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Railway Overtime Allowance (OTA) Rules : भारतीय रेलवे में ओवरटाइम भत्ता (OTA) के नियम

भारतीय रेलवे में ओवरटाइम भत्ता (Overtime Allowance - OTA) के नियम

भारतीय रेलवे एक 24×7 सेवा आधारित संगठन है, जहाँ अनेक विभागों में कर्मचारियों को निर्धारित ड्यूटी अवधि से अधिक समय तक कार्य करना पड़ सकता है। ट्रेन संचालन, सिग्नल एवं दूरसंचार, विद्युत, यांत्रिक, इंजीनियरिंग, सुरक्षा तथा अन्य परिचालन संबंधी कार्यों में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जब कर्मचारियों से निर्धारित कार्य घंटों के अतिरिक्त भी सेवा ली जाती है।

ऐसी स्थिति में, जहाँ लागू नियम इसकी अनुमति देते हैं, पात्र कर्मचारियों को अतिरिक्त कार्य के बदले ओवरटाइम भत्ता (Overtime Allowance – OTA) प्रदान किया जाता है। OTA का उद्देश्य केवल अतिरिक्त कार्य का आर्थिक प्रतिफल देना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि अतिरिक्त ड्यूटी वास्तविक प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर, सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से तथा निर्धारित अभिलेखों के अनुरूप कराई जाए।

Running Staff Rest Rules in Indian Railways: HQ, Outstation & Periodical Rest Guide (HOER)

भारतीय रेल में रनिंग स्टाफ (Running Staff) देश की रेल परिचालन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर (पूर्व में गार्ड) तथा अन्य रनिंग श्रेणी के कर्मचारी चौबीसों घंटे विभिन्न परिस्थितियों में ट्रेन संचालन का कार्य करते हैं। इनकी ड्यूटी सामान्य कार्यालयीन समय से भिन्न होती है और अनेक बार लगातार कई घंटे तक उच्च स्तर की एकाग्रता एवं सतर्कता बनाए रखना आवश्यक होता है।

इसी कारण रनिंग स्टाफ के लिए विश्राम (Rest) संबंधी विशेष नियम बनाए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को आराम देना नहीं, बल्कि थकान (Fatigue) को नियंत्रित करना, सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करना तथा कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं कार्यकुशलता की रक्षा करना भी है।

रेल सेवक कार्य के घंटे एवं विश्राम अवधि के नियम (HOER)

रेल सेवकों के कार्य के घंटे एवं विश्राम अवधि के नियम (HOER) : सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

भारतीय रेल विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, जहाँ लाखों रेल कर्मचारी विभिन्न श्रेणियों में चौबीसों घंटे कार्य करते हैं। रेल परिचालन की निरंतर प्रकृति के कारण सभी कर्मचारियों के लिए समान कार्य अवधि निर्धारित करना व्यावहारिक नहीं है। कुछ कर्मचारी अत्यधिक मानसिक एकाग्रता एवं सतत सावधानी वाले कार्य करते हैं, जबकि कुछ कर्मचारियों के कार्य में प्रतीक्षा अथवा कार्य के बीच अंतराल भी होता है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रेलवे कर्मचारियों के कार्य के घंटे, विश्राम अवधि, साप्ताहिक विश्राम तथा ड्यूटी के वर्गीकरण को विनियमित करने के लिए Railway Servants (Hours of Work and Period of Rest) Rules, 2005, जिन्हें सामान्यतः HOER (Hours of Work and Period of Rest Rules) कहा जाता है, लागू किए गए हैं। ये नियम रेल कर्मचारियों के कार्य एवं विश्राम के बीच संतुलन स्थापित करने, परिचालन सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अत्यधिक कार्यभार से उत्पन्न जोखिम को कम करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। ये नियम रेल कर्मचारियों की सभी श्रेणियों पर समान रूप से लागू नहीं होते, बल्कि केवल उन कर्मचारियों पर लागू होते हैं जो Railways Act, 1989 के अध्याय XIV के अंतर्गत आते हैं।

रेलवे कर्मचारियों के सभी प्रकार के Pass एवं PTO पर Break Journey Rules (FAQ): Privilege Pass, Duty Pass, PRCP, Widow Pass, Manarth Pass एवं HRMS e-Pass की संपूर्ण जानकारी

 भारतीय रेलवे कर्मचारियों को विभिन्न उद्देश्यों के लिए कई प्रकार के Pass एवं Privilege Ticket Order (PTO) प्रदान किए जाते हैं। इनमें Privilege Pass, Duty Pass, Duty Cheque Pass, School Pass, Special Pass, Post Retirement Complimentary Pass (PRCP), Widow Pass, Honorary (Manarth) Pass, Residential Card Pass तथा अन्य विशेष Pass शामिल हैं। प्रत्येक Pass का उद्देश्य अलग होता है, इसलिए उन पर लागू यात्रा नियम भी अलग-अलग हो सकते हैं।

Break Journey भी ऐसा ही एक विषय है, जिसके संबंध में कर्मचारियों के बीच सबसे अधिक भ्रम रहता है। कई लोगों का मानना है कि सभी Pass पर समान नियम लागू होते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि HRMS e-Pass लागू होने के बाद पुराने नियम समाप्त हो गए हैं। वास्तव में दोनों धारणाएँ पूरी तरह सही नहीं हैं।

रेलवे कर्मचारियों के सभी प्रकार के Pass एवं PTO पर Break Journey Rules: Privilege Pass, Duty Pass, Manarth Pass, PRCP, Widow Pass एवं e-Pass (HRMS) का प्रामाणिक मार्गदर्शन

Break Journey क्या है और रेलवे नियम इसे कैसे देखते हैं?

रेलवे नियमों में Break Journey से आशय ऐसी स्थिति से है, जब कोई Pass अथवा PTO धारक अपने प्रारंभिक स्टेशन से गंतव्य स्टेशन तक की यात्रा के दौरान किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर स्वेच्छा से उतरकर यात्रा को कुछ समय के लिए रोक देता है और बाद में उसी Pass अथवा PTO पर आगे की यात्रा पुनः प्रारम्भ करता है। अर्थात यात्रा एक ही Pass पर जारी रहती है, लेकिन उसके बीच में कर्मचारी या उसका परिवार किसी मध्यवर्ती स्थान पर अस्थायी रूप से ठहरता है।

यह समझना आवश्यक है कि प्रत्येक मध्यवर्ती ठहराव Break Journey नहीं माना जाता। उदाहरण के लिए यदि किसी यात्री को मार्ग में ट्रेन बदलनी है और अगली कनेक्टिंग ट्रेन उपलब्ध होने तक कुछ समय स्टेशन पर रुकना पड़ता है, तो ऐसी स्थिति सामान्यतः Break Journey नहीं कहलाती। रेलवे के सामान्य वाणिज्यिक सिद्धांतों के अनुसार केवल आवश्यक ट्रेन परिवर्तन (Change of Train) अथवा कनेक्टिंग ट्रेन की प्रतीक्षा में होने वाला सीमित ठहराव और स्वेच्छा से यात्रा रोककर कई घंटे या कई दिन बाद पुनः यात्रा प्रारम्भ करना, दोनों स्थितियाँ अलग-अलग मानी जाती हैं।

Break Journey का उद्देश्य कर्मचारियों को यात्रा के दौरान उचित लचीलापन (Flexibility) प्रदान करना है। उदाहरण के लिए यदि कोई कर्मचारी दिल्ली से चेन्नई जा रहा है और मार्ग में नागपुर या हैदराबाद में अपने परिजनों से मिलने अथवा किसी धार्मिक या व्यक्तिगत कार्य के लिए कुछ समय रुकना चाहता है, तो निर्धारित नियमों के अंतर्गत उसे यह सुविधा प्राप्त हो सकती है। किन्तु यह सुविधा पूर्णतः असीमित या बिना शर्त नहीं है। प्रत्येक Pass की प्रकृति, उसका उद्देश्य तथा उससे संबंधित नियम यह निर्धारित करते हैं कि Break Journey किस सीमा तक स्वीकार्य होगी।

यही कारण है कि Privilege Pass पर उपलब्ध Break Journey की सुविधा को Duty Pass या Residential Card Pass पर उसी रूप में लागू नहीं माना जा सकता। इसी प्रकार Post Retirement Complimentary Pass (PRCP), Widow Pass तथा Honorary (Manarth) Pass पर भी संबंधित Pass Rules के अनुसार ही निर्णय लिया जाता है। अतः केवल "Pass" शब्द देखकर यह मान लेना कि सभी Pass पर समान Break Journey Rules लागू होंगे, सही नहीं है।

