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Duty Pass क्या है? | ड्यूटी पास के Rules & Benefits


ड्यूटी पास, ड्यूटी पर यात्रा करने के लिए दिये जाते है. ये धातु पास, कार्ड पास और चेक पास के रूप में होते है।

1. धातु पास – राजपत्रित अधिकारियों को स्थायी तौर पर दिये जाते है. अधिकारी, उसका परिवार और एक परिचर (दूसरे दर्जे में) यात्रा कर सकते है अधिक – से – अधिक 4 बर्थ या चेयर आरक्षित हो सकती है।

धातु पास चार प्रकार के है :प्लेटिनम, स्वर्ण , रजत और कांस्य 

(1) प्लेटिनम पास :बोर्ड सदस्यों को सेवा अवधि में और रिटायर्ड होने पर मिलने वाली सुविधाये अन्य अधिकारियों से भिन्न होती है. उनके लिए बोर्ड ने प्लेटिनम पास जारी करने का निर्णय किया. 30.4.97 को बोर्ड के सभी वर्तमान सदस्य जिसमें अध्यक्ष और वित्त आयुक्त शामिल होंगे, इस पास पर वह ड्यूटी पर और सुविधा खाते पर यात्रा कर सकेगे, रिटायर्ड होने पर कार्ड पास पर नियमानुसार पास सुविधा मिलेगी।  पहले रिटायर्ड होने पर भी प्लेटिनम पास देने की व्यवस्था थी जिसे वापिस ले लिया गया।

रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रति नियुक्ति (Deputation) के सामान्य नियम

(1) यह आदेश 5.1.94 से लागू होंगे तथा इन नियमो में किसी प्रकार की छुट के लिए रेलवे बोर्ड  से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

(2) यह आदेश उन सभी केन्द्रीय कर्मचारियों पर लागू होंगे जिन्हेंकेन्द्रीय सरकार में पदों पर नियुक्ति होने से संबंधित भर्ती नियमो के अनुरूप बाकायदा प्रतिनियुक्तिकिया गया है।

प्रतिनियुक्ति के सामान्य नियम 

(1) शब्द ‘प्रतिनियुक्ति’ केवल उन नियुक्तियों पर लागू होता है जो अस्थाई तौर पर उसी अथवा अन्य विभागों /कार्यालयों (केन्द्रीय सरकार के) में स्थानांतरण व्दारा की गई हो, बशर्ते वह स्थानांतरण सामान्य क्षेत्र से बाहर हो और जनहित में हो।

General Rules - PME (नियत कालिक मेडिकल परीक्षा)

रेल कर्मचारी में लगातार ठीक एवं स्वस्थ बने रहे और अपना काम संरक्षा का ध्यान रखते हुए करते रहे, उन्हें समय – समय पर निश्चित अवधियो पर अपनी नौकरी के दौरान पुन: स्वास्थ परीक्षा के लिए जाना होगा और प्रमाण पत्र लाना होगा – 

(1) PME के लिए वर्ग ए – 1, ए – 2 और ए – 3 (मेडिकल श्रेणी)नियुक्ति के बाद 45 साल की उम्र तक प्रत्येक चार साल बाद और उसके बाद 55 साल आयु तक दो साल में एक बार और फिर नौकरी के अंत तक प्रत्येक साल में एक बारजाना होगा।

वर्ग ए के कर्मचारियों को संरक्षा के हित में विशेष परीक्षा के लिए नीचे दी गई परिस्थितियों में भेजा जाएगा, यदि वे रेलवे डॉक्टर के इलाज में न रहे हो – 

अनुशासनिक कार्यवाही एवं दंड संबंधी महत्वपूर्ण आदेश



1. निलंबित कर्मचारी को निलंबन के दौरान पदोन्नत नही किया जा सकता, भले ही वह चयनित सूची / पैनल पर हो (RBE 13 /93)

2.अनुशासनिक कार्यवाही के दौरान, निचले वेतनमान, श्रेणी, पद पर पदोन्नति की जा सकती है जो अधिकतम भर्ती ग्रेड तक होगी (RBE 68 / 89)

