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पास के सामान्य नियम (General Rule of Pass)

पास नियम


पास के समान्य नियम -  रेल कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को सुविधा के कारणों से, ड्यूटी के उद्देश्य से, अन्य विशेष अवसरों पर रेलों से यात्रा करने केलिए निःशुल्क अथवा रियायती दर सुविधा देने का प्रावधान है जो अनुशागी लाभ के रूप में प्रदान की जाती है। इन्हें रेल सेवा पास नियम के नाम से जाना जाता है। 

इसके तहत निम्नलिखित सामान्य प्रावधान है -   

1. सामान्यतः सभी रेल कर्मचारियों को सुविधा पास सीधे रास्ते से ही प्रदान किए जाते हैं।

2. किसी अन्य रास्ते द्वारा यात्रा के लिए दुरी का अन्तर 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

3. लम्बी दूरी एवं तेज रफ्तार से चलने वाली रेलगाड़ियों द्वारा यात्रा करने केलिए 15 प्रतिशत का अन्तर होना आवश्यक नहीं समझा गया है।

4. रेल कर्मचारी यात्रा के दौरान स्वेच्छानुसार यात्रा विराम किसी भी सीमा तक माँग सकता है। इसके अलावा असामान्य परिस्थितियों के कारण पास धारक द्वारा अनिश्चित यात्रा विराम की इच्छा जताने पर स्टेशन मास्टर, टिकट संग्राहक भी पास पर पृष्ठांकन करके यात्रा विराम की अनुमति देने के लिए प्राधिकृत है।

5. सुविधा पासों को देने के मामले में यदि आश्रित को उस पास में सम्मिलित किया जाता है तो पाँच से अधिक परिवार के सदस्य नहीं हो सकते। लेकिन यदि आश्रित शामिल न हो तो परिवार के सदस्यों की संख्या पाँच से अधिक भी हो सकती है। अधिकतम दो आश्रितों को पास में सम्मिलित किया जा सकता है।

6. पासों का किसी भी प्रकार का हस्तान्तरण करना वर्जित है, इसके लिए अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है।

7. एम.ए.सी.पी. योजना के तहत कर्मचारी को वित्तीय पदोन्नति (ग्रेड) का लाभ प्रदान किया जाता है किन्तु उसे उच्च पद की प्रस्थिति प्रदान नहीं की जाती है। उदाहरणार्थ ग्रुप ‘डी’ को ग्रुप ‘सी’ नहीं मिलता है और ग्रुप ‘सी’ को ग्रुप ‘बी’ नहीं मिलता है। अतः पास के मामलों में वित्तीय सीमा के तहत द्वितीय से प्रथम श्रेणी पास तो अनुमेय हो सकता है किंतु अन्य लाभ जैसे पास की संख्या इत्यादि में इजाफा नहीं किया जाता है।

8. पास-पी.टी.ओ. अब मार्ग के कालम में भारतीय रेल और कोंकण रेलवे पर उपलब्ध शब्द लिखा जाता है। प्रत्येक रेलवे का नाम लिखना आवश्यक नहीं है।

9. प्रथम श्रेणी पास धारी द्वारा परिचर का आरक्षण कराने पर आरक्षण प्रभार देना होता है।

10. कर्मचारी कलैण्डर वर्ष के सभी उपभोग कर चुका हो तो आरक्षण केउद्देश्य से उसे आवश्यकता पर 60 दिन पहले एक सैट पास/पी.टी.ओ. अगले वर्ष के खाते से दिये जाने का नियम है किंतु उस पर यात्रा एक जनवरी या उसके उपरांत ही की जा सकती है। यह सुविधा सेवा निवृत कर्मचारियों को भी प्रदान की गई है।

11. चालू कलैण्डर वर्ष के पास/पी.टी.ओ. आगामी वर्ष में 30 मई तक क्रमशः जारी किये जा सकते है। जिनमें उपलब्धता तिथि 30 मई ही हो सकती है।

