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Competent Authority to grant leave (IREC - 557 )

Competent Authority to Grant Leave
(IREC Vol-I Rule 557 read with Rule 503, First Schedule & Annexures)


 Rule 557 — Interpretation of Leave Rules

Where any doubt arises to the interpretation of these rules it shall be referred to the Ministry of Railways for a decision. No relaxation of these rules shall be made except with the concurrence of the Ministry of Railways.

 Reference: IREC Vol-I Rule 557

 FIRST SCHEDULE
(See Rule 503)

Authorities Competent to Grant Leave

1. Leave on average pay, half-pay leave, commuted leave, leave not due, extraordinary leave, maternity leave, hospital leave

चिकित्सा पास (Medical Pass) पर दो सहायक (Attendants) प्रदान करने का प्रावधान



 चिकित्सा पास (Medical Pass) पर दो सहायक (Attendants) प्रदान करने का प्रावधान

(Railway Servants (Pass) Rules, 1986 के अंतर्गत)


भारतीय रेल में रेलवे सेवकों तथा उनके आश्रितों को गंभीर बीमारी अथवा चिकित्सा उपचार के उद्देश्य से यात्रा की आवश्यकता पड़ने पर Medical Pass प्रदान किया जाता है। कुछ विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में रोगी की स्थिति ऐसी होती है कि उसकी देखभाल एक व्यक्ति द्वारा संभव नहीं हो पाती। इसी मानवीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड द्वारा Medical Pass पर दो सहायक (Attendants) प्रदान करने का प्रावधान नियमों में जोड़ा गया है।

यह सुविधा Railway Servants (Pass) Rules, 1986 (Second Edition, 1993) के अंतर्गत दी जाती है। विशेष रूप से यह प्रावधान Schedule VII, Item 2(B)(III) में Advance Correction Slip No. 43 के माध्यम से संशोधित किया गया। यह संशोधन रेलवे बोर्ड द्वारा वर्ष 2003 में जारी किया गया था और वर्तमान में भी लागू है।

Question With Answer -1 - Establishment ( Railway)


Q.1 What is Honorarium? 

Ans: Honorarium is a remuneration for work performed which is occasional or intermittent in character and either so laborious or of such special merit on to justify a special reward. 

Q.2 What is substantive Pay? 

Ans: Substantive pay means the pay other than special pay, personal pay or emoluments classified as pay by the President under Rule 1303

(iii) to which Railway Servant is entitled on account of post to which he has been appointed substantively or by reasons of his substantive position in a cadre.

Railways Reservation Roster - अध्याय 9 : रोस्टर से संबंधित न्यायिक निर्णय एवं उनका प्रभाव (Judicial Pronouncements on Reservation Roster and Their Impact)

 

अध्याय 9 : रोस्टर से संबंधित न्यायिक निर्णय एवं उनका प्रभाव

(Judicial Pronouncements on Reservation Roster and Their Impact)

 

9.1 न्यायिक हस्तक्षेप की पृष्ठभूमि

भारतीय रेलवे में आरक्षण रोस्टर प्रणाली के विकास में न्यायपालिका की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। जब-जब आरक्षण नीति के क्रियान्वयन में असंतुलन, भेदभाव या संवैधानिक उल्लंघन की आशंका उत्पन्न हुई, तब न्यायालयों ने हस्तक्षेप कर स्पष्ट दिशा-निर्देश प्रदान किए।

इन न्यायिक निर्णयों ने न केवल रोस्टर प्रणाली को स्पष्ट किया, बल्कि उसे संवैधानिक सीमाओं के भीतर भी रखा।

9.2 आरक्षण और संविधान की व्याख्या

न्यायालयों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि आरक्षण नीति संविधान में निहित समानता के सिद्धांत का अपवाद नहीं, बल्कि उसका पूरक है। आरक्षण का उद्देश्य समान अवसर सुनिश्चित करना है, न कि असमानता को बढ़ावा देना।

रेलवे प्रशासन को इन संवैधानिक व्याख्याओं के अनुरूप अपनी नीतियों को ढालना पड़ा है।

Railways Reservation Roster - अध्याय 8 : रोस्टर त्रुटियों का निवारण एवं सुधारात्मक उपाय (Rectification of Roster Errors and Corrective Measures)

 

अध्याय 8 : रोस्टर त्रुटियों का निवारण एवं सुधारात्मक उपाय

(Rectification of Roster Errors and Corrective Measures)

 