3. बड़ी शास्ति का मामला विचाराधीन होने पर पदोन्नति नही हो सकती लेकिन सिर्फ छोटी शास्ति संबंधी मामला विचाराधीन हो तो पदोन्नति हेतु विचार किया जा सकता है।(RBE 13/93) 4. ऐसा कर्मचारी जो निलंबित है या जिसके विरुध्द बड़ी या छोटी शास्ति का मामला विचाराधीन या लम्बित है तो उसे चयन में बुलाया जायेगा लेकिन योग्य पाये जाने पर उसी कर्मचारी को पैनल पर रखा जायेगा जिसके विरुध्द सिर्फ छोटी शास्ति का मामला लम्बित है, निलंबित या बड़ी शास्ति विचाराधीन कर्मचारी का नाम पैनल पर लेने / न लेने के संबंध में निर्णय निलम्बन / बड़ी शास्ति संबंधी मामले के अंतिम होने पश्चात होगा।(RBE 13/93)

पदोन्नति पर वेतन – निर्धारण के लिए विकल्प के सामान्य नियम


(1) जब कोई रेल कर्मचारी किसी ऐसे अगले उच्चतर ग्रेड में अथवा पद पर पदोन्नत किया जाए, जिसके फलस्वरूप उसका वेतन निर्धारित किया जाना अपेक्षित हो तो उसे अपना वेतन निम्नानुसार निर्धारित करवाने का विकल्प सुलभ करवाया जाएगा।

(i) या तो उसका प्रारम्भिक वेतन सीधे उच्चतर पद के वेतनमान में निर्धारित कर दिया जाए और बाद में उसके निचले पद के वेतनमान में  निर्धारित प्रारम्भिक वेतन की पुनरीक्षा नही की जाए, अथवा 

(ii) या पदोन्नति पर, आरम्भ में उसका वेतन, निचले पद के वेतनमान में उसके वेतन से ऊपर, नये उच्चतर पद के समय वेतनमान में निर्धारित किया जाए एवं उसके निचले पद के वेतनमान में उसे अगली वार्षिक वेतनवृध्दि देय होने की तारीख को पुन: निर्धारित किया जाए।

रेल कर्मचारी के विधवा को मानार्थ पास के सामान्य नियम




कर्मचारी जो 12.3.87 को या इसके बाद से नौकरी में आये थे, उनकी मृत्यु हो जाने पर विधवा /विधुर को मानार्थ पास मिलता है. नौकरी के दौरान प्रतिवर्ष 2 सेट सुविधा टिकट आदेश कम करके इस योजना में शामिल होते है.

यह सुविधा उन कर्मचारियों की विधवा/विधुर को भी मिलेगी जो 12.3.87 से पहले सेवा में थे किन्तु उन्हें सुविधा टिकट आदेशों के दो सेटों के कल्पित मूल्य के रूप में एक बार 250/- रु.का भुगतान करना होगा. यह भुगतान मंडलीय कैशियर व्दारा नगद या उस रेलवे से जहाँ विधवा पास लेना चाहती है, उसके वित्त सलाहकार एवं मु.ले.अधि के नाम डिमांड ड्राफ्ट व्दारा स्वीकार किया जा सकता है.

रिक्ति बैंक (Vacancy bank) प्रक्रिया एवं रेलवे बोर्ड के निर्देश

तुलनात्मक मूल्य के पदों को समाप्त (मैचिंग सरेंडर) करने के लिए मंडल तथा प्रधान कार्यालय स्तर पर अलग –अलग रिक्ति बैंक रखे जाने चाहिये –

1. मंडल रिक्ति बैंक – रिक्ति बैंक का  हिसाब वरिष्ठ मं. कार्मिक अधिकारी /मंडल रेल प्रबन्धक व्दारा रखा जाएगा तथा संबंधित मंडल लेखा अधिकारी /वरिष्ठ मंडल लेखा अधिकारी प्रति महीने इसका सत्यापन करेगा। इसमें उन अधिशेष (सरप्लस) पदों का 75% लागत – मूल्य जमा किया जाएगा, जिनको मंडल की पहल पर कार्य – विश्लेषण व्दारा पता लगाकर समाप्त किया गया है एवं इन पदों के 25% लागत मूल्य को प्रधान कार्यालय के रिक्ति बैंक में जमा किया जाएगा।