12. पुत्र अथवा अन्य आश्रितों के लिए जो इक्कीस साल से ऊपर के है, उन्हें शैक्षणिक सत्र के शुरू में ही स्कूल का प्रमाण पत्र वर्ष में एक बार जमा करवाना चाहिए। फिर भी यदि अध्ययन में व्यवधान आता है, तो उसके लिए तुरन्त पास जारीकर्त्ता प्राधिकारी को सूचित करना चाहिए। प्रशासन चाहे तो लगातार अध्ययन के मामले में यदि कोई संदेह हो तो सबंधित प्रमाण पत्र की मांग कर सकती है।

नोट - जहां पर पुत्र या अन्य आश्रित 21 वर्ष का होने वाला है तथा जो छात्र नहीं है, वहां पास निम्न अवधि हेतु ही जारी किया जायेगा -

(1) रेल कर्मचारी को उस अवधि का ही पास जारी किया जाए जिस अवधि में पुत्र या अन्य आश्रित 21 वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे हो या
(2) रेल कर्मचारी को चार माह की पूर्ण अवधि हेतु पास बिना पुत्र को सम्मिलित करते हुए जारी किया जाये।

13. जब रेल सेवक स्वयं या उसके परिवार का सदस्य या आश्रित दोनों आंखो से अन्धा हो तथा सुविधा पास पर अकेला यात्रा कर रहा हो तो उसके साथ एक सहचर को उसी श्रेणी में जिसमें अन्धा व्यक्ति यात्रा कर रहा हो उसके साथ यात्रा करने की अनुमति होगी। यह सुविधा संबंधित रेलवे के मण्डल चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर देय होगी। यदि रेल कर्मचारी टी.ए. ड्यूटी अथवा अन्य स्थान पर अस्थायी स्थानान्तरण या किसी अन्य कारण से पास/पीटीओं के आवेदन करने के लिए उपलब्ध नहीं हो तो पारिवारिक सदस्य / आश्रित पास/पीटीओ जारी करने के लिए आवेदन कर सकते है एवं उनके अनुरोध पर इसे जारी किया जा सकता है।

14. पास धारक जिसके लिए वह पात्र है उससे उच्च श्रेणी में, पास की श्रेणी व उच्च यात्रा श्रेणी के बीच के किराए के अंतर का पूर्व भुगतान करके यात्रा कर सकता हैं केवल प्रथम श्रेणी ए-पास एव पीटीओ धारक को छोड़कर, जो कि वातानुकूलित प्रथम श्रेणी व वातानुकूलित शयनयान के किराये के अंतर का 4/3 भुगतान करने पर वातानुकूलित प्रथम श्रेणी में यात्रा कर सकता है। जब पास उच्च श्रेणी में बदला जाता है तो लगेज का फ्री अलाउन्स उच्च श्रेणी के टिकट धारक के समान अथवा हकदार श्रेणी के सुविधा पास पर देय लगेज अलाउन्स, जो भी अधिक हो, के अनुसार रहेगा। एक परिचारक को साथ में फी रखने का अधिकार रेल सेवक द्वारा धारी पास की श्रेणी के आधार पर अधिशासित होगा।

15. अविवाहित पुत्री चाहे, कमाती (अर्जन) हो, उसे भी उसके माता-पिता जो दोनों रेल कर्मचारी हैं, के पास लेखे में शामिल किया जा सकता है। बशर्त है कि यदि पुत्री भी रेल कर्मचारी है तो पुत्री के पास लेखे से उसके पास की स्वयं की हकदारी में कमी करने के बाद उसे अविवाहित अर्जन करने वाली पुत्री, जो रेल कर्मचारी नहीं है, की भांति मानते हुए उसके माता-पिता के पास लेखे में शामिल किया जा सकता है।

16. यदि पति व पत्नी दोनों रेल कर्मचारी है तथा वे अपने स्वयं के अधिकार से पास व पीटीओ के हकदार हो तो निर्धारित नियमों के अनुसार वे अलग-अलग पूर्ण सैटो की संख्या के साथ पास» पीटीओ लेने के हकदार होंगे तथा वे दोनों आपस में एक दूसरे के पास/पीटीओ में शामिल हो सकते है। बच्चो को भी मां व पिता दोनों के लेखे पर जारी पास/पीटीओ में शामिल किया जा सकता है।

