हता प्राप्त करे और समय – सीमा में वृध्दि को अपना अधिकार न मान ले और यह न समझे कि अन्यथा उसे निम्नतर कोटि में तो रख ही लिया जाएगा, शैक्षिक अर्हता में छूट दिये गये मामलो में निम्नलिखित शर्तो का उल्लेख किया जाएगा – 

1. अर्हता प्राप्त करने के लिए अनुमेय अवधि दो वर्ष होगी। 

2. जब तक वह अर्हता प्राप्त नही कर लेता उसे सेवा में स्थाई नही किया जाएगा। 

अनुकम्पा के आधार पर भर्ती में पद के लिए उपयुक्तता की जाँच

अनुकम्पा के आधार पर भर्ती के लिए उपयुक्तता टेस्ट लिया जाएगा, जिससे अभ्यर्थी की उपयुक्तता जाँची जाएगी।  परन्तु उसके लिए कठोर मानक नही रखे जाएंगे केवल यह सुनिश्चित करना होगा कि वह व्यक्ति उस पद के कर्तव्यों को वहन करने की स्थिति में है। यदि अभ्यर्थी के पास निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक अर्हता है तो उसे समूह ‘ग’ के पद पर नियुक्त करने पर विचार किया जाएगा जिसके लिए वह पात्र तथा उपयुक्त है और यदि वह उसके लिए उपयुक्त नही पाया जाता तो उसे समूह ‘ग’ के किसी वैकल्पिक पद नियुक्त करने पर विचार किया जाएगा। 

यह आवश्यक नही है कि समूह ‘घ’ के कर्मचारी के आश्रित को समूह ‘घ’ में ही नियुक्त किया जाए। यदि वह ‘समूह ग’ के लिए योग्य तथा पात्र है तो उसे ‘समूह ग’ में ही नियुक्त किया जाना चाहिए। 

(रेलवे बोर्ड पत्र सं. ई. (जी) 83/ई.सी. 2 (एल.टी. IV) दिनांक 27.6.85 बाहरी 183/85)

अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति करने के लिए उपयुक्तता –टेस्ट तीन वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी व्दारा लिया जाएगा,जिसमें एक अधिकारी कार्मिक शाखा से तथा अन्य दो अन्य विभागों से होगे। बेहतर होगा कि एक अधिकारी उस विभाग से हो जिसमें कर्मचारी को नियुक्त किया जाना है।  किसी पद के लिए उपयुक्त होने पर भी नियुक्ति का प्रस्ताव तभी दिया जाएगा जब कोई रिक्ति हो।  किसी पद ग्रेड में नियुक्ति के बाद उमसे परिवर्तन नही किया जाएगा। (रेलवे बोर्ड सं. ई. (एन.जी.) II – 87 आर.सी. 1/57, दिनांक 21.8.87, 24.11.92 बाहरी का 218 /87)

ग्रुप ‘सी’ के लिए दुबारा योग्यता परीक्षा – ग्रुप ‘सी’ पद के लिए कोई उम्मीदवार पहली बार उपयुक्तता परीक्षा में असफल हो जाए तो परिस्थिति के अनुसार, जहाँ दूसरा मौका देना जरूरी लगता हो, प्रत्येक मामले की पात्रता के अनुसार, दूसरा मौका देने के निवेदन पर सक्षम अधिकारी विचार कर सकता है। 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी.) – II/99 /आर.सी. – 1/3 पी.एन.एम. – ए. आई. आर. एफ. दिनांक 28.4.99, आर.बी.ई. – 84 /99)

यदि कर्मचारी की विधवा दूसरे मौके पर भी अनुपयुक्त पाया जाए तो पात्र मामलो में परिस्थिति के अनुसार केवल महाप्रबंधक की अनुमति से तीसरा मौका दिया जा सकता है। 

(आर. बी. ई. 192/ 2001, दिनांक 21.9.2001)

गोद लिए बच्चियों की पात्रता –

यदि निम्नलिखित सभी शर्ते पूरी होती हो तो गोद लिए बेटा /बेटी को भी अनुकम्पा के आधार पर नियुक्त किये जाने पर विचार किया जा सकता है 

i. गोद लिए जाने का कानूनी तौर पर वैध और संतोषजनक प्रमाण मौजूद हो 

ii. रेलवे कर्मचारियों पर लागू वैयक्तिक क़ानून के अंतर्गत दत्तक करण कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त हो 

iii. भूतपूर्व कर्मचारी की मृत्यु /डॉक्टरी आधार पर निवर्गीकरण / शारीरिक अक्षमता से पूर्व ही कानून दत्तक करण कार्यवाही पूरी हो चुकी हो तथा वैध हो। (रेलवे बोर्ड सं. ई. (एन.जी.) II/86 आर.सी. 1/1/पालिसी , दिनांक 20.5.68 बाहरी का 106/88)

