रनिंग कर्मचारियों के लिए 10 घंटे की ड्यूटी के नियम (HOER Rules) | कब मिलता है रिलीफ का अधिकार?
भारतीय रेल में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गार्ड तथा अन्य रनिंग कर्मचारियों के कार्य के घंटे Hours of Employment Regulations (HOER) एवं रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं। इन नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों की थकान (Fatigue) को कम करना तथा सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करना है।
10 घंटे की रनिंग ड्यूटी का नियम
रनिंग कर्मचारियों की Running Duty सामान्यतः एक बार में 10 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। 10 घंटे की इस अवधि की गणना ट्रेन के Actual Departure (Wheel Movement) से प्रारम्भ होकर गंतव्य स्टेशन अथवा सामान्य Crew Changing Point तक की जाती है। अर्थात Sign On का समय नहीं, बल्कि ट्रेन के वास्तविक चलने का समय इस गणना का आधार होता है।
12 घंटे बाद रिलीफ माँगने का अधिकार
यदि किसी कारणवश कर्मचारी की ड्यूटी लंबी हो जाती है, तो रनिंग कर्मचारी 12 घंटे की ड्यूटी पूरी होने पर रिलीफ (Relief) का दावा कर सकता है, बशर्ते उसने नियमानुसार कम-से-कम 2 घंटे पहले कंट्रोलर को रिलीफ की सूचना (Notice) दे दी हो। यह प्रावधान कर्मचारी की सुरक्षा तथा सुरक्षित ट्रेन संचालन को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
विशेष परिस्थितियों में 10 घंटे से अधिक ड्यूटी
परिचालन संबंधी विशेष आवश्यकता (Operational Exigency) होने पर रनिंग ड्यूटी को 10 घंटे से अधिक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कंट्रोलर को 8 घंटे पूरे होने से पहले कर्मचारी को इसकी सूचना देना आवश्यक है। ऐसी स्थिति में भी कुल कार्य अवधि निर्धारित सीमा के भीतर ही रखी जाती है।
यदि गाड़ी गंतव्य से थोड़ी दूरी पर हो
यदि 12 घंटे की सीमा पूरी होने तक ट्रेन अपने सामान्य Crew Changing Point, गंतव्य स्टेशन अथवा ऐसे स्थान से जहाँ रिलीफ की व्यवस्था उपलब्ध हो, लगभग एक घंटे की दूरी पर हो, तो कर्मचारी को ट्रेन उस स्थान तक पहुँचाना होगा ताकि सुरक्षित रूप से क्रू परिवर्तन किया जा सके।
आपातकालीन परिस्थितियों में
दुर्घटना, बाढ़, भूकम्प, प्राकृतिक आपदा, आंदोलन, सिग्नल या संचार व्यवस्था में विफलता, इंजन अथवा अन्य गंभीर परिचालन संबंधी कारणों से यदि आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो कर्मचारी को निर्धारित सीमा से अधिक कार्य करना पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में कंट्रोल कार्यालय को यथासंभव कर्मचारी को पूर्व सूचना देना तथा शीघ्र रिलीफ की व्यवस्था करना अपेक्षित है।
रनिंग ड्यूटी और कुल ड्यूटी में अंतर
अनेक कर्मचारी Running Duty और Overall Duty (Elapsed Duty) को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग हैं।
Running Duty की गणना ट्रेन के Wheel Movement से गंतव्य अथवा Crew Changing Point तक की जाती है।
इसके विपरीत Overall Duty (Elapsed Duty) की गणना Sign On से Sign Off तक की जाती है। समयोपरि भत्ता (Overtime) की गणना भी इसी अवधि के आधार पर की जाती है।
रनिंग ड्यूटी में कौन-सा समय शामिल नहीं किया जाता?
निम्नलिखित अवधि सामान्यतः रनिंग ड्यूटी में शामिल नहीं की जाती, किन्तु समयोपरि भत्ता (Overtime) की गणना में इसे जोड़ा जाता है—
- आने वाले कर्मीदल को इंजन की जाँच (Engine Examination) के लिए दिया गया समय।
- गाड़ी के प्रस्थान से पूर्व की निर्धारित तैयारी अवधि।
- यदि रनिंग कर्मचारी ट्रेन संचालन से पहले या बाद में Passenger के रूप में यात्रा करता है, तो 4 घंटे तक की यात्रा रनिंग ड्यूटी में शामिल नहीं की जाएगी। यदि यात्रा 4 घंटे से अधिक हो, तो अतिरिक्त अवधि का दो-तिहाई (2/3) भाग रनिंग ड्यूटी में जोड़ा जाएगा।
- गंतव्य स्टेशन से लोको शेड, क्रू लॉबी अथवा निर्धारित स्थान तक पहुँचने में लगा समय।
रनिंग ड्यूटी के बाद विश्राम
रनिंग कर्मचारियों को ड्यूटी समाप्त होने के बाद नियमानुसार मुख्यालय अथवा मुख्यालय के बाहर विश्राम दिया जाता है। सामान्यतः 6 घंटे का न्यूनतम विश्राम पूरा किए बिना पुनः बुकिंग नहीं की जानी चाहिए, सिवाय दुर्घटना अथवा अन्य अत्यावश्यक परिस्थितियों के। शॉर्ट ट्रिप के मामलों में यदि दो ट्रिपों के बीच का विश्राम एक घंटा या उससे कम हो, तो उसे रनिंग ड्यूटी का ही भाग माना जाता है।
रनिंग कर्मचारियों के लिए निर्धारित ड्यूटी घंटे केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं हैं, बल्कि रेल सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार हैं। प्रत्येक रनिंग कर्मचारी को 10 घंटे की रनिंग ड्यूटी, 12 घंटे के बाद रिलीफ के अधिकार तथा विश्राम संबंधी प्रावधानों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। इन नियमों का पालन कर्मचारियों के स्वास्थ्य के साथ-साथ सुरक्षित एवं निर्बाध रेल संचालन के लिए भी आवश्यक है।
संदर्भ : Railway Servants (Hours of Work and Period of Rest) Rules (HOER), Railway Board Instructions, Railway Labour Tribunal (Justice Miyabhoy Award), तथा CAT Guidelines, 1992.

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