17. जब किसी कर्मचारी ने एक कलेण्डर वर्ष में उसको देय बकाया सारे पास/पीटीओ ले लिए है तो उसे अगले वर्ष यात्रा शुरू करने के लिए एक सैट पास अथवा /तथा एक सैट पीटीओ जारी किये जा सकते है तथा इस प्रकार जारी किए गए पास/पीटीओ को उसके अगले वर्ष के पास लेखे में से कम कर दिया जाएगा। इस प्रकार पास/पीटीओ अगले वर्ष शुरू होने सौ दिन से अधिक अवधि पूर्व जारी नहीं किया जायेगा। ये पास/पीटीओ जारी होने की तिथि से पांच माह के लिए वैद्य रहेंगे।

18. जब न तो माता-पिता, न ही वयस्क परिवार सदस्य, न तो वयस्क आश्रित संबंधी राजपत्रित रेल कर्मचारी के अवयस्क बच्चों के साथ यात्रा नहीं कर रहा हो तो महाप्रबन्धक के निर्णयानुसार एक नर्स अथवा किसी अन्य व्यक्ति को पास में शामिल किया जा सकता है। अवयस्क बच्चों में पुत्र / सौतेला पुत्र/ दत्तक पुत्र अथवा आश्रित भाई जिसकी उम्र 15 वर्ष से कम हो तथा पुत्री / दत्तक पुत्री अथवा आश्रित बहन जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम हो शामिल है.

19. शारीरिक रूप से विकलांग समूह-ग और घ के रेल कर्मचारी जो वेतन सीमा के अधीन द्वितीय श्रेणी पास के हकदार है, वे उच्च श्रेणी मगर प्रथम श्रेणी से उच्च नहीं, श्रणी में पास लेने के हकदार होंगे तथा उसी श्रेणी में एक परिचारक को साथ में ले जाने की अनुमति होगी। यह पास उन्हे उनको मिलने वाले कुल सुविधा पास के बदले में दिया जाएगा। इस पास की संख्या एक सैट प्रतिवर्ष होगी चाहे, कर्मचारी प्रतिवर्ष तीन सैट के लिए हकदार हो। यदि पास की हकदारी तीन पास से कम, किन्तु एक सैट पास के कम नही हो तो परिचारक के साथ प्रथम श्रेणी पास की पहले सैट के लिए अनुमति दी जा सकती है।


20. रेल कर्मचारी की एक से अधिक कानूनी रूप से विवाहित पत्नियों के पक्ष में पास/पीटीओ जारी किए जा सकते है, लेकिन शर्त है कि अलग-अलग पास / पीटीओ जारी किए जायेगे तथा इन्हें रेल कर्मचारी के पास खाते में से गिना जायेगा।विवाहित पुत्री को भी पास/पीटीओ में शामिल किया जा सकता है जब उसका पति कम से कम 7 साल से गुम हो तो संबंधित रेल कर्मचारी द्वारा हस्ताक्षरित तथा गुम होने की अवधि दर्शाने वाला मजिस्ट्रेट से प्रमाणित शपथ पत्र प्रस्तुत किया जाए।

21. जब कोई कर्मचारी उसके परिवार या आश्रित के साथ आने» जाने में असमर्थ हो तो वह स्वयं के लिए एक पास का हकदार या तो पहले जाने या पीछे जाने हेतु बाहरी यात्रा / वापसी यात्रा या दोनों के लिए हकदार होगा। बशर्ते कि वह पास जारी करता प्राधिकारी का संतुष्टि हेतु इस प्रकार के साक्ष्य दे कि कर्मचारी अपने परिवार या आश्रित के साथ जाने में अक्षम है। ऐसे मामले में दो बाहरी व दो वापसी यात्रा पास (अर्थात एक ब्हियात्रा व एक वापसी यात्रा पास परिवार या आश्रित संबंधी हेतु एवं एक बर्ियात्रा व एक वापसी यात्रा पास कर्मचारी हेतु) को एक सैट पास माना जाएगा। इन अलग पासों के लिए यथोचित समय सीमा जो एक माह से अधिक नहीं हो लागू रहेगी। यह सुविधा सेवानिवृत रेल कर्मचारियां को देय नहीं होगी।