Break Journey से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि Pass की वैधता (Validity) तथा स्वीकृत मार्ग (Approved Route) किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होते। कर्मचारी चाहे जितनी भी Break Journey ले, उसे निर्धारित मार्ग का पालन करना होगा तथा पूरी यात्रा Pass या PTO की वैधता अवधि के भीतर ही पूर्ण करनी होगी। Break Journey लेने से Pass की वैधता स्वतः नहीं बढ़ती और न ही उससे Route बदलने का अधिकार प्राप्त हो जाता है।

इसी प्रकार Break Journey का अधिकार मिलने का अर्थ यह भी नहीं है कि कर्मचारी बिना किसी औपचारिकता के किसी भी स्टेशन पर उतरकर आगे कभी भी यात्रा प्रारम्भ कर सकता है। Railway Board ने समय-समय पर जारी आदेशों में यह स्पष्ट किया है कि जहाँ आवश्यक हो वहाँ मध्यवर्ती स्टेशन पर संबंधित रेलवे अधिकारी द्वारा यात्रा का आवश्यक Endorsement कराया जाना चाहिए, ताकि आगे की यात्रा के समय Pass की निरंतरता (Continuity of Journey) पर कोई विवाद उत्पन्न न हो।

इसी आधारभूत सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए अब विभिन्न प्रकार के Pass एवं PTO पर लागू Break Journey Rules को अलग-अलग समझना आवश्यक है, क्योंकि प्रत्येक Pass की प्रकृति, उद्देश्य और उपयोग की शर्तें एक-दूसरे से भिन्न हैं।

Privilege Pass पर Break Journey के नियम

रेलवे कर्मचारियों को प्रदान किए जाने वाले सभी Pass में Privilege Pass सबसे व्यापक एवं सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला Pass है। यह कर्मचारी तथा पात्र परिवार के सदस्यों को निजी  अथवा अवकाश (Leave) के उद्देश्य से यात्रा करने की सुविधा प्रदान करता है। चूँकि इस Pass का उद्देश्य कर्मचारियों को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना नहीं, बल्कि सुविधा एवं कल्याण (Welfare Measure) उपलब्ध कराना भी है, इसलिए Break Journey के संबंध में सबसे अधिक लचीलापन इसी Pass पर दिया गया है।

Railway Servants (Pass) Rules, 1986 के अनुसार Privilege Pass धारक को सामान्यतः अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी मध्यवर्ती स्टेशन पर यात्रा के दौरान विराम (Break Journey) लेने की अनुमति है। इसका अर्थ यह है कि यदि कर्मचारी अपने गंतव्य तक सीधे न जाकर मार्ग में किसी शहर, धार्मिक स्थल, पर्यटन स्थल अथवा रिश्तेदारों के यहाँ कुछ समय रुकना चाहता है, तो वह निर्धारित नियमों के अंतर्गत ऐसा कर सकता है। यह सुविधा Outward Journey तथा Return Journey दोनों पर उपलब्ध होती है, बशर्ते Pass की वैधता तथा स्वीकृत मार्ग (Approved Route) का उल्लंघन न हो।

हालाँकि यह अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष (Absolute) नहीं है। Pass Rules का मूल सिद्धांत यह है कि Break Journey लेते समय कर्मचारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी यात्रा उसी Pass की निरंतर यात्रा (Continuous Journey) के रूप में प्रमाणित हो सके। इसी उद्देश्य से Railway Board ने समय-समय पर निर्देश जारी किए हैं कि जहाँ आवश्यक हो वहाँ मध्यवर्ती स्टेशन पर Station Master, Station Superintendent, Chief Ticket Inspector अथवा अन्य अधिकृत रेलवे अधिकारी से Pass पर आवश्यक Endorsement कराया जाए। सामान्यतः इस Endorsement में स्टेशन का नाम अथवा स्टेशन कोड, दिनांक तथा अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर अथवा मोहर अंकित की जाती है।

वास्तव में यह Endorsement केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि आगे की यात्रा के दौरान Pass की वैधता सिद्ध करने का महत्वपूर्ण प्रमाण होता है। यदि किसी कर्मचारी ने कई दिन बाद उसी Pass पर आगे यात्रा प्रारम्भ की और Break Journey का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, तो टिकट जाँच के समय अनावश्यक विवाद उत्पन्न हो सकता है। इसलिए व्यवहारिक दृष्टि से प्रत्येक नियोजित Break Journey पर संबंधित स्टेशन से Endorsement करा लेना सदैव सुरक्षित माना जाता है।

इस विषय में रेलवे बोर्ड द्वारा जारी RBE No. 10/2000, दिनांक 20 जनवरी 2000 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि Pass पर Break Journey के समय Station Code Endorsement की व्यवस्था जारी रहेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कर्मचारी ने Pass जारी कराते समय किसी विशेष Break Journey की योजना नहीं बनाई थी, लेकिन यात्रा के दौरान परिस्थितिवश किसी अन्य स्टेशन पर रुकना आवश्यक हो गया, तो संबंधित स्टेशन अधिकारी आवश्यक Endorsement कर सकता है। अर्थात रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों को अनावश्यक कठिनाई से बचाते हुए Unscheduled Break Journey की भी व्यावहारिक व्यवस्था स्वीकार की।

कई कर्मचारी यह भी पूछते हैं कि क्या Privilege Pass पर Break Journey की संख्या सीमित होती है। Railway Servants (Pass) Rules में Privilege Pass के लिए ऐसी कोई सामान्य संख्यात्मक सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि कर्मचारी मनमाने ढंग से असीमित अवधि तक विभिन्न स्टेशनों पर रुक सकता है। वास्तविक सीमा Pass की Validity Period है। यदि Pass आठ दिन, एक माह अथवा जितनी अवधि के लिए वैध है, तो Outward तथा Return Journey सहित पूरी यात्रा उसी अवधि के भीतर समाप्त करनी होगी। यदि वैधता समाप्त हो जाती है, तो Break Journey का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है और शेष यात्रा उसी Pass पर नहीं की जा सकती।

एक अन्य महत्वपूर्ण बात Route से संबंधित है। Break Journey लेने का अधिकार Route बदलने का अधिकार नहीं देता। कर्मचारी को उसी मार्ग पर यात्रा करनी होती है जिसके लिए Pass जारी किया गया है। यदि Pass सबसे छोटे मार्ग (Shortest Route) अथवा स्वीकृत वैकल्पिक मार्ग (Approved Alternative Route) से जारी किया गया है, तो Break Journey भी उसी Route पर स्थित मध्यवर्ती स्टेशनों पर ही ली जा सकती है। केवल Break Journey के उद्देश्य से Pass का Route बदलना Pass Rules के अनुरूप नहीं माना जाएगा।

कई बार यह भी भ्रम रहता है कि यदि कर्मचारी किसी स्टेशन पर केवल अगली ट्रेन पकड़ने के लिए कुछ घंटे रुकता है, तो क्या उसे भी Break Journey माना जाएगा। सामान्यतः ऐसा नहीं है। यदि ठहराव केवल ट्रेन परिवर्तन (Change of Train), कनेक्टिंग ट्रेन की प्रतीक्षा अथवा परिचालन संबंधी आवश्यकता के कारण है और कर्मचारी उसी निरंतर यात्रा का भाग बना रहता है, तो इसे सामान्य Break Journey के समान नहीं माना जाता। दूसरी ओर यदि कर्मचारी अपनी इच्छा से यात्रा रोककर बाद में आगे बढ़ता है, तो वह वास्तविक Break Journey होगी और उसके लिए आवश्यक औपचारिकताओं का पालन करना चाहिए।

HRMS के माध्यम से जारी होने वाले e-Privilege Pass पर भी मूल नियम यही लागू होते हैं। डिजिटल Pass जारी होने से केवल आवेदन और निर्गमन (Issue) की प्रक्रिया ऑनलाइन हुई है। Break Journey का मूल अधिकार, Pass की वैधता, स्वीकृत Route तथा Endorsement से संबंधित सिद्धांत Railway Servants (Pass) Rules के अनुसार ही लागू रहते हैं। इसलिए यह मान लेना कि e-Pass लागू होने के बाद Break Journey की आवश्यकता समाप्त हो गई है या Endorsement का कोई महत्व नहीं रहा, सही नहीं है।