लेखा  विभाग में नियुक्ति 

अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति यदि कनिष्ठ लेखा सहायक के रूप में होती है तो उसके नियुक्ति पत्र में सामान्य नियमों के अनुसार तीन वर्ष के अंदर परिशिष्ट 2- ए पास करने की शर्त शामिल होगी और ऐसा न कर पाने पर कर्मचारी को लेखा लिपिक के रूप  में पदावनति कर दिया जाएगा। 

(रेलवे बोर्ड सं. ई. (एन.जी.) आर. सी. 1/141, दिनांक 8.3.90 बाहरी 46/90)

सुरक्षा विभाग में नियुक्ति

सुरक्षा विभाग तथा सुरक्षा बल/ विशेष बल में रिक्तियो पर विभाग तथा बलों के आश्रितो की अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति उनकी योग्यता के आधार पर की जाएगी।  जब ऐसा संभव न हो तो किसी अन्य विभाग में नियुक्ति पर विचार किया जाए।  दूसरे विभागों के आश्रित की नियुक्ति पर जब कोई रिक्ति हो तो विचार किया जाएगा। 

(पत्र सं. 2002/एस.ई.सी (ई) /आर.सी./पी.आर.ई.एम. दिनांक 3.1.2003)

यांत्रिक विभाग के कारखानों में भर्ती को उसी कारखाने मंक मामलों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। मंडल या मुख्यालय के मामलों में कारखाने में नियुक्ति नही की जाएगी, किन्तु जहाँ भी संभव हो कारखाने से नियुक्ति के मामले मंडल या मुख्यालय में शामिल किये जा सकते है। 

(आर.बी.ई. 26 /2003, दिनांक 5.2.2003) 

समूह ‘घ’ में विधवाओ के लिए आरक्षित पद 

समूह ‘घ’ में यह पद विधवाओ के लिए आरक्षित रहेगे इन पदों के लिए न्यूनतम शिक्षा की योग्यता पर भी जोर नही दिया जायेगा – पानी वाली, रिटायरिंग रूम परिचारिका, राख बीनने वाली, सफाई वाली,  कैरिज और वैगन खलासी (केवल रद्दीपैक करने के लिए) अस्पतालों और स्कूलों में आया और सफाई वाली, सहायक इंजीनियर, पी. डब्ल्यू आई. और  आई. ओ. डब्ल्यू के दफ्तरों में खलासी आदि। (रेलवे बोर्ड सं. ई. (एन. जी.) III /86 आर .सी. 1/1 पालिसी 25.3.86 बाहरी का 66/86)

जहाँ पति /पत्नी दोनों ही रेल कर्मचारी हो 

दोनों में से जिसकी भी मृत्यु पहले हो तो नियमानुसार अनुकंपा पर नियुक्ति की जा सकेगी, किन्तु केवल एक ही व्यक्ति की नियुक्ति होगी।

(आर.बी. ई 75/97 , दिनांक 2.6.97)

नैमित्तिक श्रमिक की मृत्यु

यदि अस्थायी स्तर प्राप्त करने के बाद नैमित्तिक श्रमिक की मृत्यु काम करते हुए हो जाये तो उसकी विधवा या बच्चे को अनुकम्पा के आधार पर केवल नैमित्तिक श्रमिक (नया चेहरा) के रूप में ही महाप्रबंधक स्वयं अपने विवेक से नियुक्ति दे सकते है। नैमित्तिक श्रमिक की भर्ती पर रोक के कारण उसे एवजी के पद पर रखा जा सकता है। ऐसा कोई नैमित्तिक श्रमिक लम्बे अरसे से गायब हो तो उसके मामले में भी नियुक्ति पर विचार किया जा सकता है

(आर. बी. ई. 137/97, दिनांक 17.10.97)

ग्रुप ‘सी’ पदों की उपयुक्तता परीक्षा एक ही दिन में पूरी कर दी जाएगी

अर्थात लिखित और मौखिक परीक्षा एक ही दिन आयोजित की जाएगी जिससे आश्रित /विधवा को असुविधा न हो। 

(बोर्ड का पत्र सं.  ई. (एन. जी.) 11/98 आर. सी. – 1/56/पालिसी, दिनांक 29. 7. 98 आर. बी. ई. – 158 /98)

Also See


अनुकम्पा भर्ती पर विचार करने के लिए सामान्य नियम

अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां उन रेलवे कर्मचारियों के आश्रित को दी जाती है जिनकी मृत्यु, ड्यूटी के दौरान अथवा सेवा – काल में हो जाती है या सेवाकाल में अपंग, विकलांग, अक्षम अथवा अपने पद से अवर्गित हो जाए अथवा ह्रदय रोग, कैंसर या ऐसी बीमारियों के कारण अपने पद पर बने रहने के योग्य न रहे और उन्हें उचित परिलब्धियो पर कोई वैकल्पिक नौकरी न दी जा सके। 

अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति निम्नलिखित स्थितियों में कमर्चारी के आश्रित को दी जाती है –

i ड्यूटी करते हुए जिन कर्मचारियों की म्रत्यु हो जाए या जो स्थाई तौर पर अपंग हो जाए,

ii रेल दुर्घटना के कारण ड्यूटी पर न होते हुए रेलवे कर्मचारी की असामयिक मृत्यु हो जाए,

अनुशासन एवं अपील नियम के अंतर्गत जाँच रिपोर्ट पर कार्यवाही के समान्य नियम (नियम - 10 )

 1. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी ने स्वयं जाँच की हो अथवा यदि उसने स्वयं जाँच न करके जाँच अधिकारी से कराई हो, प्रत्येक परिस्थिति में जांच की रिपोर्ट के सभी या किसी पहलू पर निर्णय लेते हुए यह निश्चय करेगे कि उनके विचार से दी जाने वाली शास्ति उनके अधिकारी क्षेत्र में है या नही। 

(अ) यदि दी जाने वाली शास्ति उनके अधिकारी क्षेत्र में है तो वे अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यो के आधार पर अगली कार्यवाही कर सकते है अथवा यदि उनके विचार में न्याय के हित में किसी गवाह का और आगे परीक्षण किया जाना आवश्यक हो तो वे उस गवाह को बुलाकर उसका परीक्षण, प्रतिपरीक्षण एवं पुन: परीक्षण कर सकते है और ऐसी सजा दे सकता है जो उनके अधिकारी क्षेत्र में हो।  

(ब) यदि अनुशासनिक प्राधिकारी के विचार से दी जाने वाली उपयुक्त सजा उनके अधिकारी क्षेत्र से बाहर है तो वे जाँच कार्यवाही के तब तक के समूचे कागजातों को सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी के पास भेजेगे जिसपर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी निर्णय लेंगे । 

2. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी स्वयं जाँच अधिकारी नही है एवं जांच रिपोर्ट से सहमत नहीं है तो, वे चाहे तो कारणों का उल्लेख करके, जाँच अधिकारी के पास मामले पर पुन: और आगे विचार करने हेतु भेज सकते है, जिस पर जाँच अधिकारी नियम - 9 के अनुसार "जहाँ तक संभव हो सके वहाँ तक" पुन: आगे जाँच कर सकते है ।

3. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी आरोप के किसी शीर्षक (आर्टिकल) पर जाँच अधिकारी के किसी निष्कर्ष से असहमत हो तो असहमति के कारणों का उल्लेख करते हुए आरोप के उस शीर्षक पर अपना निर्णय लिखेगे, बशर्ते ऐसा करने के लिए अभिलेख पर पर्याप्त साक्ष उपलब्ध हो। 

4. यदि अनुशानिक प्राधिकारी आरोप के सभी या किसी शीर्षक पर जाँच अधिकारी व्दारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर यह विचार करते है कि नियम - 6 के क्लाज (i) से (iv) के अंतर्गत आने वाली कोई लघु शास्ति दी जानी चाहिए, तो वे नियम - 11 के प्रावधानों पर बिना ध्यान दिये हुए ऐसी सजा का आदेश पारित कर सकते है।  

नोट - प्रावधान यह है कि ऐसे हर एक मामले, जिनमे संघ लोक सेवा आयोग की परामर्श लेनी आवश्यक हो, को जाँच प्रक्रिया के सभी कागजातों के साथ आयोग के पास उसकी परामर्श लेनी आवश्यक हो, को जाँच प्रक्रिया के सभी कागजातों के साथ आयोग के पास उसकी परामर्श के लिए भेजेगे और कर्मचारी को कोई दण्ड देने से पूर्व उसकी परामर्श पर अवश्य विचार करेगे । 

5. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी आरोप के प्रत्येक या किसी एक शीर्षक पर दिये गये जाँच निष्कर्ष और जाँच के दौरान प्रस्तुत किये गये साक्ष्यों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचता हो कि नियम - 6 के क्लाज (v) से (ix) के अंतर्गत आने वाला कोई दण्ड दिया जाना चाहिए तो वे ऐसा कर सकते है, जिसके आरोपित रेल सेवक को प्रस्तावित शास्ति के संबंध में सूचना देना अथवा प्रतिवेदन करने का अवसर प्रदान करना आवश्यक नही होगा. 