22. ऐसे कर्मचारी जो सेवानिवृति/अधिवार्षिता पर है, उसको जारी पास/पीटीओ नियमों के अधीन देय सामान्य उपलब्धता अवधि के लिए जारी किए जा सकते है चाहे ये कर्मचारी की अधिवार्षिता तिथि के आगे भी आ रहा हो। इसमें शर्त है कि कर्मचारी को सेवा के दौरान तथा सेवानिवृति के बाद देय कुल पासो की संख्या उससे अधिक नहीं होना चाहिए जितने वह सेवा के दौरान लेने का हकदार था।

23. कानूनी रूप से पृथक की गयी पत्नी का भी पास कर्मचारी के अनुरोध पर दिया जा सकता है।

24. स्वैच्छिक सेवानिवृति / चिकित्सा आधार पर सेवानिवृति में अर्हक सेवा हेतु .पांच वर्ष या बकाया सेवा, जो भी कम हो, को पात्रता हेतु जोड़ा जायेगा।





ड्यूटी पास 
  • गोल्डपास - यह पास चेयरमेन रेलवे बोर्ड, सदस्य रेलवे बोर्ड, महाप्रबन्धकों एवं उनकेसमकक्ष स्वतंत्र प्रभार वाले अधिकारियों को रेलवे बोर्ड द्वारा समस्त भारतीय रेलों पर परिवार के चार सदस्यों सहित प्रथम ‘ए.सी.’ श्रेणी में दो तथा शेष दो अन्य श्रेणी में ड्यूटी पर यात्रा करने केलिए अनुमति प्रदान करता है।
  •  सिल्वर पास - यह पास वरिष्ठ प्रशासनिक वेतनमान केसमस्त अधिकारियों को रेलवे बोर्ड द्वारा ड्यूटी पर समस्त भारतीय रेलों पर परिवार के कुल चार सदस्यों तक जिसमें प्रथम ‘ए.सी.’ श्रेणी में एक सदस्य तथा शेष सदस्य अन्य श्रेणी में यात्रा करने की अनुमति प्रदान करता है। 
  •  ब्राँज पास - कनिष्ठ प्रशासनिक वेतनमान एवं उनकेनिचले पद के ग्रुप ‘बी’ अधिकारी वर्ग को ड्यूटी पर रहते हुए यात्रा करने के लिए महाप्रबन्धकों द्वारा उनकी क्षेत्रीय रेलों पर परिवार के कुल चार सदस्यों को द्वितीय वातानुकूल श्रेणी में यात्रा की अनुमति प्रदान करता है। 
  • ड्यूटी कार्ड पास - जिन कर्मचारियों को ड्यूटी पर कैलेण्डर महीने के दौरान अधिकतम समय कार्यस्थल से बाहर ड्यूटी पर रहना होता है, तो इस कारण उन्हें उनकी पात्रता श्रेणी के अनुसार ड्यूटी कार्ड पास प्रदान किए जाते हैं। ये ड्यूटी कार्ड पास निर्धारित सेक्शन, मंडलों अथवा क्षेत्रीय रेलों के लिए अथवा समज्ञत भारतीय रेलों पर यात्रा करने के लिए प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभागाध्यक्ष की अनुमति से प्रदान किए जाते हैं। इन ड्यूटी कार्ड पासों का नवीनीकरण जारी करने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के पश्चात किया जाता है। इन ड्यूटी कार्ड पासों केद्वारा कर्मचारी किसी भी समय किसी भी गाड़ी द्वारा (प्रतिबन्धित गाड़ियों को छोड़कर) ड्यूटी पर यात्रा कर सकते हैं।
  •  चैक ड्यूटी पास  - जिन रेल कर्मचारियों को मुख्यालय से बाहर प्रशासनिक कारणों से कभी कभी यात्रा करनी होती है तो उन्हें ड्यूटी चेक पास अलग से बनाकर निर्धारित अवधि के लिए एवं पात्रता श्रेणी के अनुसार प्रदान किए जाते हैं। 
  •  अन्य ड्यूटी पास -  रेल कर्मचारियों को कुछ विशेष कारणों से जैसे - इंजन निरीक्षण, फुटप्लेट निरीक्षण इत्यादि के लिए इंजन एवं ब्रेकवान पास विभागीय सक्षम अधिकारी द्वारा अलग से प्रदान किए जाते हैं। 
  •  जिन स्टेशनों पर पास की किताब उपलब्ध नहीं होती है एवं आकस्मिक प्रशासनिक कारणों से किसी भी कर्मचारी को बाहर ड्यूटी पर भेजना आवश्यक होता है तो उन्हें सरकारी नियमों /टेलीग्राम बुक पर आज्ञा प्रदान की जाती है जिसको वायर पास के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार के पासों पर जारी करने वाले अधिकारी केहस्ताक्षर, तारीख, स्टेशन की मुहर एवं अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश, संख्या का विवरण दिया जाएगा। 
  •  उपनगरीय खंडों (सबरबन सेक्शन) में गैंगमैनों को किसी भी लोकल गाड़ी द्वारा ड्यूटी पर यात्रा करने के लिए बकल पास प्रदान किए जाते हैं, जिन्हें वह अपनी भुजाओं पर लगाए रखते हैं।

