(1)
प्रतिनियुक्ति
की अवधि अधिकतम 3 वर्ष की होगी सिवाय उन पदों के जिनके लिए भर्ती नियमों में अधिक
लम्बी अवधि निर्धारित हो,
(2)
प्रशासनिक
मंत्रालय इस सीमा से अधिक बढ़ाने की आज्ञा दे सकते है परन्तु इसके लिए उन्हें अपने सचिव के आदेश प्राप्त करने होंगे और यह ऐसे मामलो में किया जाएगा जिन्हें जनहित
में आवश्यक समझा जाएगा।
(3)
जहाँ नितान्त
आवश्यक हो वहाँ कर्मचारी के स्वीकार करने वाला मंत्रालय /विभाग प्रतिनियुक्ति को पाँचवें
वर्ष के लिए अथवा भर्ती नियमों में निर्धारित अवधि से दो वर्ष अधिक तक बढ़ा सकते है परन्तु इसके लिए निम्नलिखित शर्तें है –
i.
पाँचवें वर्ष अथवा भर्ती नियमों में निर्धारित अवधि के पश्चात दूसरे वर्ष के लिए समय
वृध्दि करते हुए समय काल –नियमों को
कठोरता पूर्वक लागू करने के बारे में निर्देशों को ध्यान में रखना होगा और ऐसी
वृध्दि केवल विरले तथा अपवादात्मक परिस्थितियों में स्वीकृत की जाएगी।
ii.
वृध्दि बिलकुल
जनहित में होनी चाहिये और इसके लिए स्वीकार करने वाले मंत्रालय / विभाग के संबंधित
मंत्री की पूर्व अनुमति चाहिये।
iii.
यदि ऐसी वृध्दि
की अनुमति दी गई हो तो यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अधिकारी को प्रतिनियुक्ति
(ड्यूटी) भत्ता नही मिलेगा।
iv.
वृध्दि के लिए
अधिकारी के मूल विभाग और जहाँ आवश्यक हो यूं. पी. एस. से अनुमति लेनी होगी।
(4)जिन मामलो में अवधि की वृध्दि पाँचवें वर्ष से अधिक या भर्ती नियमों के
निर्धारित अवधि के पश्चात दूसरे वर्ष तक हो, तो इसके लिए कार्मिक और प्रशिक्षण
विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक है। इसके लिए प्रस्ताव इस विभाग कोबढ़ाई गई अवधि की
समाप्ति से कम – से कम तीन मास पहले पहुंचने चाहिये।
(5)जब प्रतिनियुक्ति की अवधि के बढ़ाने पर विचार किया जाये तो उसकी अवधि को उस तरह
से निश्चित की जानी चाहिये कि जिससे अधिकारी के बच्चे स्कूल – कालेज जाने वाले हो वह
शैक्षिक वर्ष के पूरा होने तक प्रतिनियुक्ति पर रह सके।
(6)
प्रतिनियुक्ति की कुल अवधि की गणना करने के लिए केन्द्रीय सरकार उसी अथवा अन्य
संस्थान / विभाग में वर्तमान नियुक्ति से तुरंत पहले बितायी गई अन्य संवर्ग बाह्य
पद पर प्रतिनियुक्ति की अवधि को भी शामिल किया जाएगा।
(आर.बी.ई. 51/2008, दिनांक 4.4.2008)
प्रतिनियुक्ति अवधि के दौरान पदोन्नतियां –
(1)
जब कर्मचारी को
स्वीकार करने वाला प्राधिकारी पहले से प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत कर्मचारी को
पदोन्नत अथवा अन्य पद पर नियुक्त करना चाहे तो उसे पदोन्नति / नियुक्ति से पूर्व
मूल प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
(2)प्रतिनियुक्ति
पर कार्यरत कर्मचारी को नेक्स्ट बिलों रूल का लाभ दिया जा सकता है बशर्ते इस
कार्यालय ज्ञापन में उल्लिखित अन्य शर्तें लागू की जाए।
प्रतिनियुक्ति के कार्यकाल की समाप्ति पर छुट्टी प्रदान
करना – प्रतिनियुक्ति पद से मूल
काडर में लौटते समय उसे स्वीकार करने वाला मंत्रालय / विभाग /संस्थान उसे अधिकतम
दो मास की छुट्टी दे सकता है। अधिक छुट्टी के लिए कर्मचारी को अपने काडर नियन्त्रण