i. बर्खास्तगी / पदच्युति के दण्ड के मामले में अनुशासनिक अधिकारी को रेल सेवा (पेंशन) नियम 1993 के नियम 65 के अंतर्गत अनुकम्पा भत्ता या ग्रेचुटी या दोनों के संबंध में भी निर्देश पारित करने चाहिये। (RBE 79 / 05, 164/08)

ii. निचले वेतनमान में दिए गए दण्ड के प्रभावी होने से पूर्व उच्च वेतनमान में पदोन्नति होने पर दण्ड पदोन्नति वाले पद पर उतनी ही अवधि के लिए लागू रहेगा जितना की नीचे वेतनमान में दिया गया था ।(RBE 200/01)

iii. बड़ी शास्ति की अनुशासनिक कार्यवाही को पूरा करने के लिए 150 दिन की मोडल समय अनुसूची निर्धारित की गई है 

(Rly.Bd's letter 52E/0126/v/III(E D&AR) dt.07.06.95 & NR PS 11012)

iv. संरक्षा संबंधि अनुशासनिक मामलो में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया RRE 36/03में दी गई है।


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रेलवे कर्मचारियों के लिए MACP से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों के स्पष्टीकरण

1. क्या MACP के अंतर्गत लाभ प्रदान करने पर पे बैंड तथा ग्रेड पे के पदानुक्रम में पे बैंड में परिवर्तन होगी ? 

उत्तर :- MACP के अंतर्गत अपग्रेडेशन, रेल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2008 में निर्धारित किए गए अनुसार सिफारिश किए गए संशोधित पे बैंड तथा ग्रेड पे के पदानुक्रम में ठीक अगले उच्चतर ग्रेड पे में प्रदान किया जाता है। 

2. क्या MACP के लाभ उन रेलवे कर्मचारियों को भी दिए जाएंगे, जिन्हें बाद में संगठित ग्रुप ‘ए’ सेवा में शामिल कर दिया गया है ? 

उत्तर :- नहीं,MACPयोजनाओं के अंतर्गत लाभ संगठित ग्रुप ‘ए’ सेवाओं के ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों पर लागू नही है, क्योंकि संगठित ग्रुप ‘ए’ सेवाओं के अंतर्गत अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ गैर –कार्यात्मक आधार पर दो वर्ष की सभ्यता की पहले ही अनुमति दे दी गई है । 

3. क्या MACP के लाभ के लाभ उन रेलवे कर्मचारियों को भी दिए जाएंगे जिन्हें बाद में संगठित ग्रुप ‘ए’ सेवा में शामिल कर दिया गया है? 

उत्तर :- MACP के लाभ प्रवेश ग्रेड में पद का वास्तव में कार्यभार संभालने की तारीख में उपलब्ध होंगे। 

4. ऐसे मामलो में जहाँ कर्मचारी को उपयुक्त न पाए जाने अथवा विभागीय कार्रवाई किए जाने आदि के कारण पहले /दूसरे वित्तीय अपग्रेडेशन को स्थगित रखा जाता है तो क्या इसका दूसरे / तीसरे वित्तीय अपग्रेडेशन पर परिणामी प्रभाव पड़ेगा या नही ? 

उत्तर :- जी हाँ यदि किसी कर्मचारी को उपयुक्त न पाए जाने अथवा विभागीय कार्रवाई आदि के कारण वित्तीय अपग्रेडेशन आस्थगित / विलम्बित किया जाता है तो एमएसीपीएस के अंतर्गत दूसरे और तीसरे वित्तीय अपग्रेडेशन पर इसके परिणामी प्रभाव पड़ेगा (एमएसीपी के अनुबंध – 1 के पैरा 18 में देखे) 

5. यदि किसी रेल कर्मचारी ने पहले ही तीन पदोन्नतियां प्राप्त कर ली हो और अब भी वह 10 वर्ष से ज्यादा समय से एक ग्रेड में ही हो तो क्या वह MACP के अंतर्गत और आगे अपग्रेडेशन पाने का पात्र होगा ? 

उत्तर :- जी नही चूकि सरकारी कर्मचारी ने तीन पदोन्नतियां पहले ही प्राप्त कर ली है इसलिए वह MACP के अंतर्गत आगे किसी और वित्तीय अपग्रेडेशन का पात्र नही होगा। 

6. क्या ग्रुप ‘डी’,नान– मैट्रिकुलेट कर्मचारियों के मामले में रु. 2750 – 4400 के संशोधन पूर्व वेतनमान को रु. 2550 – 3200, रु. 2610 – 3540, रु, 2610 – 4000 और रु. 2650 – 4000 के संशोधन पूर्व के वेतनमानो में अपग्रेड कर दिया गया है और पे बैंड पीबी – 1 में रु. 1800 के ग्रेड पे के संशोधित वेतन संरचना में प्रति स्थापित कर दिया गया है, कि मर्जर को देखते हुए MACP के प्रयोजन के लिए रु. 1800 के ग्रेड पर को मर्ज हुआ माना जाएगा ? 