सुविधा पास 

कर्मचारियों की नियुक्ति की तारीख को मुख्य आधार मानते हुए पासों की पात्रता श्रेणी को उनके वेतनमान अथवा वेतन के अनुसार निर्धारित किया गया है। रेलकर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को दो प्रकार से यात्रा प्राधिकार की सुविधा प्रदान करने का प्रावधान है - 

1. निःशुल्क पास 

2. पी.टी.ओ. (रियायती टिकट आदेश) 

रेल कर्मचारियों को प्रति कैलेण्डर वर्ष में निम्न गणना के आधार पर निःशुल्क पास / पी.टी.ओ जारी किए जाते हैं -


पासों की पात्रता - 





निःशुल्क सुविधा पास एवं पी.टी.ओ. की अवधि निम्न प्रकार होगी -

  • पूरा सेट निःशुल्क सुविधा पास - जारी करने  की तारीख से 5 महीने  की अवधि तक
  • आधा सेट निःशुल्क सुविधा पास - जारी करने की तारीख से 5 महीने की अवधि तक
रियायती टिकट आदेश (पी.टी.ओ) - 5 माह तक की अवधि तक (बाहरी एवं वापसी यात्रा के  लिए पी.टी.ओ ) अलग अलग प्रदान किए जाते हैं एवं इन पर भारतीय रेल में  किसी भी स्टेशन से टिकट जारी कराया जा सकता है)

परिवार की परिभाषा

  • कर्मचारी की पत्नी/पति - चाहे वह रोजगार में हो अथवा नहीं
  • पुत्र जिसकी आयु 21 वर्ष से कम हो तथा जो कर्मचारी पर पूरी तरह से आश्रित हो 
  • 21 वर्ष से अधिक आयु का पुत्र जो मान्यता प्राप्त शिक्षा संस्थान में अध्ययनरत हो।
  • किसी भी आयु की अविवाहित पुत्री चाहे वह रोजगार में हो अथवा नहीं।
  • विधवा पुत्री यदि कर्मचारी पर आश्रित हो।
  • तलाकशुदा पुत्री यदि कर्मचारी पर आश्रित हो।
आश्रित की परिभाषा

कोई भी व्यक्ति आश्रित तभी माना जाएगा जब उसके  पिता जीवित नहीं हो तथा उसके   किसी भी स्त्रोत से आमदनी कर्मचारी की मासिक परिलब्धियों के  15 प्रतिशत या वेतन & डी.ए. मिलाकर राशि से कम हो। यह सीमा डी.ए. की दरों में परिवर्तन होने पर बदलती रहती है।

 निम्नलिखित को आश्रित माना जा सकता है -

  • माता, तलाक प्राप्त माता भी
  • अविवाहित या विधवा बहन
  • भाई या सौतेला भाई, 21 वर्ष से कम आयु और कर्मचारी के साथ रहते हुए आश्रित हो
  • किसी भी आयु का विकलांग/अशक्त भाई
  • भाई जो मान्यता प्राप्त शिक्षा संस्था का छात्र हो
  • बहन जिसे कानूनी तलाक मिल गया हो और जो कर्मचारी के साथ रहते हुए आश्रित हो