प्राधिकारी को आवेदन देना होगा।
प्रतिनियुक्ति व्यक्ति की अपने मूल काडर में समयपूर्व वापसी
–सामान्यतः: जब एक कर्मचारी
प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त होता है तो उसक प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने पर
मूल मंत्रालय / विभाग को वापिस कर दी जाती है तदापि यदि मूल काडर मेंवापसी समय
पूर्व किये जाने की स्थिति पैदा हो जाए तो उसे मूल मंत्रालय / विभाग को उपयुक्त
नोटिस देने के पश्चात– लौटाया जा सकता है।
प्रतिनियुक्ति (ड्यूटी) भत्ते की स्वीकृति –प्रशासनिक मंत्रालय / विभाग अपने नियंत्रण में कार्यरत कार्यालयों के
कर्मचारियों को इन शर्तों व नियमों के अनुसार प्रतिनियुक्ति (ड्यूटी) भत्ते की
स्वीकृति देने में सक्षम है यह स्वीकृति स्थानांतरण करने वाले मंत्रालयों /
विभागों व्दारा अथवा स्वीकार करने वाले मन्त्रालयो /विभागों व्दारा दी जा सकती है,
जैसा भी प्रत्येक मामले में परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त हो।
·
इन नियमों व शर्तों में किसी भी ढील के लिए कार्मिक तथा
प्रशिक्षण विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक है।
· जहा तक भारतीय लेखा परीक्षा विभाग
के कर्मचारियों का संबंध है यह आदेश नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के साथ मशवरे के
बाद जारी किये जा सकते है।
(रेलवे बोर्ड पत्र सं. एफ. (ई.) 11/84 डी. ई. 1/1,दिनांक 5.12.94, आर. बी. ई.
1/10/94.
·
गैर – राजपत्रित कर्मचारियों की राइट्स / इरकान / कानकोर /
क्रिस में प्रतिनियुक्ति की अवधि में विस्तार के प्रस्ताव 3 साल या 4 साल पूरे
होने के कम – से – कम तीन माह पहले बोर्ड के पास आदाता संगठन के व्दारा संबंधित
क्षेत्रीय रेल /उत्पादन इकाई की सहमति के साथ भेज देने चाहिए।
·
यदि अनुमोदित अवधि की समाप्ति के पहले सक्षम अधिकारी की
स्वीकृति प्राप्त न हो तो उसे स्वीकृत नही मानना चाहिए और कर्मचारी को अनिवार्य रूप
से वापिस कर देना चाहिए। निर्धारित प्रोफार्मा को ठीक से भरकर क्षेत्रीय रेल
/उत्पादन इकाई की सहमति के साथ उचित समय से प्रस्ताव भेज देने की कार्यविधि अपनानी
चाहिए ताकि भविष्य में प्रतिनियुक्ति की शर्तों का अनधिकृत विस्तार न हो। (आर. बी. ई.
– 218/2000, दिनांक 18.12.2000.)
नोट - यह ध्यान रखा जाए कि –
(1)
प्रतिनियुक्ति की अवधि को 5 साल से अधिक नही बढ़ाया जाएगा
(2)
प्रत्येक प्रतिनियुक्ति अवधि के बाद संयुक्त सचिव स्तर तक रेल अधिकारियों के
लिए 3 वर्ष और अपर सचिव स्तर के पदों के लिए एक वर्ष की अनिवार्य ‘कूलिंग आफ ‘
अवधि होगी
(3)
सम्पूर्ण सेवा अवधि में ऐसी प्रतिनियुक्ति / इतर सेवा अधिकतम 7 वर्ष की अवधि
के लिए होगी।
(4) रेलवे /केंद्र सरकार के कर्मचारी राज्य सरकारों / राज्य सरकार के संगठनों
/संघ शासित सरकारों / अन्तर राष्ट्रीयसंगठनों / स्वायत्त निकायों, ट्रस्टी , सोसाइटियों,
सार्वजनिक क्षेत्रों के उन उपक्रमों में प्रतिनियुक्ति / इतर सेवा के लिए पात्र
होंगे जो केंद्र सरकार व्दारा नियंत्रित नही है बशर्ते कि उन्होंने 9 वर्ष की सेवा