8.1 रोस्टर त्रुटि निवारण की आवश्यकता

भारतीय रेलवे में आरक्षण रोस्टर प्रणाली की जटिलता के कारण कभी-कभी अनजाने में त्रुटियाँ हो जाती हैं। यदि इन त्रुटियों का समय रहते निवारण न किया जाए, तो वे गंभीर प्रशासनिक और न्यायिक समस्याओं का रूप ले सकती हैं। इसलिए रोस्टर त्रुटियों की पहचान और उनका सुधार रेलवे प्रशासन की एक आवश्यक जिम्मेदारी है।

त्रुटि निवारण का उद्देश्य केवल गलती सुधारना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकना भी होता है।

8.2 रोस्टर त्रुटि की पहचान

रोस्टर त्रुटियों की पहचान सामान्यतः नियमित निरीक्षण, आंतरिक ऑडिट, सतर्कता जांच या कर्मचारी प्रतिनिधित्व के माध्यम से होती है। कई बार किसी कर्मचारी द्वारा आपत्ति दर्ज कराने पर भी रोस्टर की जांच की जाती है।

प्रारंभिक पहचान से सुधार सरल और विवाद-रहित हो जाता है।

Railways Reservation Roster - अध्याय 7 : रोस्टर से संबंधित सामान्य त्रुटियाँ एवं विवाद (Common Errors and Disputes Related to Reservation Roster)

 

अध्याय 7 : रोस्टर से संबंधित सामान्य त्रुटियाँ एवं विवाद

(Common Errors and Disputes Related to Reservation Roster)

 

7.1 रोस्टर त्रुटियों की प्रकृति

भारतीय रेलवे में आरक्षण रोस्टर प्रणाली अत्यंत तकनीकी और नियम-आधारित व्यवस्था है। इसके बावजूद व्यावहारिक स्तर पर रोस्टर संधारण में विभिन्न प्रकार की त्रुटियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। ये त्रुटियाँ प्रायः नियमों की अपूर्ण जानकारी, गलत व्याख्या या प्रशासनिक लापरवाही के कारण होती हैं।

रोस्टर से संबंधित त्रुटियाँ केवल प्रशासनिक समस्या नहीं होतीं, बल्कि वे कर्मचारियों के अधिकारों और संगठन की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।

7.2 संवर्ग की गलत पहचान

रोस्टर त्रुटियों का एक सामान्य कारण संवर्ग की गलत पहचान होता है। यदि किसी पद को गलत संवर्ग में शामिल कर दिया जाता है, तो उससे संबंधित पूरा रोस्टर प्रभावित हो जाता है।

संवर्ग निर्धारण में की गई छोटी-सी गलती भी आरक्षण अनुपात को असंतुलित कर सकती है और विवाद को जन्म दे सकती है।

Railways Reservation Roster - अध्याय 6 : रोस्टर का रख-रखाव एवं प्रशासनिक प्रक्रिया (Maintenance and Administration of Reservation Roster in Indian Railways)

 

अध्याय 6 : रोस्टर का रख-रखाव एवं प्रशासनिक प्रक्रिया

(Maintenance and Administration of Reservation Roster in Indian Railways)

 

6.1 रोस्टर रख-रखाव का महत्व

भारतीय रेलवे में आरक्षण नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि रोस्टर का रख-रखाव कितना सही, नियमित और पारदर्शी तरीके से किया जाता है। रोस्टर केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निर्णयों का आधार होता है। यदि रोस्टर सही ढंग से संधारित नहीं किया गया, तो संपूर्ण चयन या पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में आ सकती है।

इसलिए रोस्टर का नियमित अद्यतन और सही रख-रखाव प्रशासनिक उत्तरदायित्व का एक महत्वपूर्ण अंग है।

6.2 रोस्टर संधारण की जिम्मेदारी

रेलवे प्रशासन में रोस्टर संधारण की प्राथमिक जिम्मेदारी कार्मिक विभाग (Personnel Department) की होती है। संबंधित शाखा यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक संवर्ग के लिए अलग-अलग रोस्टर बनाए जाएँ और उन्हें अद्यतन रखा जाए।

उच्च स्तर पर यह दायित्व विभागाध्यक्षों और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा पर्यवेक्षण के माध्यम से निभाया जाता है।

Railways Reservation Roster - अध्याय 5 : आरक्षण श्रेणियाँ एवं आरक्षण प्रतिशत (Reservation Categories and Percentage in Indian Railways)

 