परिचर की परिभाषा
वह व्यक्ति जो कर्मचारी की निजी सेवा में हो चाहे उसे वेतन मिलता हो अथवा नहीं, परिचर की परिभाषा में आता है जिसे प्रथम श्रेणी ‘ए’ एवं प्रथम श्रेणी पासधारक कर्मचारी यात्रा के दौरान दूसरी श्रेणी में अपन े साथ यात्रा पर ले जा सकते है। यदि राजधानी या शताब्दी गाड़ी में कर्मचारी यात्रा करे तो परिचर को अलग से दूसरी गाड़ी का पास भी जारी किया जा सकता है। 

सहचर (कम्पेनियन)

65 वर्ष से अधिक आयु के रेल कर्मचारी जो प्रथम श्रेणी ‘ए’/प्रथम श्रेणी के पास की पात्रता   रखते हों उन्हें सहचर ले जाने की अनुमति है बशर्ते कि कर्मचारी स्वयं सहचर के साथ द्वितीय श्रेणी स्लीपर में यात्रा करे।

विशेष अन्य पास

मानार्थ पास -

सेवा निवृत होने वाले रेल कर्मचारियों को अहर्क सेवा के आधार पर निम्न गणना के अनुसार मानार्थ पास प्रदान किए जाते  हैं -

विवरण                                                                            पासो  की संख्या  प्रति कैलेण्डर वर्ष

राजपत्रित अधिकारी -

  • 20 वर्ष से अधिक लेकिन 25 वर्ष की सेवा अवधि तक                   2 सेट
  • 25 वर्ष से अधिक सेवा अवधि होने पर                                         3 सेट
अराजपत्रित ग्रुप ‘सी’ कर्मचारी वर्ग -
  • 20 वर्ष से अधिक लेकिन 25 वर्ष की सेवा अवधि तक                   1 सेट
  •  25 वर्ष से अधिक सेवा अवधि होने पर                                        2 सेट
अराजपत्रित ग्रुप ‘डी’ कर्मचारी वर्ग -

20 वर्ष से अधिक सेवा अवधि होने  पर                                               1 सेट

विधवा पास
  • सेवा निवृत रेल कर्मचारियों को मानार्थ पास प्रदान किए जाते हैं, यदि उनकी मृत्यु सेवा निवृति के  पश्चात हो जाए तो प्रत्येक केलेण्डर वर्ष के  दौरान दिए जाने वाले मानार्थ पासों के  ठीक आधे सेट उनकी विधवा/विधुर को दिए जाएंगे।
  • दिनांक 13.4.1987 के पश्चात दो सेट पी.टी.ओ कम करने पर विधवा/विधुर पास की योजना लागू की गई है। इसके अन्तर्गत अब सभी रेल कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष 6 सेट पी.टी.ओ. के  बजाय 4 सेट पी.टी.ओ. ही प्रदान करने का प्रावधान है।
  • यह सुविधा उन कर्मचारियों की विधवा/विधुर को भी मिल सकेगी जो 12.3.1987 से पहले सेवा में थे किन्तु उन्हें  पी.टी.ओ. के  दो सेट के कल्पित मूल्य को एक मुश्त 250/- का भुगतान करना होगा। यह भुगतान मण्डल कैशियर द्वारा नकद  या उस रेलवे से जहां विधवा पास लेना चाहती है, वि.स.एवं मु.ले.अधि. के नाम डीडी. द्वारा जमा कराया जा सकता है।
  • उन कर्मचारियों की विधवा/विधुर जो कि इस योजना के  प्रारम्भ होने के  पूर्व ही गुजर गए थे, उनकी विधवा/विधुर को 250/- रु. रेलवे राजस्व में जमा करवा देने पर एवं उस मृतक कर्मचारी का मृत्यु प्रमाण पत्र, पी.पी.ओ. की प्रति एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर देने पर विधवा/विधुर पास दिए जाने का प्रावधान है।
आवासीय कार्ड पास