Privilege Pass पर Break Journey की सुविधा रेलवे कर्मचारियों को दी गई सबसे महत्वपूर्ण यात्रा सुविधाओं में से एक है। किंतु इसका उपयोग सदैव Pass Rules, Pass की वैधता तथा Railway Board के निर्देशों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए। ऐसा करने से यात्रा के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक अथवा वाणिज्यिक कठिनाई उत्पन्न होने की संभावना नहीं रहती।

Privilege Ticket Order (PTO) पर Break Journey के नियम

Privilege Ticket Order (PTO) रेलवे कर्मचारियों को उपलब्ध सबसे महत्वपूर्ण यात्रा सुविधाओं में से एक है। जहाँ Privilege Pass पर कर्मचारी को निःशुल्क यात्रा का अधिकार प्राप्त होता है, वहीं PTO के माध्यम से कर्मचारी तथा पात्र आश्रितों को रेलवे द्वारा निर्धारित रियायती (Concessional) किराये पर टिकट प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। PTO स्वयं यात्रा का टिकट नहीं होता, बल्कि यह एक अधिकृत दस्तावेज (Authority) है जिसके आधार पर रेलवे आरक्षण काउंटर अथवा अधिकृत प्रणाली से रियायती टिकट जारी किया जाता है। इसलिए Break Journey के नियमों को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि PTO और उसके आधार पर जारी टिकट की कानूनी स्थिति क्या है।

कई कर्मचारियों के मन में यह भ्रम रहता है कि PTO पर Break Journey के नियम Privilege Pass से पूरी तरह अलग हैं अथवा PTO पर बीच में यात्रा रोकने की अनुमति नहीं होती। Railway Servants (Pass) Rules में ऐसा कोई सामान्य प्रावधान नहीं है जो PTO पर Break Journey को पूर्णतः प्रतिबंधित करता हो। वास्तव में PTO के आधार पर जारी यात्रा भी Pass Rules के अधीन होती है और जहाँ नियम अनुमति देते हैं, वहाँ यात्रा के दौरान Break Journey ली जा सकती है। इसलिए केवल यह कहना कि "PTO पर Break Journey नहीं होती" या "केवल Direct Train उपलब्ध न होने पर ही Break Journey ली जा सकती है" रेलवे बोर्ड के उपलब्ध नियमों से समर्थित सामान्य नियम नहीं है।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि PTO पर कर्मचारी सीधे यात्रा नहीं करता, बल्कि PTO के आधार पर जारी Railway Ticket पर यात्रा करता है। इसलिए यात्रा के दौरान कई मामलों में भारतीय रेलवे के सामान्य टिकट नियम (Commercial Rules) भी लागू होते हैं। यदि किसी विशेष प्रकार के टिकट पर Break Journey संबंधी अलग वाणिज्यिक नियम लागू हैं, तो उनका पालन भी आवश्यक होगा। अर्थात PTO पर लागू नियमों को Pass Rules और Commercial Rules—दोनों के संदर्भ में समझना चाहिए।

यदि कर्मचारी PTO के आधार पर लंबी दूरी की यात्रा कर रहा है और मार्ग में किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर व्यक्तिगत कारणों से कुछ समय रुकना चाहता है, तो ऐसी स्थिति में यात्रा की निरंतरता (Continuity of Journey) स्पष्ट रहनी चाहिए। जहाँ आवश्यक हो, संबंधित स्टेशन पर अधिकृत रेलवे अधिकारी से आवश्यक Endorsement कराया जाना चाहिए ताकि आगे की यात्रा के समय कोई विवाद उत्पन्न न हो। यद्यपि आज अधिकांश टिकट एवं आरक्षण विवरण डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध रहते हैं, फिर भी जहाँ Pass Rules या स्थानीय निर्देश आवश्यक समझें, वहाँ उचित प्रमाण (Endorsement) कराना व्यवहारिक दृष्टि से उचित माना जाता है।

PTO पर भी सबसे महत्वपूर्ण शर्त Validity की होती है। कर्मचारी को उसी अवधि के भीतर अपनी यात्रा पूरी करनी होती है जिसके लिए टिकट वैध है। Break Journey लेने से टिकट अथवा PTO की वैधता स्वतः नहीं बढ़ती। यदि टिकट की वैधता समाप्त हो जाती है, तो शेष यात्रा के लिए सामान्य नियमों के अनुसार नई व्यवस्था करनी पड़ सकती है। इसलिए Break Journey की योजना बनाते समय यात्रा की कुल अवधि तथा टिकट की वैधता का ध्यान रखना आवश्यक है।

मार्ग (Route) के संबंध में भी वही सिद्धांत लागू होता है जो अन्य Pass पर लागू होता है। PTO के आधार पर जारी टिकट जिस मार्ग के लिए जारी किया गया है, कर्मचारी को उसी मार्ग से यात्रा करनी होती है। Break Journey लेने का अर्थ Route बदलने का अधिकार नहीं है। यदि कर्मचारी स्वीकृत मार्ग छोड़कर किसी अन्य मार्ग से यात्रा करता है, तो वह Pass Rules तथा Commercial Rules दोनों की दृष्टि से आपत्ति का विषय बन सकता है।

व्यवहार में कई बार ऐसी स्थिति आती है जब कर्मचारी को किसी स्टेशन पर केवल अगली ट्रेन पकड़ने के लिए कुछ घंटे रुकना पड़ता है। ऐसी स्थिति को सामान्यतः स्वैच्छिक Break Journey नहीं माना जाता। इसके विपरीत यदि कर्मचारी किसी निजी कार्य, पारिवारिक कारण, धार्मिक यात्रा या पर्यटन के उद्देश्य से बीच में उतरकर कुछ समय बाद आगे यात्रा प्रारम्भ करता है, तो यह वास्तविक Break Journey की श्रेणी में आएगा और संबंधित नियम लागू होंगे।

HRMS के माध्यम से जारी e-PTO ने भी Break Journey के मूल नियमों में कोई परिवर्तन नहीं किया है। HRMS केवल PTO जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाता है। कर्मचारी की यात्रा, उसकी वैधता, स्वीकृत मार्ग तथा Break Journey से संबंधित अधिकार आज भी Railway Servants (Pass) Rules एवं रेलवे बोर्ड के प्रचलित निर्देशों के अनुसार ही निर्धारित होते हैं। इसलिए e-PTO को पारंपरिक PTO से अलग मानकर Break Journey के संबंध में अलग नियम लागू मानना उचित नहीं होगा।

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि PTO पर Break Journey का प्रश्न केवल "अनुमति है या नहीं" तक सीमित नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि कर्मचारी को यात्रा की वैधता, टिकट के नियम, स्वीकृत मार्ग, आवश्यक Endorsement तथा रेलवे बोर्ड के निर्देशों का संयुक्त रूप से पालन करना होता है। यही कारण है कि PTO पर Break Journey का प्रत्येक मामला उसके जारी किए गए टिकट और लागू नियमों के संदर्भ में देखा जाता है, न कि केवल एक सामान्य धारणा के आधार पर।

Duty Pass एवं Duty Cheque Pass पर Break Journey के नियम

Duty Pass का उद्देश्य Privilege Pass से पूर्णतः भिन्न होता है। जहाँ Privilege Pass कर्मचारी को निजी अथवा अवकाश यात्रा (Private Journey) की सुविधा प्रदान करता है, वहीं Duty Pass केवल सरकारी कार्य (Official Duty) के लिए जारी किया जाता है। इस कारण Break Journey के संबंध में Duty Pass पर लागू नियम भी अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं। यहाँ कर्मचारी की व्यक्तिगत सुविधा नहीं, बल्कि सरकारी कार्य को प्राथमिकता दी जाती है।

Railway Servants (Pass) Rules के अनुसार Duty Pass उस स्थिति में जारी किया जाता है जब कर्मचारी को विभागीय कार्य, निरीक्षण (Inspection), प्रशिक्षण (Training), जांच (Inquiry), न्यायालय में साक्ष्य (Court Attendance), चिकित्सा बोर्ड (Medical Board), स्थानांतरण (Transfer) अथवा अन्य स्वीकृत सरकारी कार्य के लिए यात्रा करनी होती है। इसलिए इस प्रकार की यात्रा का प्रत्येक चरण सरकारी उद्देश्य से जुड़ा होता है और कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यात्रा पूरी करे।