स्थानांतरण (Transfer) पर पास एवं किट पास के सामान्य नियम



यात्रा के लिए चेक पास दिया जाएगा जिसमें– स्वयं, परिवार और आश्रितों के लिए, सुविधा खाते की श्रेणी के अनुसार, यदि पिता आश्रित हो और साथ रहते हो तो उन्हें भी शामिल किया जा सकता है।

किट पास –

1.5.76 के बाद नियुक्त कर्मचारी –

(a) 7,600 रु. और अधिक ग्रेड वेतन पाने वाले और वे जो उच्च प्रशासनिक ग्रेड और उससे अधिक के वेतनमान में है – चार पहिये का पूरा वैगन और मोटर कार के लिए एक चार पहिया वैगन, या मालगाड़ी से 6000 किलो और मोटरकार के लिए एक चार पहिया वैगन, या एक कंटेनर (40 फीट ई यू) या दो कंटेनर (20 फीट ई यू)और मोटर कार के लिए एक चार पहिया वैगन, या एक वी पी यू – यात्री गाड़ी से बशर्ते समेकित ट्रांसफर ग्रांट में 20% कटौती यदि कार वी पी यू से ले जा रहे हो, नही तो कार न ले जाने पर 25% कटौती।

रेल कर्मचारी के सेवा – पुस्तिका (ServiceRecord) संबंधी सामान्य नियम

(1) प्रत्येक अराजपत्रित रेलवे कर्मचारी के लिए, चाहे वह पेंशनी हो या अपेंशनी, एक सेवा – पुस्तिका कार्यालय के प्रमुख के पास सुरक्षित रखी जाएगी। जब वह कर्मचारी राजपत्रित नियुक्ति पर स्थानापन्न हो तो उसकी सेवा –पुस्तिका उस कार्यालय में ही रखी जायेगी जहाँ उसकी स्थायी नियुक्ति है परन्तु जब वह राजपत्रित पद पर स्थायी हो जाए तो उसकी सेवा – पुस्तिका संबंधित लेखा कार्यालय को रिकार्ड के लिए भेज दी जायेगी। 

(2) राजपत्रित अधिकारियों की सेवा –पुस्तिकाएँ उस लेखा कार्यालय में रखी जाएगी जिसके व्दारा उनके वेतन तथा भत्तों का भुगतान किया जाता है।

(3) सेवा पुस्तिका वह रिकार्ड है,जिसमें रेलवे कर्मचारी के सेवा – काल की सभी घटनाएं दर्ज की जाती है। इसमें कर्मचारी के बारे में सभी विवरण भी दर्ज किये जाते है जैसे–

शारीरिक रूप से अपंग सेवामुक्त रेल कर्मचारीके रेलवे पास में अनुरक्षक (एस्कार्ट) शामिल करने का सामान्य नियम

सेवामुक्त, रेल कर्मचारीजो शारीरिक रूप से अपंग है, वे अपने सेवोत्तर मानार्थ पास पर उसी श्रेणी में एक अनुरक्षक (एस्कार्ट) अपने साथ ले जा सकेंगे। यह सुविधा सीनियर डी. एम. ओ. की सिफारिश पर मिलेगी, उन्हींकर्मचारी को मिलेगा जिनका कोई पारिवारिक सदस्य न हो। एक परिवार की जो सुविधा प्रथम श्रेणी पास पर मिलती है, वह इस पास पर नही मिलेगी।

शारीरिक रूप से अपंग सेवारत कर्मचारियों पर जो शर्ते लागू होती है वे सेवामुक्त रेल कर्मचारी पर भी लागू होगी। उन्हें निम्न नियमों के अनुसार पास दिये जायेगे –

(i) जिन्हें तीन सेट प्रथम श्रेणी ‘ए’ पास मिलते है, वे अपना एक सेट  त्याग दे, तो उन्हें यह विकल्प मिल सकता है कि शेष दो सेटों में इसी श्रेणी में अनुरक्षण शामिल कर ले।