उत्तर :- जी हाँ 

7. चूकि ग्रुप ‘डी’ कर्मचारियों के वेतनमानों को मर्ज कर दिया है और उन्हें रु. 1800 के ग्रेड पर कर दिया गया है और उन्हें रु.1800 के ग्रेड पे में रखा गया है तो क्या वे प्रत्येक चरण में वेतन के निर्धारण के दौरान 3% की दर पर वेतनवृध्दि पाने का हकदार होंगे? 

उत्तर :- जी हाँ MACP के अनुबंध – 1 के मद 22 के समनरूप ऐसे ग्रुप ‘डी’ कर्मचारियों का वेतन जिन्हें 1.1 2006 से 1800 के ग्रेड पे में रखा गया है, प्रत्येक में वेतन निर्धारण में 3% का लाभ प्रदान चरण करते हुए संशोधित पे बेंड और ग्रेड वेतन मानो की पदानुक्रम में ठीक अगले तीन उच्चतर ग्रेड पे में निर्धारित किया जाएगा। (दिनांक 29.9.2010 , आर. बी.ई. 143 /2010) 

नोट :-नियमित स्टाफ कार ड्राइवरो को एक ‘फाल – बैंक’ विकल्प के तौर पर MACPयोजना का लाभ देने का निर्णय लिया गया है, यदि उन्हें विद्यमान प्रतिशतता आधार वाली प्रणाली के भीतर पदोन्नति नही मिल पाती है। 

(दिनांक 18.8.2010 , आर. बी. ई. 122/2010.)

Indian Railway प्रतिनियुक्ति के दौरान कार्यकाल,पदोन्नतियां एवं अन्य सामान्य नियम

(1)           प्रतिनियुक्ति की अवधि अधिकतम 3 वर्ष की होगी सिवाय उन पदों के जिनके लिए भर्ती नियमों में अधिक लम्बी अवधि निर्धारित हो,

(2)           प्रशासनिक मंत्रालय इस सीमा से अधिक बढ़ाने की आज्ञा दे सकते है परन्तु इसके लिए उन्हें अपने सचि के आदेश प्राप्त करने होंगे और यह ऐसे मामलो में किया जाएगा जिन्हें जनहित में आवश्यक समझा जाएगा।

(3)            जहाँ नितान्त आवश्यक हो वहाँ कर्मचारी के स्वीकार करने वाला मंत्रालय /विभाग प्रतिनियुक्ति को पाँचवें वर्ष के लिए अथवा भर्ती नियमों में निर्धारित अवधि से दो र्ष अधिक तक बढ़ा सकते है परन्तु इसके लिए निम्नलिखित शर्तें है –

i.                  पाँचवें र्ष अथवा भर्ती नियमों में निर्धारित अवधि के पश्चात दूसरे वर्ष के लिए समय वृध्दि करते हुए समय काल –नियमों  को कठोरता पूर्वक लागू करने के बारे में निर्देशों को ध्यान में रखना होगा और ऐसी वृध्दि केवल विरले तथा अपवादात्मक परिस्थितियों में स्वीकृत की जाएगी।


ii.               वृध्दि बिलकुल जनहित में होनी चाहिये और इसके लिए स्वीकार करने वाले मंत्रालय / विभाग के संबंधित मंत्री की पूर्व अनुमति चाहिये।

 

iii.               यदि ऐसी वृध्दि की अनुमति दी गई हो तो यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अधिकारी को प्रतिनियुक्ति (ड्यूटी) भत्ता नही मिलेगा।


iv.                           वृध्दि के लिए अधिकारी के मूल विभाग और जहाँ आवश्यक हो यूं. पी. एस. से अनुमति लेनी होगी।


(4)जिन मामलो में अवधि की वृध्दि पाँचवें वर्ष से अधिक या भर्ती नियमों के निर्धारित अवधि के पश्चात दूसरे वर्ष तक हो, तो इसके लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक है। इसके लिए प्रस्ताव इस विभाग कोबढ़ाई गई अवधि की समाप्ति से कम – से कम तीन मास पहले पहुंचने चाहिये।

 

(5)जब प्रतिनियुक्ति की अवधि के बढ़ाने पर विचार किया जाये तो उसकी अवधि को उस तरह से निश्चित की जानी चाहिये कि जिससे  अधिकारी के बच्चे स्कूल – कालेज जाने वाले हो वह शैक्षिक वर्ष के पूरा होने तक प्रतिनियुक्ति पर रह सके।

(6) प्रतिनियुक्ति की कुल अवधि की गणना करने के लिए केन्द्रीय सरकार उसी अथवा अन्य संस्थान / विभाग में वर्तमान नियुक्ति से तुरंत पहले बितायी गई अन्य संवर्ग बाह्य पद पर प्रतिनियुक्ति की अवधि को भी शामिल किया जाएगा।

(आर.बी.ई. 51/2008, दिनांक 4.4.2008)