इसी कारण Duty Pass पर Privilege Pass जैसी स्वतंत्र Break Journey की सुविधा उपलब्ध नहीं मानी जाती। यदि कर्मचारी केवल अपनी व्यक्तिगत सुविधा के लिए मार्ग में किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर रुकता है, तो यह Duty Pass के उद्देश्य के विपरीत माना जा सकता है। सरकारी कार्य के लिए जारी Pass का उपयोग निजी पर्यटन, रिश्तेदारों से मिलने या अन्य व्यक्तिगत कारणों से यात्रा रोकने के लिए नहीं किया जा सकता।

हालाँकि इसका यह अर्थ भी नहीं है कि Duty Pass पर किसी भी परिस्थिति में बीच में रुकना पूर्णतः निषिद्ध है। यदि यात्रा की प्रकृति ही ऐसी हो जिसमें किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर रुकना सरकारी कार्य का हिस्सा हो, या परिचालन (Operational), प्रशासनिक (Administrative) अथवा विभागीय आवश्यकता के कारण कर्मचारी को मार्ग में ठहरना पड़े, तो ऐसा ठहराव सामान्य Break Journey नहीं माना जाएगा। उदाहरण के लिए किसी निरीक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत एक मंडल से दूसरे मंडल जाते समय बीच में किसी स्टेशन पर आधिकारिक निरीक्षण करना, किसी अधिकारी से मिलना, रिकॉर्ड देखना या अगले दिन निर्धारित बैठक में भाग लेना यात्रा का ही हिस्सा माना जाएगा।

इसी प्रकार यदि कर्मचारी को ट्रेन परिवर्तन (Change of Train), कनेक्टिंग ट्रेन की प्रतीक्षा, ट्रेन रद्द होने, प्राकृतिक आपदा, परिचालन व्यवधान अथवा अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण मार्ग में रुकना पड़ता है, तो यह भी व्यक्तिगत Break Journey नहीं मानी जाएगी। ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारी को उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार यात्रा जारी रखने की अनुमति होती है।

Duty Pass पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कर्मचारी को अपने Tour Programme अथवा विभागीय आदेशों (Office Orders) के अनुरूप यात्रा करनी होती है। यदि उसने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के निजी कारणों से यात्रा रोक दी और इससे सरकारी कार्य प्रभावित हुआ, तो यह केवल Pass Rules का ही नहीं बल्कि Conduct Rules तथा Tour Rules का भी प्रश्न बन सकता है। इसलिए Duty Pass पर किसी भी प्रकार की स्वैच्छिक Break Journey लेने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी की स्वीकृति अथवा स्पष्ट विभागीय आवश्यकता होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

इसी प्रकार Duty Cheque Pass भी सरकारी कार्य के लिए जारी किया जाने वाला Pass है। यह सामान्यतः उन परिस्थितियों में उपयोग किया जाता है जहाँ कर्मचारी को तत्काल Duty यात्रा करनी हो और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Pass जारी किया गया हो। इसका उद्देश्य भी पूर्णतः सरकारी कार्य है, इसलिए इस पर भी वही मूल सिद्धांत लागू होता है जो Duty Pass पर लागू होता है। अर्थात यात्रा का प्रत्येक चरण सरकारी कार्य से संबंधित होना चाहिए और निजी कारणों से बीच में रुकना नियमों की भावना के अनुरूप नहीं माना जाता।

व्यवहार में कई बार कर्मचारी यह पूछते हैं कि यदि Duty पूरी होने के बाद वे उसी स्टेशन पर एक-दो दिन निजी कारणों से रुक जाएँ, तो क्या इसे Break Journey माना जाएगा। ऐसी स्थिति संबंधित आदेशों पर निर्भर करती है। यदि Duty समाप्त होने के बाद कर्मचारी अपनी निजी यात्रा करना चाहता है, तो सामान्यतः उसे संबंधित नियमों के अनुसार अलग व्यवस्था करनी होती है। Duty Pass को निजी यात्रा में परिवर्तित करने का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होता।

HRMS के माध्यम से जारी होने वाले e-Duty Pass पर भी यही सिद्धांत लागू होते हैं। डिजिटल प्रणाली केवल Pass जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाती है; इससे Duty Pass का उद्देश्य या उसकी कानूनी प्रकृति नहीं बदलती। इसलिए e-Duty Pass होने मात्र से कर्मचारी को Privilege Pass जैसी Break Journey की स्वतंत्र सुविधा प्राप्त नहीं हो जाती।

यह भी उल्लेखनीय है कि Duty Pass पर Break Journey से संबंधित अधिकांश विवाद तब उत्पन्न होते हैं जब कर्मचारी सरकारी यात्रा और निजी यात्रा को एक साथ जोड़ने का प्रयास करता है। रेलवे बोर्ड के नियमों की मूल भावना यही है कि Duty Pass का उपयोग केवल उसी उद्देश्य तक सीमित रहे जिसके लिए उसे जारी किया गया है। इसलिए यदि किसी कर्मचारी को सरकारी कार्य के साथ-साथ निजी यात्रा भी करनी हो, तो उसे दोनों यात्राओं के लिए अलग-अलग नियमों का पालन करना चाहिए।

इस प्रकार स्पष्ट है कि Duty Pass एवं Duty Cheque Pass पर Break Journey का प्रश्न Privilege Pass की तरह व्यक्तिगत सुविधा पर आधारित नहीं, बल्कि सरकारी आवश्यकता और यात्रा के उद्देश्य पर आधारित होता है। इसलिए इन Pass पर लागू नियमों की व्याख्या सदैव उनके मूल उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही की जानी चाहिए।

School Pass, Special Pass, Post Retirement Complimentary Pass (PRCP), Widow Pass एवं Honorary (Manarth) Pass पर Break Journey के नियम

रेलवे कर्मचारियों को प्रदान किए जाने वाले सभी Pass केवल Privilege Pass या Duty Pass तक सीमित नहीं हैं। Railway Servants (Pass) Rules में कुछ ऐसे Pass भी निर्धारित किए गए हैं जो विशेष परिस्थितियों, विशिष्ट श्रेणी के कर्मचारियों अथवा उनके परिवार के सदस्यों के लिए जारी किए जाते हैं। इनमें School Pass, Special Pass, Post Retirement Complimentary Pass (PRCP), Widow Pass तथा Honorary (Manarth) Pass प्रमुख हैं। यद्यपि इन सभी Pass का उद्देश्य अलग-अलग है, फिर भी Break Journey के संबंध में इनका मूल आधार Pass की प्रकृति तथा जारी करने का उद्देश्य ही होता है।

School Pass पर Break Journey

School Pass का उद्देश्य कर्मचारी के पात्र बच्चों को उनके निवास स्थान और विद्यालय (या छात्रावास) के बीच नियमित आवागमन की सुविधा प्रदान करना है। यह Pass सामान्य अवकाश यात्रा (Leisure Travel) के लिए नहीं होता, बल्कि शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से जारी किया जाता है।

इसी कारण School Pass पर Break Journey की अवधारणा सामान्यतः वही महत्व नहीं रखती जो Privilege Pass पर होती है। छात्र को निर्धारित मार्ग पर अपने विद्यालय अथवा निवास स्थान तक यात्रा करनी होती है। यदि मार्ग में केवल ट्रेन बदलने, कनेक्टिंग ट्रेन की प्रतीक्षा या परिचालन कारणों से कुछ समय रुकना पड़े, तो यह सामान्य यात्रा का हिस्सा माना जाता है। लेकिन केवल व्यक्तिगत सुविधा के लिए किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर कई घंटे या कई दिन रुककर आगे यात्रा करना School Pass के उद्देश्य के अनुरूप नहीं माना जाता।

यदि किसी विशेष परिस्थिति में मार्ग में रुकना अपरिहार्य हो जाए, तो उसे संबंधित परिस्थितियों और रेलवे प्रशासन के निर्देशों के अनुसार देखा जाता है। इसलिए School Pass को Privilege Pass के समान स्वतंत्र Break Journey वाला Pass नहीं माना जा सकता।

Special Pass पर Break Journey

Special Pass अपने नाम के अनुरूप विशेष परिस्थितियों में जारी किया जाता है। यह किसी सामान्य वार्षिक सुविधा का भाग नहीं होता, बल्कि विशेष प्रशासनिक, मानवीय या व्यक्तिगत परिस्थितियों—जैसे गंभीर बीमारी, दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा, पारिवारिक संकट अथवा रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत अन्य विशेष कारणों—में जारी किया जा सकता है।