पदोन्नति पर वेतन निर्धारण के सामान्य नियम

निचले पद से उच्चतर पद पर, स्थायी अथवा अस्थायी आधार पर पदोन्नति के समय नियम 1313 आर II मूल नियम - 22 (क) (i) के अधीन वेतन - निर्धारण किया जाएगा।  

1. एक पद से दूसरे ऐसे पद पर नियुक्ति के समय वेतन - निर्धारण, जब पद उच्चतर कार्यभार तथा अधिक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व से जुड़ा हो - 

जब किसी रेल कर्मचारी को जो किसी पद पर स्थायी, अस्थायी अथवा स्थानापन्न आधार  पर कार्यरत हो, किसी ऐसे पद पर स्थायी अथवा अस्थायी स्थानापन्न आधार पर नियुक्त किया जाए जिसका कार्यभार तथा उत्तरदायित्व अधिक महत्वपूर्ण हो तो पहले निम्नतर पद के उसके वेतन में एक वेतनवृध्दि जोड़ी जाएगी जिससे उसका काल्पनिक (नोटेशनल) वेतन बनेगा।  

Indian Railway जन्म तारीख का अंकन एवं परिवर्तन के सामान्य नियम



(1) रेल सेवा में आते समय प्रत्येक कर्मचारी को अपनी जन्म की तारीख घोषित करना होता है। यह जन्म की तारीख रेल सेवा में प्रवेश करने से पहले किसी सार्वजनिक रूप से घोषित की गई किसी तारीख से भिन्न नही होगी। साक्षर कर्मचारी जन्म की तारीख को सेवा अभिलेख में स्वयं अपने हस्तलेख में लिखेगा, निरक्षर कर्मचारी की जन्म को घोषित तारीख को कोई वरिष्ठ रेल कर्मचारी उसके अभिलेख में लिखेगा और कोई दूसरा रेल कर्मचारी उसका साक्षी होगा। 

(2) जो व्यक्ति अपनी आयु बताने में असमर्थ हो उसे सेवा में नियुक्त नही किया जाएगा। 

(3) जन्म की तारीख मैट्रिकुलेट परीक्षा के प्रमाणपत्र या म्युनिसिपल प्रमाणपत्र या स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र या न्यायालय के शपथ के आधार पर होगी। 

Indian Railway गुमशुदा रेल कर्मचारी के मामले में अनुकंपा नियुक्ति

मौजूदा अनुदेशों का अधिक्रमण करते हुए बोर्ड ने नीचे लिखे निर्णय किये है –

(i) अनुकंपा नियुक्ति का लाभ प्रदान करने के अनुरोध पर रेल कर्मचारी के गुम होने की तारीख से कम – से कम दो वर्ष बीत जाने के बाद विचार किया जा सकता है, बशर्ते कि गुमशुदा होने के संबंध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गयी हो तथा उस गुमशुदा व्यक्ति की तलाश नही की जा सकती हो तथा सक्षम प्राधिकारी को यह लगे कि यह मामला वास्तविक है।

(ii) यह लाभ निम्न रेल कर्मचारी पर लागू नही होगा 

(क) जिसे लापता होने की तारीख से दो वर्ष के भीतर सेवानिवृत्ति होना हो अथवा –

(ख) जिसके संबंध में यह संदेह हो कि उसने कपट किया है, अथवा उसके किसी आतंकवादी संगठन में शामिल हो जाने अथवा विदेश चले जाने का संदेह हो। 

अन्तर रेलवे/ डिवीजन स्थानान्तरण (Inter Railway / DivisionTransfer) के लिए रेलवे बोर्ड के महत्वपूर्ण आदेश

विशेष -ग्रुप सी और डी के रेल कर्मचारियों की विशेष कठिनाइयो में एक रेलवे से दूसरी रेलवे में उनके स्वयं के अनुरोध पर रेल प्रशासनों व्दारा अनुकूल रूप से विचार किया जाये, ऐसे कर्मचारियों को जो एक रेलवे से दूसरी रेलवे में उनके अनुरोध पर स्थानांतरित किये गये हो, उन्हें नई स्थापना में संबंधित ग्रेड के पदोन्नति समूह में सभी वर्तमान, स्थायी, स्थानापन्न और अस्थायी कर्मचारियों के नीचे रखा जाएगा।(बोर्ड का पात्र सं. ई. 55 / एस. आर. 6/6/3, दिनांक 19.5.55)