प्रतिनियुक्ति अवधि के दौरान पदोन्नतियां –

(1)         जब कर्मचारी को स्वीकार करने वाला प्राधिकारी पहले से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारी को पदोन्नत अथवा अन्य पद पर नियुक्त करना चाहे तो उसे पदोन्नति / नियुक्ति से पूर्व मूल प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।


(2)प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारी को नेक्स्ट बिलों रूल का लाभ दिया जा सकता है बशर्ते इस कार्यालय ज्ञापन में उल्लिखित अन्य शर्तें लागू की जाए।

प्रतिनियुक्ति के कार्यकाल की समाप्ति पर छुट्टी प्रदान करना – प्रतिनियुक्ति पद से मूल काडर में लौटते समय उसे स्वीकार करने वाला मंत्रालय / विभाग /संस्थान उसे अधिकतम दो मास की छुट्टी दे सकता है। अधिक छुट्टी के लिए कर्मचारी को अपने काडर नियन्त्रण प्राधिकारी को आवेदन देना होगा।

प्रतिनियुक्ति व्यक्ति की अपने मूल काडर में समयपूर्व वापसी –सामान्यतः: जब एक कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त होता है तो उसक प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने पर मूल मंत्रालय / विभाग को वापिस कर दी जाती है तदापि यदि मूल काडर मेंवापसी समय पूर्व किये जाने की स्थिति पैदा हो जाए तो उसे मूल मंत्रालय / विभाग को उपयुक्त नोटिस देने के पश्चात– लौटाया जा सकता है।

प्रतिनियुक्ति (ड्यूटी) भत्ते की स्वीकृति प्रशासनिक मंत्रालय / विभाग अपने नियंत्रण में कार्यरत कार्यालयों के कर्मचारियों को इन शर्तों व नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति (ड्यूटी) भत्ते की स्वीकृति देने में सक्षम है यह स्वीकृति स्थानांतरण करने वाले मंत्रालयों / विभागों व्दारा अथवा स्वीकार करने वाले मन्त्रालयो /विभागों व्दारा दी जा सकती है, जैसा भी प्रत्येक मामले में परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त हो।

·       इन नियमों व शर्तों में किसी भी ढील के लिए कार्मिक तथा प्रशिक्षण विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक है।

·      जहा तक भारतीय लेखा परीक्षा विभाग के कर्मचारियों का संबंध है यह आदेश नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के साथ मशवरे के बाद जारी किये जा सकते है।

(रेलवे बोर्ड पत्र सं. एफ. (ई.) 11/84 डी. ई. 1/1,दिनांक 5.12.94, आर. बी. ई. 1/10/94.

·       गैर – राजपत्रित कर्मचारियों की राइट्स / इरकान / कानकोर / क्रिस में प्रतिनियुक्ति की अवधि में विस्तार के प्रस्ताव 3 साल या 4 साल पूरे होने के कम – से – कम तीन माह पहले बोर्ड के पास आदाता संगठन के व्दारा संबंधित क्षेत्रीय रेल /उत्पादन इकाई की सहमति के साथ भेज देने चाहिए।

·       यदि अनुमोदित अवधि की समाप्ति के पहले सक्षम अधिकारी की स्वीकृति प्राप्त न हो तो उसे स्वीकृत नही मानना चाहिए और कर्मचारी को अनिवार्य रूप से वापिस कर देना चाहिए। निर्धारित प्रोफार्मा को ठीक से भरकर क्षेत्रीय रेल /उत्पादन इकाई की सहमति के साथ उचित समय से प्रस्ताव भेज देने की कार्यविधि अपनानी चाहिए ताकि भविष्य में प्रतिनियुक्ति की शर्तों का अनधिकृत विस्तार न हो। (आर. बी. ई. – 218/2000, दिनांक 18.12.2000.)


नोट - यह ध्यान रखा जाए कि –

(1)           प्रतिनियुक्ति की अवधि को 5 साल से अधिक नही बढ़ाया जाएगा

 (2)           प्रत्येक प्रतिनियुक्ति अवधि के बाद संयुक्त सचिव स्तर तक रेल अधिकारियों के लिए 3 वर्ष और अपर सचिव स्तर के पदों के लिए एक वर्ष की अनिवार्य ‘कूलिंग आफ ‘ अवधि होगी

(3)           सम्पूर्ण सेवा अवधि में ऐसी प्रतिनियुक्ति / इतर सेवा अधिकतम 7 वर्ष की अवधि के लिए होगी।