क्योंकि प्रत्येक Special Pass किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए जारी होता है, इसलिए Break Journey का प्रश्न भी उसी उद्देश्य के आधार पर निर्धारित होता है। यदि Pass किसी आपातकालीन चिकित्सा उपचार के लिए जारी किया गया है, तो बीच में निजी कारणों से यात्रा रोकना उसके उद्देश्य के विपरीत माना जा सकता है। वहीं यदि जारी करने वाले प्राधिकारी ने विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यात्रा में लचीलापन स्वीकार किया है, तो उसी सीमा तक Break Journey का लाभ लिया जा सकता है।

अर्थात Special Pass पर Break Journey के लिए कोई एक समान नियम लागू नहीं होता। प्रत्येक मामले में Pass जारी किए जाने की शर्तें, उद्देश्य तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा लगाए गए प्रतिबंध महत्वपूर्ण होते हैं।

Post Retirement Complimentary Pass (PRCP) पर Break Journey

सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को पात्रता के अनुसार Post Retirement Complimentary Pass (PRCP) प्रदान किया जाता है। यद्यपि कर्मचारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुका होता है, फिर भी यह सुविधा मूलतः Privilege Pass व्यवस्था का ही विस्तार मानी जाती है।

इसी कारण PRCP पर Break Journey के संबंध में सामान्य सिद्धांत वही लागू होते हैं जो Privilege Pass पर लागू होते हैं। यदि सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने गंतव्य तक जाते समय किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर कुछ समय रुकना चाहता है, तो वह Pass की वैधता, स्वीकृत मार्ग तथा लागू नियमों का पालन करते हुए ऐसा कर सकता है। जहाँ आवश्यक हो वहाँ यात्रा का उचित Endorsement कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सेवा में कार्यरत कर्मचारी के लिए होता है।

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि PRCP पर भी Break Journey लेने से Pass की वैधता नहीं बढ़ती। पूरी यात्रा निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही पूरी करनी होती है।

Widow Pass पर Break Journey

Railway Servants (Pass) Rules के अंतर्गत पात्र विधवा (Widow) को भी निर्धारित शर्तों के अधीन यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। Widow Pass का उद्देश्य भी सामाजिक सुरक्षा (Social Welfare) प्रदान करना है और इसकी प्रकृति भी कई मामलों में Privilege Pass से मिलती-जुलती है।

इसी कारण सामान्यतः Widow Pass पर भी Break Journey का सिद्धांत Privilege Pass के अनुरूप माना जाता है। यदि यात्रा के दौरान किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर उचित कारण से रुकना आवश्यक हो, तो Pass की वैधता, स्वीकृत Route तथा आवश्यक Endorsement संबंधी नियमों का पालन करना चाहिए। विधवा Pass धारक को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि Pass का उपयोग केवल निर्धारित पात्रता और शर्तों के भीतर ही किया जाए।

Honorary (Manarth) Pass पर Break Journey

Honorary Pass, जिसे सामान्य बोलचाल में Manarth Pass (मानार्थ पास) भी कहा जाता है, विशेष श्रेणी के व्यक्तियों को रेलवे प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमों के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। इस Pass का उद्देश्य सामान्य कर्मचारी Pass से भिन्न हो सकता है, इसलिए Break Journey के संबंध में भी कोई पृथक सार्वभौमिक नियम निर्धारित नहीं किया गया है।

यदि Honorary Pass की शर्तों में यात्रा की अनुमति उसी प्रकार दी गई है जैसे Privilege Pass में, तो Break Journey का लाभ भी उन्हीं सामान्य सिद्धांतों के अधीन लिया जा सकता है। लेकिन यदि Pass किसी विशिष्ट उद्देश्य या सीमित यात्रा के लिए जारी किया गया है, तो उसी उद्देश्य की सीमा का पालन करना आवश्यक होगा।

इस प्रकार Honorary Pass पर Break Journey का अधिकार Pass की श्रेणी, जारी करने की शर्तों तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित नियमों पर निर्भर करता है। इसे स्वतः Privilege Pass के समान या Duty Pass के समान नहीं माना जा सकता।

इन सभी Pass का अध्ययन करने पर एक महत्वपूर्ण सिद्धांत स्पष्ट रूप से सामने आता है—Railway Servants (Pass) Rules किसी भी Pass पर Break Journey का अधिकार उसके नाम के आधार पर नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य (Purpose of Issue), उपयोग की शर्तों (Conditions of Use) तथा संबंधित नियमों के आधार पर निर्धारित करते हैं। यही कारण है कि जहाँ Privilege Pass और PRCP पर अपेक्षाकृत अधिक लचीलापन मिलता है, वहीं Duty Pass, School Pass अथवा विशेष उद्देश्य से जारी Pass पर Break Journey उसी सीमा तक स्वीकार की जाती है, जितनी उस Pass के उद्देश्य से मेल खाती हो।

Residential Card Pass, HRMS e-Pass प्रणाली एवं Break Journey से संबंधित महत्वपूर्ण नियम

Residential Card Pass रेलवे कर्मचारियों को उपलब्ध अन्य Pass से प्रकृति और उद्देश्य दोनों दृष्टियों से भिन्न है। यह Pass लंबी दूरी की निजी अथवा अवकाश यात्रा के लिए जारी नहीं किया जाता, बल्कि उन कर्मचारियों की सुविधा के लिए होता है जिन्हें अपने कार्यस्थल और निवास स्थान के बीच नियमित रूप से यात्रा करनी पड़ती है। इसलिए Residential Card Pass का उपयोग दैनिक अथवा नियमित आवागमन (Commuting) तक ही सीमित रहता है।

यही कारण है कि Residential Card Pass पर Break Journey की सामान्य अवधारणा व्यावहारिक रूप से लागू नहीं होती। यह Pass किसी एक निरंतर लंबी यात्रा (Continuous Long Distance Journey) के लिए जारी नहीं किया जाता, बल्कि निर्धारित स्टेशनों के बीच बार-बार यात्रा करने का अधिकार देता है। अतः Privilege Pass की तरह किसी मध्यवर्ती स्टेशन पर उतरकर कई घंटे या कई दिन बाद उसी यात्रा को पुनः प्रारम्भ करने का प्रश्न सामान्यतः उत्पन्न ही नहीं होता। कर्मचारी को इस Pass का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए करना चाहिए जिसके लिए वह जारी किया गया है।

इसी प्रकार कुछ अन्य विशेष श्रेणी के Pass भी ऐसे होते हैं जिनका उपयोग किसी विशिष्ट उद्देश्य, निश्चित मार्ग अथवा सीमित अवधि के लिए किया जाता है। ऐसे Pass पर Break Journey की अनुमति का निर्णय भी उसी Pass की विशेष शर्तों के अनुसार किया जाता है। इसलिए किसी एक Pass पर लागू नियम को सभी Pass पर समान रूप से लागू मानना उचित नहीं है।

क्या HRMS e-Pass लागू होने के बाद Break Journey के नियम बदल गए हैं?

वर्ष 2026 से भारतीय रेलवे ने अधिकांश कर्मचारियों तथा पात्र पेंशनरों के लिए HRMS e-Pass एवं e-PTO Module लागू कर दिया है। अब अधिकांश Pass और PTO का आवेदन, अनुमोदन तथा निर्गमन (Issue) डिजिटल माध्यम से HRMS के जरिए किया जाता है। इससे Pass प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक हो गई है।

HRMS लागू होने के बाद अनेक कर्मचारियों के मन में यह भ्रम उत्पन्न हुआ कि अब Break Journey से संबंधित पुराने नियम समाप्त हो गए हैं या स्टेशन पर किसी प्रकार के Endorsement की आवश्यकता नहीं रही। वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है।

HRMS ने केवल Pass जारी करने की प्रक्रिया (Issue Process) को डिजिटल बनाया है। Railway Servants (Pass) Rules, यात्रा की वैधता (Validity), स्वीकृत मार्ग (Approved Route), यात्रा का उद्देश्य तथा Break Journey से संबंधित मूल सिद्धांत आज भी यथावत लागू हैं। अर्थात कर्मचारी का अधिकार Pass Rules से निर्धारित होता है, केवल उसका दस्तावेज अब इलेक्ट्रॉनिक (Electronic Pass) के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।

यदि HRMS के माध्यम से जारी e-Pass पर कर्मचारी यात्रा करता है, तो उसे भी वही नियम मानने होंगे जो पारंपरिक (Physical) Pass पर लागू होते थे। डिजिटल Pass होने से न तो यात्रा की वैधता बढ़ती है, न Route बदलने का अधिकार मिलता है और न ही Break Journey संबंधी मूल नियम स्वतः समाप्त हो जाते हैं।