(1) स्थानांतरण के निवेदन देने की अनुमति केवल सीधी भर्ती वाले ग्रेडों या उन मध्यवर्ती ग्रेडों के लिए है, जिनमें सीधी भर्ती की जा सकती है।  

(इस्टेब्लिशमेंट मैनुअल का पैरा 312 और बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी.) 1-71 //टी.आर./1,दिनांक 31.3.71.)

नोट -स्थानांतरण के मामले में केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण, चंडीगढ़ व्दारा आनन्द प्रकाश तथा अन्य व्दारा दायर ओ.ए.स. 413 /एचआर /98 पर दिनांक 22.9.98 के निर्णय और इस निर्णय के विरुद उच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा तथा उच्चतम न्यायालय में प्रशासन व्दारा दी गई याचिकाओं के ख़ारिज हो जाने के परिणाम स्वरूप यह आदेश जारी किया गया है कि सीधी भर्ती के ग्रेडो में निम्नतम वरिष्ठता स्वीकार करने की शर्तें पर अनुरोध किये जाने पर यह अवश्य जाँच कर ली जाए कि कर्मचारी के पास सीधी भर्ती के लिए निर्धारित शैक्षिक अर्हता होने पर ही स्थानांतरण की अनुमति दी जाएगी । (आर.बी.ई.24/2000, दिनांक 8.2,2000) 

(2) पारस्परिक अदला - बदली के आधार पर स्थानानतरण किसी ग्रेड में हो सकता है इस  तरह की अदला - बदली के लिए किसी कर्मचारी को उपयुक्त राजी व्यक्ति मिल सके इसके लिए प्रशासन को मुख्यालय में एक सेल की स्थापना करनी चाहिये, जहाँ उसी रेलवे में एक प्रवरता इकाई से दूसरी में और किसी दूसरी रेल में स्थानांतरण के लिए आवेदनों का रजिस्टर रखा जाये। 

आवेदन प्राप्त होने पर रेलवे प्रशासन दूसरी रेल को लिखेगा ताकि यह आवेदन रेल गजट में प्रकाशित हो और इच्छुक कर्मचारी उसके बारे में जान सके। यह आवेदन प्रार्थियो की वरीयता के आधार पर रजिस्टर में नोट किये जायेगे और प्रत्येक वर्ष में एक बार उन पर जरूरी कार्यवाही की जायेगी। यह सेल में निबटारा होता रहे और उनके कारण कर्मचारियों को उनकी वरीयता की हानि कम हो सके 

(बोर्ड का पत्र सं. वही दिनांक 31.3.71)

(2) पारस्परिक अदला -बदली के आधार पर अंतर रेलवे और अंतरा रेलवे स्थानांतरण के आदेश दोनों पार्टियों की सहमति से किए जाते है। इनके आवेदन पत्रों को अग्रेषित करते समय यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि किन्ही भी परिस्थितियों में इस व्यवस्था में परिवर्तन के किसी अनुरोध को स्वीकार नही किया जाएगा और कर्मचारी को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। बोर्ड ने इसका कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिये है 

(आर.बी.ई. 21 /2006, दिनांक 21.4.2006 , 200 /2009 दिनांक 12.11.2009 )

(3) स्थानांतरण के आवेदन कर्मचारी की अपनी रेल के अलावा दूसरी रेल पर भी रजिस्टर में नोट किये जाने चाहिये।  उपयुक्त रजिस्टर मंडल, कारखाना और मुख्यालय सभी इकाईयो में रखने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. /रेप /1 - 83 ऐ ई 1 /मिस. /स्टाफ ग्री. दिनांक 25.5.83.) 