 (4) रेलवे /केंद्र सरकार के कर्मचारी राज्य सरकारों / राज्य सरकार के संगठनों /संघ शासित सरकारों / अन्तर राष्ट्रीयसंगठनों / स्वायत्त निकायों, ट्रस्टी , सोसाइटियों, सार्वजनिक क्षेत्रों के उन उपक्रमों में प्रतिनियुक्ति / इतर सेवा के लिए पात्र होंगे जो केंद्र सरकार व्दारा नियंत्रित नही है बशर्ते कि उन्होंने 9 वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो तथा उनके विरुद्ध कोई सतर्कता मामला नही हो तथा पिछले 5 वर्षों में संगठन व्दारा कोई कार्रवाई नही की गई हो।

(5) (a) यदि प्रतिनियुक्ति की अवधि के दौरान, नेक्स्ट बिलों के अंतर्गत मूल संवर्ग में प्रोफार्मा पदोन्नति अथवा अपग्रेडेशन के कारण, संबंधित अधिकारी संवर्ग बाह्य पद की तुलना में मूल संवर्ग में उच्चतर वेतनमान /पे बैंड तथा ग्रेड पे का पात्र हो जाता है, तो उसे शेष अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पद (प्रोफार्मा पदोन्नति / अपग्रेडेशन का लाभ उठाए बिना) पर बने रहने अथवा 6 महीने की अवधि के भीतर अपने मूल संवर्ग में वापस आने का विकल्प होगा

 (b) यदि अधिकारी प्रतिनियुक्ति पद पर बने रहना चाहता है, तो प्रोफार्मा पदोन्नति/ अपग्रेडेशन के आधार पर कोई वेतन निर्धारण नही होगा तथा वह अपना वर्तमान वेतन लेता रहेगा। (आर. बी. ई. – 10/2010, दिनांक 12.1.2010)

 रेल सेवा (संशोधित वेतन) नियम के कार्यान्वयन के बाद प्रतिनियुक्ति पर वेतन का निर्धारण के संबंध में स्पष्टीकरण :


(1) रेल कर्मचारी जो किसी निचले पद पर प्रतिनियुक्ति पर जाते है, के वेतन का निर्धारण :

(i) उस मामले में जहाँ कोई रेल कर्मचारी किसी पद जिसका ग्रेड वेतन निचला है, पर प्रतिनियुक्ति पर  जाता है, वेतन बैड में उसका वेतन अपरिवर्तित रहेगा, लेकिन उसे प्रतिनियुक्ति की सम्पूर्ण अवधि के लिए निचले पद का ग्रेड वेतन प्रदान किया जाएगा।

(ii) उस मामले में, जहाँ एच ए जी + वेतनमान में कोई रेल कर्मचारी पी बी – 4 में किसी निचले पद पर प्रतिनियुक्ति पर जाता है, प्रतिनियुक्ति पद में उसका मूल वेतन उसकी सेवा के संवर्ग में उसके मूल वेतन के समान स्तर पर निर्धारित किया जाएगा, लेकिन वेतन बैंड में वेतन और प्रतिनियुक्ति पद के ग्रेड वेतन का कुल जोड़ 79,000 रूपये से अधिक नही होगा।

(iii) उस मामले में जहाँ उच्चतम वेतनमान में कोई रेल कर्मचारी पी बी- 4 में किसी निचले पद पर प्रतिनियुक्ति पर जाता है, वेतन बैंड में उसका वेतन पी.बी. – 4 (67000 रूपये) के अधिकतम स्तर पर निर्धारित किया जाएगा और उसे प्रतिनियुक्ति पद के साथ संबद्ध ग्रेड वेतन प्रदान किया जाएगा, लेकिन वेतन बैंड में वेतन और प्रतिनियुक्ति पद के ग्रेड वेतन का कुल जोड़ 79000 रूपये से अधिक नही होगा। यदि प्रतिनियुक्ति उच्चतम वेतनमान से एच ए जी + में किसी पद पर है, तो मूल वेतन एच ए जी ++ में सुरक्षित रखा जाएगाबहरहाल, उक्त रेल कर्मचारी प्रतिनियुक्ति की शेष अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पद के सम्बद्ध ग्रेड वेतन को आहरित करना जारी रखेगा।

(ख) उस मामले में जहाँ पी. बी.  – 4 में किसी पद पर प्रतिनियुक्ति पर कोई रेल कर्मचारी एच ए. जी + में किसी पद पर अपने संवर्ग में पदोन्नति प्राप्त करता है, उसका मूल वेतन उसकी सेवा के संवर्ग में उसके उसके तत्काल कनिष्ठ कर्मचारी के मूल वेतन के सन्दर्भ में निर्धारित किया जाएगा, लेकिन वेतन बैड में वेतन और प्रतिनियुक्ति पद के ग्रेड वेतन का कुल जोड़ 79, 000 रूपये से अधिक नही होगा।


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रेल कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति / बाह्य सेवा पर भत्तों तथा लाभों की ग्राह्यता(Admissibility)