HRMS प्रणाली का एक महत्वपूर्ण लाभ यह अवश्य है कि Pass का विवरण, उसकी श्रेणी, यात्रा का Route, Validity तथा अन्य जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध रहती है। इससे टिकट जाँच के समय कई प्रकार की व्यावहारिक कठिनाइयाँ कम हो जाती हैं। फिर भी जहाँ Railway Board के निर्देश अथवा स्थानीय परिस्थितियाँ आवश्यक बनाती हैं, वहाँ संबंधित अधिकारी द्वारा यात्रा का प्रमाण (Endorsement) कराया जाना अभी भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Break Journey के दौरान कर्मचारियों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

Break Journey की सुविधा कर्मचारी को यात्रा में लचीलापन अवश्य प्रदान करती है, किन्तु इसका उपयोग सदैव Pass Rules की भावना के अनुरूप किया जाना चाहिए। व्यवहार में अधिकांश समस्याएँ नियमों की कमी के कारण नहीं, बल्कि उनके गलत उपयोग या अधूरी जानकारी के कारण उत्पन्न होती हैं।

सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिस Pass पर यात्रा की जा रही है, वह वास्तव में उस प्रकार की Break Journey की अनुमति देता है। Privilege Pass, PRCP और Widow Pass जैसी श्रेणियों के नियम Duty Pass या Residential Card Pass से अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी Pass को एक ही श्रेणी में रखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष Pass की Validity है। अनेक कर्मचारी यह मान लेते हैं कि बीच में कुछ दिन रुक जाने से Pass की वैधता भी बढ़ जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है। Break Journey लेने के बावजूद पूरी यात्रा निर्धारित अवधि के भीतर ही पूरी करनी होती है।

तीसरी महत्वपूर्ण बात Approved Route की है। Break Journey का अर्थ Route बदलने की अनुमति नहीं है। यदि Pass जिस मार्ग के लिए जारी हुआ है, उसी मार्ग के मध्यवर्ती स्टेशन पर यात्रा रोकी जाती है तो वह नियमों के अनुरूप है; लेकिन केवल किसी अन्य शहर जाने के उद्देश्य से स्वीकृत मार्ग छोड़ देना Pass Rules के विपरीत हो सकता है।

चौथी बात यह है कि जहाँ आवश्यक हो वहाँ संबंधित रेलवे अधिकारी से यात्रा का उचित प्रमाण (Endorsement) अवश्य प्राप्त कर लेना चाहिए। यद्यपि आज अधिकांश जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहती है, फिर भी आवश्यक Endorsement भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचाने में सहायक होता है।

अंततः यह भी ध्यान रखना चाहिए कि Break Journey एक सुविधा (Facility) है, अधिकार का अनियंत्रित उपयोग नहीं। रेलवे बोर्ड ने यह सुविधा कर्मचारियों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदान की है। यदि इसका उपयोग Pass के उद्देश्य से हटकर किया जाता है, तो संबंधित Pass की वैधता तथा नियमों के उल्लंघन का प्रश्न उत्पन्न हो सकता है।

भारतीय रेलवे के Pass Rules का अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि Break Journey के लिए कोई एक समान नियम सभी प्रकार के Pass एवं PTO पर लागू नहीं होता। प्रत्येक Pass का उद्देश्य अलग है और उसी के अनुसार यात्रा की शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

Privilege Pass, Post Retirement Complimentary Pass (PRCP) तथा Widow Pass पर Break Journey की सुविधा अपेक्षाकृत व्यापक है और कर्मचारी Pass Rules, Route तथा Validity का पालन करते हुए यात्रा के दौरान मध्यवर्ती स्टेशन पर विराम ले सकता है। इसके विपरीत Duty Pass तथा Duty Cheque Pass का उद्देश्य सरकारी कार्य है, इसलिए उन पर Break Journey का प्रश्न व्यक्तिगत सुविधा नहीं बल्कि आधिकारिक आवश्यकता के आधार पर निर्धारित होता है। School Pass, Special Pass, Honorary (Manarth) Pass तथा अन्य विशेष श्रेणी के Pass पर भी Break Journey का निर्णय उनके जारी किए जाने के उद्देश्य एवं संबंधित नियमों के अनुसार किया जाता है।

HRMS e-Pass प्रणाली लागू होने के बाद भी Break Journey के मूल नियमों में कोई मौलिक परिवर्तन नहीं हुआ है। डिजिटल प्रणाली ने केवल आवेदन एवं निर्गमन की प्रक्रिया को आधुनिक बनाया है; जबकि यात्रा के अधिकार, Pass की वैधता, स्वीकृत Route तथा Break Journey के मूल सिद्धांत आज भी Railway Servants (Pass) Rules एवं रेलवे बोर्ड के प्रचलित आदेशों द्वारा ही नियंत्रित होते हैं।

इसीलिए किसी भी Pass या PTO पर यात्रा प्रारम्भ करने से पहले संबंधित Pass की शर्तों, उसकी वैधता तथा लागू नियमों को समझ लेना ही सबसे सुरक्षित और नियमसम्मत तरीका है। इससे न केवल यात्रा सुगम होती है, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अथवा वाणिज्यिक कठिनाई से भी बचा जा सकता है।

रेलवे कर्मचारियों के लिए Injury on Duty (IOD) नियमावली भाग–3

रेलवे कर्मचारियों के लिए Injury on Duty (IOD) नियमावली

भाग–3 : Work Related Illness & Injury Leave (WRIIL) – सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

आधिकारिक संदर्भ: Railway Board Letter No. E(P&A)I-2019/CPC/LE-2, दिनांक 23.04.2019 (RBE No. 64/2019) द्वारा Railway Services (Liberalised Leave) Rules, 1949 में संशोधन कर Work Related Illness & Injury Leave (WRIIL) का प्रावधान किया गया।


1. WRIIL क्या है?

WRIIL (Work Related Illness & Injury Leave) ऐसी विशेष अवकाश व्यवस्था है, जो उन रेलवे कर्मचारियों के लिए बनाई गई है जिन्हें सरकारी कार्य (Work Related) के कारण बीमारी (Illness) या चोट (Injury) हुई हो।

यह सामान्य Medical Leave, Earned Leave या Half Pay Leave से अलग एक विशेष श्रेणी की अवकाश है।


2. WRIIL क्यों लागू की गई?

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद रेलवे बोर्ड ने पाया कि पहले से लागू Special Disability Leave एवं Hospital Leave जैसी व्यवस्थाओं को सरल एवं एकीकृत करने की आवश्यकता है।

इसी उद्देश्य से रेलवे बोर्ड ने 23 अप्रैल 2019 से WRIIL लागू की।


3. किस नियम के अंतर्गत WRIIL जोड़ी गई?

Railway Services (Liberalised Leave) Rules, 1949 में संशोधन करते हुए Rule 552 को Work Related Illness & Injury Leave (WRIIL) के रूप में प्रतिस्थापित किया गया।

साथ ही—

  • Rule 553 – Omitted

  • Rule 554 – Omitted

  • Rule 555 – Quarantine Leave – Deleted

अर्थात पुराने Hospital Leave एवं Special Disability Leave के प्रावधान समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की गई।


4. WRIIL किन मामलों में दी जा सकती है?

रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार WRIIL उन मामलों में दी जा सकती है जहाँ सक्षम प्राधिकारी यह स्वीकार करता है कि कर्मचारी की बीमारी या चोट कार्य-संबंधित (Work Related) है।

यह Leave स्वतः नहीं मिलती।

प्रत्येक मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिया जाता है।


5. WRIIL कौन स्वीकृत करता है?

WRIIL प्रदान करने का अधिकार उसी प्राधिकारी के पास होता है जो संबंधित कर्मचारी को Leave स्वीकृत करने के लिए सक्षम है।

आमतौर पर निम्न अभिलेखों का परीक्षण किया जाता है—

  • Medical Certificate

  • Injury Report

  • Departmental Report

  • Railway Medical Officer की राय

  • उपलब्ध साक्ष्य


6. WRIIL के दौरान Leave Salary

Railway Board के संशोधित Rule 552 के अनुसार—

(क) सामान्य रेलवे कर्मचारी

  • अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि के दौरान Full Pay and Allowances

  • अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी नियमों में वर्णित सीमा तक Full Pay देय हो सकता है।

(ख) RPF/RPSF

RPF/RPSF कर्मियों के लिए Rule 552 में पृथक प्रावधान किए गए हैं।

  • अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था।

  • अधिकारियों से नीचे के कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था।

इनका विस्तृत विवरण Rule 552 में दिया गया है।


7. Leave Account पर प्रभाव

Rule 552(4) का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि—

जिस अवधि में कर्मचारी WRIIL पर रहता है, उस अवधि के दौरान उसके Leave Account में Leave on Average Pay (LAP) अथवा Leave on Half Average Pay (LHAP) का नया क्रेडिट नहीं जुड़ता।

यह प्रावधान कर्मचारियों के लिए जानना अत्यंत आवश्यक है।


8. यदि कर्मचारी को Employees' Compensation प्राप्त हो

Rule 552(3) के अनुसार—

यदि किसी कर्मचारी पर Employees' Compensation Act, 1923 लागू होता है और उसे उस अधिनियम के अंतर्गत Compensation प्राप्त होता है, तो WRIIL के अंतर्गत देय Leave Salary में नियमों के अनुसार समायोजन किया जाएगा।


9. क्या WRIIL स्वतः मिल जाती है?