पूरी कर ली हो तथा उनके विरुद्ध कोई सतर्कता मामला नही हो तथा पिछले 5 वर्षों में
संगठन व्दारा कोई कार्रवाई नही की गई हो।
(5) (a) यदि प्रतिनियुक्ति की अवधि के दौरान, नेक्स्ट
बिलों के अंतर्गत मूल संवर्ग में प्रोफार्मा पदोन्नति अथवा अपग्रेडेशन के कारण,
संबंधित अधिकारी संवर्ग बाह्य पद की तुलना में मूल संवर्ग में उच्चतर वेतनमान /पे
बैंड तथा ग्रेड पे का पात्र हो जाता है, तो उसे शेष अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पद
(प्रोफार्मा पदोन्नति / अपग्रेडेशन का लाभ उठाए बिना) पर बने रहने अथवा 6 महीने की
अवधि के भीतर अपने मूल संवर्ग में वापस आने का विकल्प होगा
(b) यदि अधिकारी प्रतिनियुक्ति पद पर बने रहना
चाहता है, तो प्रोफार्मा पदोन्नति/ अपग्रेडेशन के आधार पर कोई वेतन निर्धारण नही
होगा तथा वह अपना वर्तमान वेतन लेता रहेगा। (आर. बी. ई. –
10/2010, दिनांक 12.1.2010)
रेल सेवा (संशोधित वेतन) नियम के कार्यान्वयन के बाद
प्रतिनियुक्ति पर वेतन का निर्धारण के संबंध में स्पष्टीकरण :
(1) रेल कर्मचारी जो किसी निचले पद पर प्रतिनियुक्ति पर जाते
है, के वेतन का निर्धारण :
(i) उस मामले में
जहाँ कोई रेल कर्मचारी किसी पद जिसका ग्रेड वेतन निचला है, पर प्रतिनियुक्ति
पर जाता है, वेतन बैड में उसका वेतन
अपरिवर्तित रहेगा, लेकिन उसे प्रतिनियुक्ति की सम्पूर्ण अवधि के लिए निचले पद का
ग्रेड वेतन प्रदान किया जाएगा।
(ii) उस मामले में,
जहाँ एच ए जी + वेतनमान में कोई रेल कर्मचारी पी बी – 4 में किसी निचले पद पर
प्रतिनियुक्ति पर जाता है, प्रतिनियुक्ति पद में उसका मूल वेतन उसकी सेवा के
संवर्ग में उसके मूल वेतन के समान स्तर पर निर्धारित किया जाएगा, लेकिन वेतन बैंड
में वेतन और प्रतिनियुक्ति पद के ग्रेड वेतन का कुल जोड़ 79,000 रूपये से अधिक नही
होगा।
(iii) उस मामले में जहाँ उच्चतम वेतनमान में कोई रेल
कर्मचारी पी बी- 4 में किसी निचले पद पर प्रतिनियुक्ति पर जाता है, वेतन बैंड में
उसका वेतन पी.बी. – 4 (67000 रूपये) के अधिकतम स्तर पर निर्धारित किया जाएगा और
उसे प्रतिनियुक्ति पद के साथ संबद्ध ग्रेड वेतन प्रदान किया जाएगा, लेकिन वेतन
बैंड में वेतन और प्रतिनियुक्ति पद के ग्रेड वेतन का कुल जोड़ 79000 रूपये से अधिक
नही होगा। यदि प्रतिनियुक्ति उच्चतम वेतनमान से एच ए जी + में किसी पद पर है, तो
मूल वेतन एच ए जी ++ में सुरक्षित रखा जाएगा। बहरहाल, उक्त रेल कर्मचारी प्रतिनियुक्ति की शेष
अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पद के सम्बद्ध ग्रेड वेतन को आहरित करना जारी रखेगा।
(ख) उस मामले में
जहाँ पी. बी. – 4 में किसी पद पर
प्रतिनियुक्ति पर कोई रेल कर्मचारी एच ए. जी + में किसी पद पर अपने संवर्ग में
पदोन्नति प्राप्त करता है, उसका मूल वेतन उसकी सेवा के संवर्ग में उसके उसके
तत्काल कनिष्ठ कर्मचारी के मूल वेतन के सन्दर्भ में निर्धारित किया जाएगा, लेकिन
वेतन बैड में वेतन और प्रतिनियुक्ति पद के ग्रेड वेतन का कुल जोड़ 79, 000 रूपये से
अधिक नही होगा।
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