(4) स्थानांतरण के आवेदनों पर सुसंगठित ढंग से कार्यवाही करनी चाहिये इस बारे में किसी कर्मचारी के मन में शिकायत का अवसर न आये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई (एन.जी.) 1 -8 /टी. आर. /26, दिनांक 8.6.83.)

(5) जिस जगह कर्मचारी स्थानांतरण चाहता है, वहाँ संवर्ग मं. कोई रिक्ति हो तो तुरंत आवेदन स्वीकार करने में कोई कठिनाई नही होनी चाहिये और तुरंत संबंधित अधिकारियो को सूचित कर देना चाहिये। (बोर्ड का पत्र सं. वही दिनांक 6.6.83 )

5(क) निम्नतम वरिष्ठता पर अंतर क्षेत्रीय स्थानांतरण के अनुरोध:-निम्नतम वरिष्ठता पर स्थानांतरण के लिए रेल सेवको व्दारा अनुरोध कठिन परिस्थितियों के विशेष मामलो के आधार पर किए जाते है, इसलिए रिक्तियों की मौजूदगी की आधार पर अस्वीकार न किया जाए।  यदि रिक्तियों की मौजूदगी की आधार पर अस्वीकार न किया जाए तो सीधी भर्ती अथवा पदोन्नति, जैसा भी मामला हो, के व्दारा रिक्तियों को भरने के लिए एक समयबध्द कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिये । 

(सं. ई (एन. जी.) 1-2005/(टी.आर.)22, दिनांक 6.10.2005 (आर.बी.ई. 170 /2005)

(6) जब रेल भर्ती बोर्डो को इंडेंट भेजे जाये तो जितने कर्मचारियों ने विभिन्न संवर्गो में आने या उससे बाहर जाने के लिए आवेदन किया हो उनकी संख्या को ध्यान में रखते हुए निर्णय करना चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन.जी.) 11 -70 /आर.आर.1/31, दिनांक 11.1.71 और उपर्युक्त वही दिनांक 25.5.83 तथा 6.6.83) 

(7) नई इकाई/संवर्ग में वरीयता सबके नीचे निर्धारित होने के बावजूद यदि नई इकाई में पदोन्नति की शर्त के रूप में न्यूनतम सेवा अवधि निर्धारित हो तो पात्रता निश्चय करने के लिए पुरानी इकाई में की गई सेवा की गणना की जा सकती है, बशर्ते वह नई इकाई में उसके आसन्न वरिष्ठ की सेवा अवधि से अधिक न हो यह लाभ तभी मिलेगा जब दोनों इकाईयो में वह समान कोटि के पद पर काम करे । 

(आर. बी. ई. 34/2006, दिनांक 21.3.2006)

(8) उसी वरीयता इकाई में स्थानान्तरण के आवेदन:

(क) उसी वरीयता इकाई में अपनी पसंद के स्टेशन के लिए स्थानांतरण के लिए भी आवेदनों के रजिस्टर रखने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी. ) 1- 91 /टी. आर /14, दिनांक 1.10.71) यही (ख) और (ग) के लिए भी 

(ख) यदि कुछ स्टेशन पोस्टिंग के लिए लोकप्रिय न हो तो यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनमे सभी अधिकृत पद भरे रहे, कोई निश्चित अवधि तय की जा सकती है जिसमे वहाँ काम करने के बाद ही अधिक लोकप्रिय स्थान पर स्थानांतरण किया जाये ।

(9) स्कूल सेशन के मध्य में स्थानांतरण केवल प्रशासन के हित में कम - से - कम होने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. वही दिनांक 1.17.71.)

