यह अध्याय “भारतीय रेल स्थानांतरण नियम संहिता” पुस्तक पर आधारित है।
8. वरिष्ठता प्रभाव एवं प्रशासनिक
स्थानांतरण
रेलवे सेवा में वरिष्ठता (Seniority) एक अत्यंत महत्वपूर्ण सेवा तत्व है, जो पदोन्नति, चयन, प्रतिनियुक्ति तथा अन्य सेवा लाभों का आधार बनता है। अतः जब किसी कर्मचारी का स्थानांतरण एक वरिष्ठता इकाई से दूसरी वरिष्ठता इकाई में किया जाता है, तो उसकी वरिष्ठता का निर्धारण एक संवेदनशील एवं नियमबद्ध विषय बन जाता है। इस संबंध में भारतीय रेलवे स्थापना मैनुअल (IREM) तथा रेलवे बोर्ड के निर्देशों में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं, जिनका पालन करना प्रशासन के लिए अनिवार्य है।
वरिष्ठता इकाई की अवधारणा एवं दायरा
वरिष्ठता इकाई से अभिप्राय उस प्रशासनिक इकाई से है
जिसके अंतर्गत कर्मचारियों की वरिष्ठता निर्धारित, संरक्षित एवं संचालित की जाती है। यह इकाई विभाग, कैडर, मंडल अथवा किसी विशिष्ट स्थापना के आधार पर
निर्धारित की जा सकती है। सिद्धांतों के अनुसार वरिष्ठता सामान्यतः उसी इकाई के
भीतर मान्य होती है जिसमें कर्मचारी की नियुक्ति या समायोजन हुआ है।
इसका तात्पर्य यह है कि एक वरिष्ठता इकाई की
वरिष्ठता स्वतः दूसरी इकाई में स्थानांतरित नहीं होती, जब तक कि नियमों में इसके लिए
स्पष्ट प्रावधान न किया गया हो।
नियमाधारित प्रावधान (IREM एवं बोर्ड निर्देश)
स्थानांतरण के पश्चात वरिष्ठता निर्धारण मुख्यतः
निम्न प्रावधानों द्वारा नियंत्रित होता है—
·
IREM Vol. I, Para 302 से 320
·
IREM Para 312 (अनुरोध पर स्थानांतरण)
·
IREM Para 310-311 (पारस्परिक स्थानांतरण)
·
Master Circular No. 24
·
Railway Board के समय-समय पर जारी RBE निर्देश
इन प्रावधानों का समेकित सिद्धांत यह है कि वरिष्ठता
का निर्धारण न केवल सेवा अवधि के आधार पर, बल्कि संबंधित वरिष्ठता इकाई एवं स्थानांतरण के प्रकार के
आधार पर किया जाएगा।
प्रशासनिक स्थानांतरण में वरिष्ठता का निर्धारण
जब किसी कर्मचारी का स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकता
के कारण किया जाता है, तो
उसकी वरिष्ठता के संबंध में स्थिति भिन्न होती है। ऐसे मामलों में यह माना जाता है
कि कर्मचारी ने स्वेच्छा से स्थानांतरण नहीं लिया है, बल्कि
यह प्रशासनिक हित में किया गया है।
इस प्रकार के स्थानांतरण में, सक्षम प्राधिकारी परिस्थितियों के
अनुसार कर्मचारी की पूर्व सेवा को ध्यान में रखते हुए उसकी वरिष्ठता का संरक्षण कर
सकता है, ताकि वह पदोन्नति के अवसरों से वंचित न हो। तथापि
यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि ऐसा संरक्षण स्वचालित नहीं होता, बल्कि प्रत्येक मामले में तथ्यों एवं प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर
निर्णय लिया जाता है।
रेलवे बोर्ड के निर्देशों के अनुसार यह भी सुनिश्चित
किया जाना चाहिए कि वरिष्ठता संरक्षण प्रदान करते समय नई इकाई की वरिष्ठता संरचना
प्रभावित न हो तथा अन्य कर्मचारियों के वैध अधिकारों का हनन न हो।
प्रशासनिक संतुलन एवं निष्पक्षता का सिद्धांत
वरिष्ठता निर्धारण करते समय प्रशासन के समक्ष दोहरे
हित होते हैं— एक ओर स्थानांतरित कर्मचारी के हित, तथा दूसरी ओर नई इकाई के कर्मचारियों के अधिकार। अतः यह
आवश्यक है कि वरिष्ठता संरक्षण का प्रयोग अत्यंत सावधानीपूर्वक किया जाए।
यदि बिना विचार किए वरिष्ठता संरक्षण प्रदान कर दिया
जाए, तो इससे स्थानीय
कर्मचारियों के पदोन्नति अवसर प्रभावित हो सकते हैं तथा वरिष्ठता सूची में असंतुलन
उत्पन्न हो सकता है। इसी कारण, यह सिद्धांत स्थापित किया गया
है कि वरिष्ठता संरक्षण केवल उन्हीं परिस्थितियों में दिया जाए जहाँ स्थानांतरण
पूर्णतः प्रशासनिक आवश्यकता के कारण किया गया हो और इससे अन्य कर्मचारियों को कोई
अनुचित हानि न हो।
अनुरोध पर
स्थानांतरण
IREM Para 312 के अनुसार, यदि कोई
कर्मचारी अपने स्वयं के अनुरोध पर एक वरिष्ठता इकाई से दूसरी इकाई में स्थानांतरण
प्राप्त करता है, तो उसे नई इकाई में न्यूनतम वरिष्ठता
प्रदान की जाती है।
इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि
कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत सुविधा के लिए स्थानांतरण प्राप्त करते समय अन्य