(क) ऐसे भत्ते जो की आधार लेने वाले संगठन में तदनुरूप स्तर पर कार्य करने वाले नियमित कर्मचारियों के लिए ग्राह्य नही है वे भत्ते प्रतिनियुक्ति / बाह्य सेवा पर आने वाले अधिकारियों के लिए भी ग्राह्य नही होंगे चाहे ऐसे लाभ मूल संगठन में ग्राह्य होते हो।

(ख) निम्नलिखित भत्ते उधार देने तथा उधार लेने वाले संगठन की पारस्परिक सहमति व्दारा दिए जाएंगे–

(i) मकान किराया भत्ता / नगर प्रतिपूर्ति भत्ता

(ii) कार्यभार ग्रहण करने का समय तथा कार्यभार ग्रहण करने के समय का वेतन

(iii) यात्रा भत्ता तथा स्थानांतरण यात्रा भत्ता

(iv) शिक्षा भत्ता

(v) छुट्टी यात्रा रियासत

(ग) निम्नलिखित भत्ते / सुविधाएँइनमें से प्रत्येक के आगे स्पष्ट किए गए नियमों के अनुसार दि जाएगी –

(i)          महंगाई भत्ता –कर्मचारी उधार लेने वाले या उधार देने वाले संगठन में विद्यमान दर से महंगाई भत्ता पाने का हकदार होगा, किन्तु यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उसने संवर्ग बाह्य पद के समय वेतनमान में वेतन  पाने का विकल्प दिया है अथवा प्रतिनियुक्ति (ड्यूटी ) भत्ते के साथ अपने ग्रेड में वेतन का।


(ii)    चिकित्सा सुविधाएँ–इसे उधार लेने वाले संगठन के नियमों के अनुसार दिया जाएगा।


(iii) छुट्टी –प्रतिनियुक्ति / बाह्य सेवा पर गए अधिकारी को मूल संगठन के छुट्टी नियमों व्दारा दिया जाएगा। ऐसी कोई कर्मचारी अवकाश (वेकेशन) विभाग से अवकाश (नॉन–वेकेशन) विभाग में या इसके विपरीत जाता है तो उधार लेने वाले संगठन के छुट्टी नियम लागू होंगे। प्रतिनियुक्ति पद से वापस मूल संवर्ग में प्रत्यावर्तन के समय, उधार लेने वाले संगठन, ऐसे कर्मचारी को दो महीने से अधिक छुट्टी स्वीकृत नही करेगा। इससे आगे छुट्टी लेने के लिए कर्मचारी को अपने संवर्ग नियंत्रक प्राधिकरण को आवेदन करना चाहिए।

अवकाश वेतन तथा पेंशन अंशदान –

(i)     केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों / विभागों के तथा केंद्र और राज्य सरकार के बीच अवकाश वेतन तथा पेंशन अंशदान की वर्तमान व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। ऐसे मामलो में, केंद्र से राज्य सरकार में प्रतिनियुक्ति पर या इसके विपरीत राज्य से केंद्र में कर्मचारी को अवकाश वेतन देने की जिम्मेदारी उस विभाग की है जो उसकी छुट्टी देता है या जिस विभाग से कर्मचारी छुट्टी पर जाता है तथा उधार देने वाले संगठन को कोई अंशदान नही दिया जाएगा।

कर्मचारी की सेवा – निवृति के समय पेंशन/ अंशदायी भविष्य निधि में नियोक्ता का अंशदान प्रदान करने की जिम्मेदारी उसके मूल विभाग की होगी, उस विभाग की जिससे कर्मचारी सेवा – निवृति के समय स्थायी तौर पर संबंधित हो तथा प्रतिनियुक्ति दावा संगठन से कोई आनुपातिक अंशदान नही लिया जाएगा।


(ii) केंद्र सरकार के कर्मचारी की केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों / राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या स्वायत्त निकायों में बाह्य सेवा पर प्रतिनियुक्ति के मामले में, बाह्य सेवा के दौरान ली गई छुट्टियों की अवधि को छोडकर, अवकाश वेतन अंशदान तथा पेंशन अंशदान / अंशदायी भविष्य निधि (नियोक्ता का हिस्सा) अंशदान केंद्र सरकार को या तो स्वयं कर्मचारी देगा या उसके प्रतिनियुक्ति दाता संगठन व्दारा देय होगा।

(iii) इसके विपरीत केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों / राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्वायत्त निकायों से  केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के मामलो में अवकाश वेतन तथा पेंशन योगदान का प्रश्न दोनों की सहमति से हल किया जाएगा।

(रेलवे बोर्ड पत्र सं. एफ (ई.) II/94/डी/ ई.1/1, दिनांक 5.12.94 और भारत सरकार, कार्मिक विभाग का कार्यालय ज्ञापन सं. 2/29/91 स्था. वेतन – III दिनांक 5.1.94)


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