नहीं।

निम्न परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं—

  • बीमारी या चोट का Work Related होना।

  • सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृति।

  • Medical Authority की पुष्टि।

  • उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण।


10. पुराने नियमों में क्या परिवर्तन हुआ?

23.04.2019 के संशोधन के बाद—

पुरानी व्यवस्थावर्तमान व्यवस्था
Hospital LeaveWRIIL
Special Disability LeaveWRIIL
Rule 553Omitted
Rule 554Omitted

यह संशोधन Leave Rules को सरल एवं एकीकृत बनाने के उद्देश्य से किया गया।


महत्वपूर्ण बिंदु

✔ WRIIL केवल कार्य-संबंधी बीमारी या चोट के मामलों में लागू होती है।

✔ यह सामान्य Medical Leave नहीं है।

✔ प्रत्येक मामला सक्षम प्राधिकारी द्वारा परीक्षण के बाद ही स्वीकृत किया जाता है।

✔ Rule 552 वर्तमान में WRIIL का मुख्य नियम है।


आधिकारिक संदर्भ

  1. Railway Board Letter No. E(P&A)I-2019/CPC/LE-2, दिनांक 23.04.2019.

  2. RBE No. 64/2019 – Railway Services (Liberalised Leave) Rules, 1949 में संशोधन।

  3. Railway Services (Liberalised Leave) Rules, 1949 – Rule 552 (Work Related Illness & Injury Leave).


रेलवे कर्मचारियों के लिए Injury on Duty (IOD) नियमावली भाग–2

रेलवे कर्मचारियों के लिए Injury on Duty (IOD) नियमावली

भाग–2 : Injury on Duty (IOD) का कानूनी आधार एवं लागू नियम

महत्वपूर्ण सूचना: इस अध्याय में केवल Injury on Duty (IOD) से संबंधित मूल कानूनी एवं प्रशासनिक आधार का अध्ययन किया गया है। आगामी अध्यायों में प्रत्येक Rule, Railway Board Letter एवं RBE का क्रमवार विश्लेषण किया जाएगा।


1. Injury on Duty (IOD) का उद्देश्य

भारतीय रेलवे में लाखों कर्मचारी विभिन्न प्रकार के जोखिमपूर्ण कार्य करते हैं, जैसे—

  • ट्रैक रखरखाव
  • लोको संचालन
  • यार्ड शंटिंग
  • सिग्नल एवं दूरसंचार कार्य
  • ओएचई (OHE) अनुरक्षण
  • दुर्घटना राहत कार्य (ART/ARME)
  • पुल एवं भवन निर्माण
  • विद्युत एवं यांत्रिक कार्य

इन कार्यों के दौरान यदि कोई कर्मचारी घायल हो जाता है, तो उसके उपचार, अवकाश तथा अन्य प्रशासनिक कार्यवाही के लिए रेलवे ने विभिन्न नियम बनाए हैं।


2. Injury on Duty के लिए एक ही नियम नहीं है

यह समझना आवश्यक है कि "Injury on Duty Rules" नाम से रेलवे में कोई एक स्वतंत्र नियमावली (Single Code) नहीं है।

IOD से संबंधित प्रावधान विभिन्न नियम पुस्तकों एवं रेलवे बोर्ड के आदेशों में दिए गए हैं।

मुख्य स्रोत हैं—

  • Indian Railway Establishment Code (IREC)
  • Railway Services (Leave) Rules
  • Railway Board Instructions
  • Injury on Duty Policy & Procedure
  • Indian Railway Medical Manual (IRMM)

इसलिए किसी भी IOD मामले का निर्णय केवल एक नियम देखकर नहीं किया जा सकता।


3. IREC का महत्व

IOD मामलों में सबसे अधिक उद्धृत नियमों में से एक है—

IREC Volume-I

Rule 615

इस नियम में ड्यूटी के दौरान घायल रेलवे कर्मचारियों के लिए विशेष नर्सिंग (Special Nursing) का प्रावधान किया गया है।

यदि अधिकृत रेलवे चिकित्साधिकारी यह प्रमाणित करता है कि विशेष नर्सिंग आवश्यक है, तो नियमानुसार उसका व्यय रेलवे द्वारा वहन किया जा सकता है।


4. Leave Rules का महत्व

IOD का अर्थ केवल चिकित्सा सुविधा नहीं है।

यदि कर्मचारी कार्य करने में असमर्थ हो जाता है, तो उसके अवकाश (Leave) का प्रश्न भी उत्पन्न होता है।

इसी उद्देश्य से रेलवे Leave Rules में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

समय-समय पर रेलवे बोर्ड ने इन नियमों में संशोधन भी किए हैं।


5. Work Related Illness & Injury Leave (WRIIL)

सातवें वेतन आयोग के बाद रेलवे बोर्ड ने Leave Rules में संशोधन करते हुए Work Related Illness & Injury Leave (WRIIL) लागू की।

यह व्यवस्था उन मामलों के लिए है जहाँ बीमारी अथवा चोट का संबंध कर्मचारी के सरकारी कार्य से हो।

Railway Board Letter

No. E(P&A)I-2019/CPC/LE-2

Date : 23.04.2019


6. IOD घोषित कौन करता है?

यह अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

किसी कर्मचारी के आवेदन मात्र से Injury on Duty घोषित नहीं किया जाता।

निर्णय संबंधित सक्षम रेलवे प्राधिकारी द्वारा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर लिया जाता है।

सामान्यतः निम्नलिखित दस्तावेज देखे जाते हैं—

  • Accident Report
  • Medical Report
  • Supervisor Report
  • Duty Record
  • Attendance
  • उपलब्ध साक्ष्य

7. Railway Medical Officer की भूमिका

Railway Medical Officer सामान्यतः निम्न बिंदुओं पर अपनी राय देता है—

  • चोट की प्रकृति
  • गंभीरता
  • उपचार की अवधि
  • कार्य करने की क्षमता
  • अस्थायी अथवा स्थायी अक्षमता
  • Fitness / Unfitness

यह रिपोर्ट आगे की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार बनती है।


8. IOD स्वीकार होने पर क्या होता है?

यदि सक्षम प्राधिकारी मामले को Injury on Duty स्वीकार करता है, तो मामले की प्रकृति एवं लागू नियमों के अनुसार कर्मचारी को निम्न लाभ प्राप्त हो सकते हैं—

  • चिकित्सा सुविधा
  • WRIIL (जहाँ लागू हो)
  • विशेष नर्सिंग (IREC Rule 615 के अनुसार)
  • मेडिकल बोर्ड
  • अन्य वैधानिक लाभ

इनमें से प्रत्येक लाभ संबंधित नियमों की पात्रता पर निर्भर करता है।


9. किन विषयों पर अभी चर्चा नहीं की जा रही?

इस अध्याय में जानबूझकर निम्न विषय शामिल नहीं किए गए हैं—

  • Home to Duty Accident
  • Duty to Home Accident
  • Notional Extension Theory
  • Court Judgments

इन विषयों पर अलग अध्याय लिखा जाएगा और केवल वहीं शामिल किया जाएगा जहाँ रेलवे बोर्ड के आधिकारिक निर्देश या लागू विधिक आधार उपलब्ध हों।


इस अध्याय के मुख्य बिंदु

✔ Injury on Duty कोई एक नियम नहीं, बल्कि विभिन्न नियमों का समुच्चय है।

✔ IREC Rule 615 चिकित्सा एवं विशेष नर्सिंग से संबंधित महत्वपूर्ण नियम है।

✔ Leave संबंधी मामलों में WRIIL लागू होती है।

✔ प्रत्येक IOD मामले का निर्णय तथ्यों एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाता है।

✔ Injury on Duty का प्रत्येक दावा अलग-अलग तथ्यों के आधार पर परीक्षण किया जाता है।


संदर्भ (References)

  1. Indian Railway Establishment Code (IREC), Volume-I – Rule 615 (Railway Employees Injured on Duty).
  2. Railway Board Letter No. E(P&A)I-2019/CPC/LE-2 dated 23.04.2019 – Work Related Illness & Injury Leave (WRIIL) संबंधी संशोधन.