(10) दिक्कतों के आधार पर स्थानांतरण के आवेदनों पर सहानुभूति पूर्ण विचार करना चाहिये । 

(नियम 226 आर. पर दिया निर्णय )

(11) विकलांग कर्मचारियों के अपने मूल निवास - स्थान या उसके समीप स्थानांतरण के आवेदनों को प्राथमिकता देनी चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई (एन जी.) 1-91/टी. आर /13, दिनांक 11.2,92) 

(12) यदि कोई माता - पिता, जिसका बच्चा मानसिक रूप से अपंग हो, अपनी पसंद की जगह पर स्थानांतरण के लिए आवेदन करे तो जहाँ तक संभव हो उस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिये।  

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन.जी.) 1-91 / टी. आर./15, दिनांक 13.5.91)

13. स्थानांतरण के आवेदन के जो रजिस्टर नियमानुसार रखे जाते है उन्हें समय - समय पर पूरा करते रहना चाहिये, जैसे वर्ष में एक बार या छमाही। जो लोग स्थानांतरण के इच्छुक न हो उनके नाम उसमें से काट देने चाहिये । 

(बोर्ड का पत्र सं. ई. (एन. जी.) 1-61/ टी. आर. /28 दिनांक 6.12.96, आर. बी. ई. 122 /96 - मास्टर सर्कुलर सं. 24 के संदर्भ में) 

अनुकम्पा भर्ती पर विचार करने के लिए सामान्य नियम

अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां उन रेलवे कर्मचारियों के आश्रित को दी जाती है जिनकी मृत्यु, ड्यूटी के दौरान अथवा सेवा – काल में हो जाती है या सेवाकाल में अपंग, विकलांग, अक्षम अथवा अपने पद से अवर्गित हो जाए अथवा ह्रदय रोग, कैंसर या ऐसी बीमारियों के कारण अपने पद पर बने रहने के योग्य न रहे और उन्हें उचित परिलब्धियो पर कोई वैकल्पिक नौकरी न दी जा सके। 

अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति निम्नलिखित स्थितियों में कमर्चारी के आश्रित को दी जाती है –

i ड्यूटी करते हुए जिन कर्मचारियों की म्रत्यु हो जाए या जो स्थाई तौर पर अपंग हो जाए,

ii रेल दुर्घटना के कारण ड्यूटी पर न होते हुए रेलवे कर्मचारी की असामयिक मृत्यु हो जाए,

अनुशासन एवं अपील नियम के अंतर्गत जाँच रिपोर्ट पर कार्यवाही के समान्य नियम (नियम - 10 )

 1. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी ने स्वयं जाँच की हो अथवा यदि उसने स्वयं जाँच न करके जाँच अधिकारी से कराई हो, प्रत्येक परिस्थिति में जांच की रिपोर्ट के सभी या किसी पहलू पर निर्णय लेते हुए यह निश्चय करेगे कि उनके विचार से दी जाने वाली शास्ति उनके अधिकारी क्षेत्र में है या नही। 

(अ) यदि दी जाने वाली शास्ति उनके अधिकारी क्षेत्र में है तो वे अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यो के आधार पर अगली कार्यवाही कर सकते है अथवा यदि उनके विचार में न्याय के हित में किसी गवाह का और आगे परीक्षण किया जाना आवश्यक हो तो वे उस गवाह को बुलाकर उसका परीक्षण, प्रतिपरीक्षण एवं पुन: परीक्षण कर सकते है और ऐसी सजा दे सकता है जो उनके अधिकारी क्षेत्र में हो।  

(ब) यदि अनुशासनिक प्राधिकारी के विचार से दी जाने वाली उपयुक्त सजा उनके अधिकारी क्षेत्र से बाहर है तो वे जाँच कार्यवाही के तब तक के समूचे कागजातों को सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी के पास भेजेगे जिसपर सक्षम अनुशासनिक प्राधिकारी निर्णय लेंगे । 

2. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी स्वयं जाँच अधिकारी नही है एवं जांच रिपोर्ट से सहमत नहीं है तो, वे चाहे तो कारणों का उल्लेख करके, जाँच अधिकारी के पास मामले पर पुन: और आगे विचार करने हेतु भेज सकते है, जिस पर जाँच अधिकारी नियम - 9 के अनुसार "जहाँ तक संभव हो सके वहाँ तक" पुन: आगे जाँच कर सकते है ।

3. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी आरोप के किसी शीर्षक (आर्टिकल) पर जाँच अधिकारी के किसी निष्कर्ष से असहमत हो तो असहमति के कारणों का उल्लेख करते हुए आरोप के उस शीर्षक पर अपना निर्णय लिखेगे, बशर्ते ऐसा करने के लिए अभिलेख पर पर्याप्त साक्ष उपलब्ध हो। 