यह पास उन कर्मचारियों को मिलते हैं जो अपनी ड्यूटी स्थल से दूर रहते हैं तथा यह उन सेक्शनों पर उनके कार्यस्थल तक की यात्रा के लिए दिए जाते हैं जहां यह सुविधा पहले लागू की गई थी। इसमें प्रथम श्रेणी के कार्ड पास की पात्रता वही होगी जो सुविधा पास व स्कूल कार्ड पास के लिए होती है।


स्कूल  कार्ड पास

जिन रेल कर्मचारियों के  कार्यस्थल के  स्टेशन  पर उचित माध्यम अथवा उचित स्तर का स्कूल  अथवा काॅलेज न हो तो उनके बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने  के  लिए किसी अन्य जगह पर बाहर जाना होता है। जहाँ से वे प्रतिदिन लौटकर आ जा नही सकते। कर्मचारी के निवास स्थान और स्कूल 40 कि.मी. की दूरी तक के स्टेशन  के  बीच यात्रा करने के  लिए प्रदान किए जाते हैं। इस पर पात्रता की शर्तें लागू होती है।

चिकित्सा पास

जिन रेल कर्मचारियों के  कार्य स्थल के  स्टेशन पर रेलवे द्वारा चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं करवाई गई हो तो वहां के  रेल कर्मचारियों एवं उनके  परिवार के सदस्यों को नजदीकी रेलवे अस्पताल में चिकित्सा सुविधा के लिए आने व जाने  के लिए चिकित्सा पास प्रदान किए जाते हैं। रेलवे चिकित्सा अधिकारी यदि चाहे तो इन मरीज कर्मचारियों अथवा उनके  आश्रित परिवार के  सदस्यों को विशेष चिकित्सा लाभ प्राप्त करने  के लिए अन्य बड़े चिकित्सा केंद्र में भेज सकते हैं एवं इस कारण उन्हें निःशुल्क चिकित्सा पास पात्रता श्रेणी के  अनुसार प्रदान कर सकते हैं।

खेल कूद पास

रेल कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को खेलकूद, मनोरंजन एवं सांस्कृतिक संगीत नाटक प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए निःशुल्क खेल कूद पास प्रदान किए जाते हैं।

रेलवे की कर्मचारी कल्याण गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी तौर पर जिन कर्मचारियों को विशेष आकस्मिक छुट्टी देने का प्रावधान है, उन्हें इस प्रयोजन के लिए निःशुल्क विशेष पास भी प्रदान किए जाते हैं।

यूनियन के पदाधिकारियों के पास

कर्मचारियों एवं प्रशासन के मध्य मधुर सम्बन्ध बनाए रखने  के लिए सभी यूनियन कार्यकारिणी सदस्यों को यूनियन की बैठकों में भाग लेने के  लिए यूनियन कार्ड पास अथवा चैक पास प्रदान करने  का प्रावधान है।

अन्य विशेष पास
  • सेवा निवृति या मृत्यु पर सेटलमेंट पास
  • न्यायालय में हाजरी देने के  लिए निलम्बित रेल कर्मचारियों को पास
  • शारीरिक रूप से अपंग कर्मचारियों को परिचर सहित/उच्च श्रेणी सहित पास
  • अर्द्ध रेल संस्थाओं के  कर्मचारियों को पास - जैसे रेलवे इंस्टीट्यूट, काॅपरेटिव सोसायटी, प्रबन्ध समितियां इत्यादि ।
  • अनुशासनिक कार्यवाहियों में जांच अधिकारी/बचाव सलाहकार को पास
  • पहली नियुक्ति पर पास
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के  लिए पास
  • हिन्दी सलाहकार समिति, रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति, यात्री सुविधा समिति इत्यादि गैर रेल कर्मचारियों/संगठनों को पास
  • पर्वतारोहण एवं लम्बी पैदल यात्रा अभियान दल में भाग लेने वाले कर्मचारियों को पास
  • लाइसेंस कुलियों को मानार्थ पास
  • कर्मचारी शिक्षा योजना के लिए पास
  • कर्मचारी हित निधि द्वारा नियुक्त पूर्णकालिक होम्योपैथी/आयुर्वेदिक चिकित्सकों को मानार्थ पास
  • अनुकम्पा के आधार पर बुलाए गए अभ्यार्थी को परीक्षा/ इन्टरव्यू के  लिए पास
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