रेलवे कर्मचारियों के लिए Injury on Duty (IOD) नियमावली – भाग 1

रेलवे कर्मचारियों के लिए Injury on Duty (IOD) नियमावली – भाग 1

Injury on Duty (IOD) क्या है? नियम, परिभाषा एवं कानूनी आधार


भारतीय रेलवे विश्व के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है। लाखों रेलवे कर्मचारी प्रतिदिन ट्रैक, लोको, कोचिंग, सिग्नल, विद्युत, इंजीनियरिंग, परिचालन, चिकित्सा, सुरक्षा तथा प्रशासनिक कार्यों में लगे रहते हैं। इन कार्यों की प्रकृति को देखते हुए ड्यूटी के दौरान दुर्घटना (Accident) या शारीरिक चोट (Injury) की संभावना बनी रहती है।

ऐसी परिस्थितियों में रेलवे कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न नियम बनाए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ड्यूटी के दौरान घायल कर्मचारी को उचित चिकित्सा सुविधा, अवकाश तथा अन्य वैधानिक लाभ उपलब्ध कराए जा सकें।

भारतीय रेल में APAR Grading, Benchmark, Promotion एवं Representation – Complete Guide

APAR Grading System (APAR ग्रेडिंग प्रणाली)

APAR में केवल टिप्पणी (Remarks) ही नहीं लिखी जाती, बल्कि कर्मचारी के कार्य निष्पादन का समग्र मूल्यांकन (Overall Assessment) भी किया जाता है।

विभिन्न सेवाओं एवं श्रेणियों के अनुसार मूल्यांकन का प्रारूप अलग हो सकता है, पर सामान्यतः निम्न प्रकार की ग्रेडिंग प्रणाली अपनाई जाती है—

  • Outstanding

  • Very Good

  • Good

  • Average

  • Below Average (जहाँ लागू हो)

महत्वपूर्ण: APAR की ग्रेडिंग तथा उसका उपयोग संबंधित Railway Board/DOP&T के लागू निर्देशों एवं सेवा नियमों के अनुसार किया जाता है। किसी भी पदोन्नति या चयन के लिए आवश्यक Benchmark संबंधित नियमों के अनुसार निर्धारित होता है।

भारतीय रेल में APAR प्रक्रिया: Self Appraisal, Reporting, Reviewing एवं HRMS Guide

 APAR की संपूर्ण प्रक्रिया (APAR Workflow)

भारतीय रेल में APAR एक Systematic Performance Evaluation Process है। इसका उद्देश्य केवल कर्मचारी को अंक देना नहीं, बल्कि उसके कार्य निष्पादन का वस्तुनिष्ठ (Objective) मूल्यांकन करना तथा भविष्य के विकास (Career Development) के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है।

सामान्यतः APAR निम्न चरणों में पूरा किया जाता है—

  1. Self Appraisal

  2. Reporting Authority द्वारा मूल्यांकन

  3. Reviewing Authority द्वारा समीक्षा

  4. Accepting Authority द्वारा अनुमोदन (जहाँ लागू हो)

  5. APAR का अभिलेखीकरण (Record Maintenance)

  6. आवश्यकता होने पर संचार (Communication) एवं Representation

भारतीय रेल में APAR क्या है? उद्देश्य, ACR से अंतर, HRMS एवं SPARROW प्रणाली

किसी भी बड़े संगठन की सफलता उसके कर्मचारियों की कार्यकुशलता (Performance), उत्तरदायित्व (Accountability) तथा निरंतर विकास (Continuous Development) पर निर्भर करती है। कर्मचारियों के कार्य निष्पादन का निष्पक्ष मूल्यांकन न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रगति के लिए आवश्यक है, बल्कि संगठन की दक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भारतीय रेल (Indian Railways), जो विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन संगठनों में से एक है, अपने कर्मचारियों के वार्षिक कार्य निष्पादन का मूल्यांकन Annual Performance Appraisal Report (APAR) प्रणाली के माध्यम से करती है।

APAR केवल एक वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह कर्मचारी के पूरे वर्ष के कार्य, उपलब्धियों, व्यवहार, नेतृत्व क्षमता, ईमानदारी (Integrity), तकनीकी दक्षता तथा भविष्य की संभावनाओं का समग्र मूल्यांकन है। वर्तमान में भारतीय रेल में APAR प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (HRMS एवं SPARROW) के माध्यम से अधिक पारदर्शी, समयबद्ध एवं उत्तरदायी बनाया गया है।

भारतीय रेल में Selection Register (चयन रजिस्टर): तैयारी, संधारण एवं कार्यालयी प्रक्रिया

भारतीय रेल में विभिन्न पदों पर विभागीय चयन (Departmental Selection), पदोन्नति (Promotion), सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (LDCE) तथा अन्य चयन प्रक्रियाएँ समय-समय पर आयोजित की जाती हैं। इन सभी चयन प्रक्रियाओं का व्यवस्थित एवं प्रमाणिक रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए Selection Register (चयन रजिस्टर) का संधारण किया जाता है।

Selection Register Personnel Department का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अभिलेख (Administrative Record) है। यह चयन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रखता है तथा भविष्य में संदर्भ (Reference), Audit, Vigilance एवं न्यायालयीन मामलों में महत्वपूर्ण साक्ष्य (Evidence) का कार्य करता है।

भारतीय रेल में Zonal, Divisional एवं Workshop Training Centres: संगठन, कार्य एवं महत्व

भारतीय रेल विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। इसके सुरक्षित, कुशल एवं आधुनिक संचालन के लिए कर्मचारियों का नियमित प्रशिक्षण (Training) अत्यंत आवश्यक है। नई तकनीकों, सुरक्षा मानकों, सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology), मानव संसाधन प्रबंधन (Human Resource Management) तथा बदलते कार्य वातावरण के अनुरूप कर्मचारियों का ज्ञान एवं कौशल निरंतर विकसित किया जाता है।

इसी उद्देश्य से भारतीय रेल में Railway Board के अधीन केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों (Centralised Training Institutes) के साथ-साथ प्रत्येक Zonal Railway, Divisional Railway तथा प्रमुख Workshops में प्रशिक्षण केन्द्र (Training Centres) स्थापित किए गए हैं।

भारतीय रेलवे में नियत कालिक मेडिकल परीक्षा (PME – Periodical Medical Examination) : संपूर्ण मार्गदर्शिका

भारतीय रेलवे में संरक्षा (Safety) सर्वोच्च प्राथमिकता है। विशेषकर संरक्षा श्रेणी (Safety Category) के कर्मचारियों का शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से रेलवे प्रशासन द्वारा समय-समय पर कर्मचारियों की नियत कालिक मेडिकल परीक्षा (Periodical Medical Examination – PME) कराई जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कर्मचारी अपने पद के लिए चिकित्सकीय रूप से पूर्णतः सक्षम (Medically Fit) हैं।

PME के लिए कर्मचारी को निर्धारित समय पर रेलवे चिकित्सालय में उपस्थित होकर स्वास्थ्य परीक्षण कराना तथा आवश्यक चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होता है।

भारतीय रेल में Seniority Register (वरिष्ठता रजिस्टर): तैयारी, संधारण एवं संशोधन

 भारतीय रेल में वरिष्ठता (Seniority) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। अधिकांश पदोन्नतियाँ, विभागीय चयन, स्थानांतरण, स्क्रीनिंग, प्रतिनियुक्ति तथा अन्य अनेक सेवा संबंधी मामलों में वरिष्ठता का विशेष महत्व होता है। इसलिए प्रत्येक विभाग एवं कैडर के लिए Seniority Register (वरिष्ठता रजिस्टर) का संधारण किया जाता है।

Seniority Register केवल कर्मचारियों की सूची नहीं है, बल्कि यह Personnel Department का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अभिलेख (Administrative Record) है। इसके आधार पर पदोन्नति पैनल (Promotion Panel), चयन सूची (Selection List), पात्रता (Eligibility) तथा अनेक प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं।

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