4. यदि अनुशानिक प्राधिकारी आरोप के सभी या किसी शीर्षक पर जाँच अधिकारी व्दारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर यह विचार करते है कि नियम - 6 के क्लाज (i) से (iv) के अंतर्गत आने वाली कोई लघु शास्ति दी जानी चाहिए, तो वे नियम - 11 के प्रावधानों पर बिना ध्यान दिये हुए ऐसी सजा का आदेश पारित कर सकते है।  

नोट - प्रावधान यह है कि ऐसे हर एक मामले, जिनमे संघ लोक सेवा आयोग की परामर्श लेनी आवश्यक हो, को जाँच प्रक्रिया के सभी कागजातों के साथ आयोग के पास उसकी परामर्श लेनी आवश्यक हो, को जाँच प्रक्रिया के सभी कागजातों के साथ आयोग के पास उसकी परामर्श के लिए भेजेगे और कर्मचारी को कोई दण्ड देने से पूर्व उसकी परामर्श पर अवश्य विचार करेगे । 

5. यदि अनुशासनिक प्राधिकारी आरोप के प्रत्येक या किसी एक शीर्षक पर दिये गये जाँच निष्कर्ष और जाँच के दौरान प्रस्तुत किये गये साक्ष्यों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचता हो कि नियम - 6 के क्लाज (v) से (ix) के अंतर्गत आने वाला कोई दण्ड दिया जाना चाहिए तो वे ऐसा कर सकते है, जिसके आरोपित रेल सेवक को प्रस्तावित शास्ति के संबंध में सूचना देना अथवा प्रतिवेदन करने का अवसर प्रदान करना आवश्यक नही होगा. 

i. बर्खास्तगी / पदच्युति के दण्ड के मामले में अनुशासनिक अधिकारी को रेल सेवा (पेंशन) नियम 1993 के नियम 65 के अंतर्गत अनुकम्पा भत्ता या ग्रेचुटी या दोनों के संबंध में भी निर्देश पारित करने चाहिये। (RBE 79 / 05, 164/08)

ii. निचले वेतनमान में दिए गए दण्ड के प्रभावी होने से पूर्व उच्च वेतनमान में पदोन्नति होने पर दण्ड पदोन्नति वाले पद पर उतनी ही अवधि के लिए लागू रहेगा जितना की नीचे वेतनमान में दिया गया था ।(RBE 200/01)

iii. बड़ी शास्ति की अनुशासनिक कार्यवाही को पूरा करने के लिए 150 दिन की मोडल समय अनुसूची निर्धारित की गई है 

(Rly.Bd's letter 52E/0126/v/III(E D&AR) dt.07.06.95 & NR PS 11012)

iv. संरक्षा संबंधि अनुशासनिक मामलो में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया RRE 36/03में दी गई है।


Also See


वरीयता (Seniority) एवं वरीयता (Seniority) निर्धारण के समान्य नियम

 1. प्रारंभिक ग्रेड में वरीयता का निर्धारण 

2. सीधी भर्ती के मामले में वरीयता का निर्धारण , जब 

अ) पदस्थापित करने से पूर्व प्रशिक्षण अनिवार्य हो 

ब) पदस्थापित करने से पूर्व प्रशिक्षण अनिवार्य न हो 

3) स्थानान्तरण के मामलो में वरीयता का निर्धारण 

अ) निवेदन पर स्थानांतरण के मामलो में 

ब) पारस्परिक स्थानांतरण के मामलो 

क) प्रशासन के हित में स्थानांतरण के मामलो में 

4) पदोन्नति के मामलो में 

अ) चयन पदों पर वरीयता का निर्धारण 

Different Type of Pay and Grant

Overseas pay (IREC - 1304) (F.R. 9) (20) 

means pay granted to a railway servant in consideration of the fact that he is serving in a country other than the country of his domicile.


 Substance grant (IREC -1308) (F.R. 9 (27)) 

means a monthly grant made to a railway servant who is not in receipt of pay or leave salary.

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