अध्याय 5 : आरक्षण श्रेणियाँ एवं आरक्षण प्रतिशत

(Reservation Categories and Percentage in Indian Railways)

 

5.1 आरक्षण नीति का मूल ढांचा

भारतीय रेलवे में आरक्षण नीति केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होती है। यह नीति यह सुनिश्चित करती है कि समाज के विभिन्न वंचित वर्गों को सरकारी सेवाओं में उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो सके। रेलवे प्रशासन इस नीति को अपनाते हुए नियुक्ति, पदोन्नति और चयन की प्रत्येक प्रक्रिया में आरक्षण का पालन करता है।

आरक्षण का यह ढांचा संविधान और समय-समय पर जारी सरकारी आदेशों के अनुरूप संचालित किया जाता है।

5.2 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण

अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाना है। भारतीय रेलवे में अनुसूचित जाति के लिए निर्धारित आरक्षण प्रतिशत को पोस्ट-आधारित रोस्टर प्रणाली के माध्यम से लागू किया जाता है।

यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक संवर्ग में स्वीकृत पदों के अनुपात में अनुसूचित जाति को प्रतिनिधित्व प्राप्त हो।

Railways Reservation Roster - अध्याय 4 : पोस्ट-आधारित रोस्टर प्रणाली (Post-Based Reservation Roster System in Indian Railways)

 

अध्याय 4 : पोस्ट-आधारित रोस्टर प्रणाली

(Post-Based Reservation Roster System in Indian Railways)

 

4.1 पोस्ट-आधारित रोस्टर का अर्थ

पोस्ट-आधारित रोस्टर प्रणाली वह व्यवस्था है जिसमें आरक्षण का निर्धारण रिक्तियों के आधार पर न होकर स्वीकृत पदों (Sanctioned Posts) के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में प्रत्येक पद को रोस्टर का एक निश्चित बिंदु प्रदान किया जाता है, जो पहले से यह निर्धारित करता है कि वह पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा।

यह प्रणाली आरक्षण नीति को अस्थायी न बनाकर स्थायी और संरचित स्वरूप प्रदान करती है


4.2 पोस्ट-आधारित रोस्टर अपनाने की आवश्यकता

वैकेंसी-आधारित रोस्टर प्रणाली से उत्पन्न असंतुलन, विवाद और न्यायिक हस्तक्षेप के कारण पोस्ट-आधारित रोस्टर को अपनाना आवश्यक हो गया। इस नई प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि आरक्षण प्रतिशत कुल पदों के अनुपात में ही सीमित रहे और किसी भी स्थिति में असंवैधानिक स्थिति उत्पन्न न हो।

भारतीय रेलवे जैसे बड़े संगठन में यह प्रणाली प्रशासनिक स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक सिद्ध हुई।

Railways Reservation Roster - अध्याय 3 : रोस्टर प्रणाली का विकास (Vacancy-Based Roster से Post-Based Roster तक)

 

अध्याय 3 : रोस्टर प्रणाली का विकास

(Vacancy-Based Roster से Post-Based Roster तक)


3.1 रोस्टर प्रणाली की पृष्ठभूमि

भारतीय रेलवे जैसे विशाल संगठन में नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया को केवल सामान्य प्रशासनिक नियमों के आधार पर संचालित करना संभव नहीं है। सामाजिक न्याय और समान अवसर को सुनिश्चित करने के लिए एक ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता होती है, जो आरक्षण नीति को निरंतर, संतुलित और पारदर्शी रूप से लागू कर सके। इसी आवश्यकता से रोस्टर प्रणाली का विकास हुआ।

रोस्टर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण के संवैधानिक प्रावधान केवल कागज़ों तक सीमित न रहें, बल्कि व्यावहारिक रूप से प्रत्येक नियुक्ति में परिलक्षित हों।


3.2 प्रारंभिक दौर की व्यवस्था: वैकेंसी-आधारित रोस्टर

आरक्षण नीति के प्रारंभिक वर्षों में भारतीय रेलवे में वैकेंसी-आधारित रोस्टर प्रणाली लागू थी। इस प्रणाली के अंतर्गत आरक्षण को केवल उस वर्ष उत्पन्न हुई रिक्तियों के आधार पर लागू किया जाता था।

Railways Reservation Roster अध्याय 2 : आरक्षण नीति – उद्देश्य और सिद्धांत (Reservation Policy – Objectives and Principles)

 