कर्मचारियों के अधिकारों को प्रभावित न कर सके। अतः ऐसे मामलों में कर्मचारी अपनी
पूर्व वरिष्ठता का दावा नहीं कर सकता और उसे नई इकाई में सबसे नीचे (bottom) रखा जाता है।
पारस्परिक स्थानांतरण (Mutual Transfer)
भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (IREC) के Rule 230 तथा भारतीय रेलवे स्थापना मैनुअल (IREM) के संबंधित
प्रावधानों के अंतर्गत Mutual Transfer का प्रावधान किया गया
है। इस व्यवस्था में दो रेलवे कर्मचारी आपसी सहमति (Mutual Consent) से एक-दूसरे के पदों का Exchange करते हैं।
IREC Rule 230 के अनुसार, पारस्परिक
स्थानांतरण की स्थिति में वरिष्ठ कर्मचारी को दूसरे कर्मचारी द्वारा रिक्त की गई
वरिष्ठता का स्थान प्रदान किया जाता है, जबकि कनिष्ठ
कर्मचारी अपनी पूर्व वरिष्ठता बनाए रखता है तथा उसे समान वरिष्ठता वाले
कर्मचारियों के नीचे समायोजित किया जाता है। इस प्रकार, मूल
नियम के अनुसार वरिष्ठता का निर्धारण पूर्णतः “समायोजन (Adjustment)” के सिद्धांत पर आधारित है, न कि स्वचालित रूप से Bottom
Seniority प्रदान करने पर।
तथापि, रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों तथा Master Circular
No. 24 के अंतर्गत यह सिद्धांत स्थापित किया गया है कि पारस्परिक
स्थानांतरण के माध्यम से किसी भी कर्मचारी को अनुचित लाभ प्राप्त नहीं होना चाहिए।
इस उद्देश्य से व्यवहार में वरिष्ठता का निर्धारण इस प्रकार किया जाता है कि नई
इकाई की वरिष्ठता संरचना प्रभावित न हो तथा अन्य कर्मचारियों के पदोन्नति अवसर
सुरक्षित रहें।
इसी कारण, अनेक मामलों में कर्मचारियों को नई इकाई में निम्नतम वरिष्ठता
प्रदान की जाती है अथवा उनकी वरिष्ठता इस प्रकार समायोजित की जाती है कि संपूर्ण
प्रणाली की निष्पक्षता (Fairness of Seniority Structure) बनी
रहे।
अतः पारस्परिक स्थानांतरण में वरिष्ठता का निर्धारण
केवल IREC के प्रावधानों
तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे बोर्ड के प्रशासनिक निर्देशों
एवं “No Undue Advantage” सिद्धांत के समन्वित अनुप्रयोग पर
आधारित होता है।
वरिष्ठता का दावा (No Claim Principle)
रेलवे सेवा नियमों के अंतर्गत यह एक स्थापित
सिद्धांत है कि कोई भी कर्मचारी स्थानांतरण के पश्चात पूर्व वरिष्ठता के संरक्षण
का दावा नहीं कर सकता, जब
तक कि संबंधित नियमों या आदेशों में इसके लिए स्पष्ट प्रावधान न किया गया हो।
विशेष रूप से अनुरोध पर स्थानांतरण तथा पारस्परिक
स्थानांतरण के मामलों में यह सिद्धांत पूर्ण रूप से लागू होता है।
सतर्कता एवं अनुशासनिक मामलों में स्थानांतरण
यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध सतर्कता या अनुशासनिक
जांच लंबित है और प्रशासनिक कारणों से उसका स्थानांतरण किया जाता है, तो इसे दंडात्मक कार्यवाही न मानकर
प्रशासनिक उपाय के रूप में देखा जाता है।
ऐसे मामलों में यह अपेक्षित है कि जांच को यथाशीघ्र
पूर्ण किया जाए तथा जांच के परिणाम के आधार पर कर्मचारी की स्थिति की पुनः समीक्षा
की जाए। आवश्यक होने पर उसे मूल स्थान पर पुनः पदस्थापित करने पर भी विचार किया जा
सकता है।
प्रशासनिक औचित्य
रेलवे की पदोन्नति प्रणाली पूर्णतः वरिष्ठता पर
आधारित संरचना पर निर्भर करती है। यदि वरिष्ठता में असंतुलन उत्पन्न होता है, तो इससे न केवल पदोन्नति प्रक्रिया
प्रभावित होती है, बल्कि कर्मचारियों में असंतोष भी उत्पन्न
होता है, जो अंततः प्रशासनिक कार्यक्षमता को प्रभावित करता
है।
इसी कारण, वरिष्ठता संरक्षण का प्रयोग एक अपवाद (Exception) के रूप में किया जाता है, न कि सामान्य नियम के रूप
में।
व्यवहारिक दिशा-निर्देश
वरिष्ठता निर्धारण से संबंधित आदेश जारी करते समय यह
आवश्यक है कि—
- स्थानांतरण का प्रकार स्पष्ट रूप से
उल्लेखित हो
- वरिष्ठता निर्धारण (Seniority Fixation) आदेश में
स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए
- संबंधित नियम (IREM Para आदि) का संदर्भ दिया
जाए
- आदेश लिखित रूप में जारी किया जाए
लिखित एवं स्पष्ट आदेश भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों को रोकने का प्रभावी माध्यम होता है।

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