अध्याय 2 : आरक्षण नीति – उद्देश्य और सिद्धांत

(Reservation Policy – Objectives and Principles)

 

2.1 आरक्षण नीति की अवधारणा (Concept of Reservation Policy)

आरक्षण नीति भारत की प्रशासनिक एवं सामाजिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह नीति इस सिद्धांत पर आधारित है कि समाज के सभी वर्ग समान ऐतिहासिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक परिस्थितियों से नहीं आए हैं। कुछ वर्ग लंबे समय तक वंचना, भेदभाव और अवसरों की कमी का सामना करते रहे हैं।

भारतीय रेलवे जैसी विशाल सार्वजनिक संस्था में आरक्षण नीति का उद्देश्य केवल नियुक्ति देना नहीं है, बल्कि समान अवसर (Equal Opportunity) को वास्तविक रूप में लागू करना है। रेलवे में आरक्षण नीति सामाजिक संतुलन, प्रशासनिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों का व्यावहारिक स्वरूप है।

2.2 आरक्षण नीति का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत में आरक्षण की अवधारणा स्वतंत्रता से पहले भी विद्यमान थी, किंतु संविधान लागू होने के बाद इसे स्पष्ट संवैधानिक आधार मिला। संविधान निर्माताओं ने यह माना कि केवल विधिक समानता पर्याप्त नहीं है, जब तक सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर न किया जाए।

रेलवे, जो ब्रिटिश काल से ही एक बड़ा नियोक्ता रहा है, स्वतंत्र भारत में सामाजिक न्याय की नीति को लागू करने का एक प्रमुख माध्यम बना। इसी कारण रेलवे में आरक्षण नीति का विशेष महत्व है।

2.3 आरक्षण नीति के प्रमुख उद्देश्य (Objectives of Reservation Policy)

भारतीय रेलवे में आरक्षण नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

·        सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना

·        संविधान में निहित समान अवसर के सिद्धांत को व्यवहार में लागू करना

·        ऐतिहासिक अन्याय एवं असमानताओं की भरपाई करना

·        प्रशासन में विविधता (Diversity) और समावेशन (Inclusion) सुनिश्चित करना

आरक्षण नीति यह स्वीकार करती है कि सभी के लिए समान नियम तभी प्रभावी होंगे, जब प्रारंभिक असमानताओं को संतुलित किया जाए।

2.4 प्रतिनिधित्व का सिद्धांत

(Principle of Adequate Representation)

आरक्षण नीति का मूल आधार पर्याप्त प्रतिनिधित्व का सिद्धांत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक वर्ग को समान संख्या में पद दिए जाएँ, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वर्ग सरकारी सेवाओं में नगण्य या शून्य प्रतिनिधित्व का शिकार न हो।

रेलवे में यह सिद्धांत रोस्टर प्रणाली के माध्यम से लागू किया जाता है, जिससे प्रत्येक संवर्ग (Cadre) में SC, ST, OBC एवं EWS का संतुलित प्रतिनिधित्व बना रहे।

2.5 सामाजिक न्याय और प्रशासनिक दक्षता

आरक्षण नीति के क्रियान्वयन में सामाजिक न्याय और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन अत्यंत आवश्यक है। रेलवे प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि आरक्षण नीति से कार्यक्षमता प्रभावित न हो, साथ ही सामाजिक न्याय के उद्देश्य भी पूर्ण हों।

इस संतुलन को बनाए रखने के लिए:

  • न्यूनतम योग्यता मानक तय किए जाते हैं
  • चयन प्रक्रिया निष्पक्ष रखी जाती है
  • प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाता है

2.6 समान अवसर बनाम समान परिणाम

आरक्षण नीति का उद्देश्य समान परिणाम (Equal Outcome) सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि समान अवसर (Equal Opportunity) प्रदान करना है। रेलवे में सभी उम्मीदवारों के लिए चयन प्रक्रिया समान रहती है, किंतु आरक्षण नीति यह सुनिश्चित करती है कि सामाजिक पिछड़ेपन के कारण कोई वर्ग प्रतिस्पर्धा से बाहर न हो जाए।

यह सिद्धांत आरक्षण नीति को न्यायसंगत और संवैधानिक बनाता है।

2.7 रेलवे में आरक्षण नीति के व्यावहारिक सिद्धांत

भारतीय रेलवे में आरक्षण नीति निम्नलिखित व्यावहारिक सिद्धांतों पर आधारित है:

  • आरक्षण केवल निर्धारित प्रतिशत तक सीमित रहेगा
  • कुल आरक्षण 50% की सीमा से अधिक नहीं होगा
  • आरक्षण का क्रियान्वयन रोस्टर प्रणाली द्वारा किया जाएगा
  • मेरिट के आधार पर चयनित उम्मीदवार आरक्षित कोटे में नहीं गिने जाएँगे

ये सिद्धांत नीति के दुरुपयोग को रोकने में सहायक हैं।

2.8 रेलवे प्रशासन में आरक्षण नीति का अनुपालन

रेलवे में आरक्षण नीति का पालन करना केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि विधिक अनिवार्यता है। प्रत्येक भर्ती, पदोन्नति या चयन में संबंधित रोस्टर बिंदु की जाँच करना आवश्यक होता है।

इस संदर्भ में कार्मिक विभाग (Personnel Department) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि रोस्टर का सही रख-रखाव उसी के द्वारा किया जाता है।

2.9 आरक्षण नीति से संबंधित सामान्य भ्रांतियाँ

आरक्षण नीति को लेकर कुछ सामान्य भ्रांतियाँ प्रचलित हैं, जैसे:

  • आरक्षण से मेरिट समाप्त हो जाती है
  • आरक्षण से प्रशासनिक गुणवत्ता घटती है
  • आरक्षण स्थायी व्यवस्था है

वास्तविकता यह है कि यदि नीति को नियमों के अनुसार लागू किया जाए, तो यह न केवल सामाजिक संतुलन बनाती है, बल्कि संगठन को अधिक संवेदनशील और प्रतिनिधिक बनाती है।

2.10 आरक्षण नीति और न्यायिक दृष्टिकोण

न्यायालयों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि आरक्षण नीति का उद्देश्य सामाजिक संतुलन है, न कि किसी वर्ग को अनुचित लाभ देना। इसलिए रेलवे में आरक्षण नीति न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप लागू की जाती है।

इस अध्याय में भारतीय रेलवे की आरक्षण नीति की अवधारणा, उद्देश्य और सिद्धांतों का विस्तृत विवेचन किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि आरक्षण नीति सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रशासनिक दक्षता के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है।

Railways Reservation Roster - अध्याय 1 : संवैधानिक आधार (Constitutional Basis)

 अध्याय 1 : भूमिका एवं संवैधानिक आधार


1.1 भूमिका (Introduction)


भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, जहाँ लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति एवं पदोन्नति होती है। इतनी विशाल व्यवस्था में सामाजिक न्याय एवं समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण नीति को सुव्यवस्थित रूप से लागू करना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से भारतीय रेलवे में आरक्षण रोस्टर प्रणाली (Reservation Roster System) अपनाई जाती है।


आरक्षण रोस्टर केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह संविधान में निहित समानता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन के सिद्धांतों का व्यावहारिक रूप है। यह प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को उनके निर्धारित अनुपात में अवसर प्राप्त हों।

Notional Increment at Retirement — Detailed & Updated (Hindi / English)

  Notional Increment at Retirement 

भारतीय केंद्रीय कर्मचारियों के बीच एक लंबे समय से विवादित मुद्दा रहा है — यदि कोई कर्मचारी 30 जून या 31 दिसंबर को रिटायर होता है (यानी वार्षिक increment मिलने से सिर्फ एक दिन पहले), तो उसे increment का लाभ नहीं मिलता था। इससे उनकी पेंशन (Pension Fixation) कम हो जाती थी और भविष्य में मिलने वाले DA, DR और अन्य पेंशन लाभ भी प्रभावित होते थे।

लेकिन वर्ष 2024-2025 में आया नया आदेश और न्यायालय के निर्णयों के बाद, सरकार ने ऐसे रिटायर कर्मचारियों को Notional Increment देने का निर्णय लिया है — परंतु यह increment सिर्फ पेंशन गणना के उद्देश्य से माना जाएगा। यानी यह काल्पनिक वेतन वृद्धि (Notional Increase) होगी, वास्तविक भुगतान नहीं।

Leave Rules - Leave not due (Hindi/ English)

Leave not due.(IREC - 528)  

(1) Leave not due may be granted to a railway servant in permanent employment subject to the following conditions:--

(i) leave not due shall be limited to the leave on half average pay he is likely to earn thereafter;

(ii) leave not due during the entire service shall be limited to a maximum of 360 days, on medical certificate;

(iii) leave not due shall be debited against the half pay leave he is likely to earn subsequently.

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