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Railway Transfer Rules: 6. आवधिक स्थानांतरण एवं संवेदनशील पद (Periodic Transfers and Sensitive Posts)

यह अध्याय “भारतीय रेल स्थानांतरण नियम संहिता” पुस्तक पर आधारित है।

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6. आवधिक स्थानांतरण एवं संवेदनशील पद

 

रेलवे प्रशासन में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का आवधिक स्थानांतरण एक स्थापित प्रशासनिक एवं सतर्कता संबंधी सिद्धांत है। यह व्यवस्था न केवल प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ करती है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाओं को रोकने हेतु एक प्रभावी “Preventive Vigilance Measure” के रूप में भी कार्य करती है।

Master Circular में यह स्पष्ट किया गया है कि प्रशासनिक हित में कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जा सकता है तथा जहाँ आवश्यक हो, नियमित रोटेशन लागू किया जाना चाहिए। इसी प्रकार Railway Vigilance Manual में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए समयबद्ध रोटेशन की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

संवेदनशील पद की अवधारणा एवं परिभाषा

संवेदनशील पद ऐसे पद होते हैं, जहाँ कर्मचारी का कार्य स्वभावतः ऐसी गतिविधियों से जुड़ा होता है जिनमें विवेकाधीन निर्णय, वित्तीय प्रभाव, अथवा बाहरी पक्षों के साथ संपर्क शामिल होता है। CVC Guidelines on Sensitive Posts के अनुसार, वे सभी पद जहाँ “scope for discretion, public interface or financial implication exists”, संवेदनशील माने जाते हैं।

इस प्रकार, व्यावहारिक रूप से संवेदनशील पदों में वे सभी पद सम्मिलित होते हैं जहाँ कर्मचारी—

  • जनता से प्रत्यक्ष संपर्क रखता है,
  • ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं या बाहरी एजेंसियों से व्यवहार करता है,
  • वित्तीय लेन-देन या भुगतान प्रक्रिया में संलग्न होता है,
  • राजस्व संग्रह या नकद प्रबंधन करता है,
  • निरीक्षण, प्रमाणीकरण या स्वीकृति का अधिकार रखता है।

ऐसे पदों पर दीर्घकाल तक कार्यरत रहने से व्यक्तिगत प्रभाव विकसित होने तथा निष्पक्षता प्रभावित होने की संभावना रहती है, अतः इन्हें प्रशासनिक दृष्टि से “Risk-prone” माना गया है।

विभागीय परिप्रेक्ष्य में संवेदनशील पद

रेलवे बोर्ड द्वारा संवेदनशील पदों की कोई एक समान सूची निर्धारित नहीं की गई है। Railway Vigilance Manual के अनुसार, प्रत्येक विभाग/यूनिट को अपने कार्य की प्रकृति के आधार पर संवेदनशील एवं गैर-संवेदनशील पदों की पहचान करनी होती है तथा समय-समय पर उसकी समीक्षा करनी होती है।

व्यावहारिक रूप से निम्न विभागों में संवेदनशील पद सामान्यतः पाए जाते हैं—

·       वाणिज्य विभाग में राजस्व संग्रह, बुकिंग, पार्सल एवं माल संचालन से जुड़े पद;

·       परिचालन विभाग में स्टेशन प्रबंधन एवं ट्रेन नियंत्रण से जुड़े पद;

·       लेखा विभाग में भुगतान, बिल पासिंग एवं नकद प्रबंधन से संबंधित पद;

·       भंडार विभाग में निविदा, खरीद एवं आपूर्ति से जुड़े पद;

·       इंजीनियरिंग, विद्युत एवं यांत्रिक विभागों में ठेका कार्य, मापन एवं प्रमाणन से संबंधित पद; तथा

·       चिकित्सा विभाग में औषधि खरीद एवं भंडारण से जुड़े पद।

यह ध्यान देने योग्य है कि उक्त विवरण केवल उदाहरणात्मक है तथा प्रत्येक रेलवे/डिवीजन द्वारा अपनी Approved Sensitive Post List पृथक रूप से अधिसूचित की जाती है।

आवधिक स्थानांतरण की अवधि (Tenure Norms)

संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के कार्यकाल के संबंध में CVC तथा Railway Vigilance Manual में यह निर्देशित किया गया है कि ऐसे पदों पर कर्मचारियों का कार्यकाल सीमित होना चाहिए तथा समयबद्ध रोटेशन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सामान्यतः, प्रचलित दिशानिर्देशों के अनुसार—

  • संवेदनशील पद पर सामान्य कार्यकाल लगभग 3 वर्ष रखा जाता है,
  • विशेष परिस्थितियों में इसे अधिकतम 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।

इस प्रकार, किसी भी कर्मचारी का एक ही संवेदनशील पद पर दीर्घकाल तक बने रहना उचित नहीं माना जाता और नियत अवधि होने पर उसका स्थानांतरण या रोटेशन किया जाना अपेक्षित है।

स्थानांतरण के प्रकार (Modes of Rotation)

संवेदनशील पदों पर रोटेशन दो प्रकार से लागू किया जाता है। प्रथम, कर्मचारी को एक स्टेशन अथवा इकाई से दूसरी इकाई में स्थानांतरित किया जाता है, जिसे Inter-Station Transfer कहा जाता है। द्वितीय, कर्मचारी को उसी स्टेशन अथवा कार्यालय के भीतर किसी अन्य सीट, कार्य अथवा अनुभाग में स्थानांतरित किया जाता है, जिसे Intra-Station Rotation कहा जाता है।

Railway Board Instructions के अनुसार, जहाँ संभव हो, Intra-Station Rotation को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि कर्मचारियों के स्थान परिवर्तन से होने वाली असुविधा को न्यूनतम रखा जा सके, जबकि सतर्कता के उद्देश्य भी पूर्ण हो सकें।

सतर्कता दृष्टिकोण एवं औचित्य

संवेदनशील पदों पर आवधिक स्थानांतरण को Preventive Vigilance का एक महत्वपूर्ण उपकरण माना गया है। Railway Vigilance Manual में यह स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार को केवल दंडात्मक कार्रवाई से नहीं, बल्कि Prevention के माध्यम से नियंत्रित किया जाना अधिक प्रभावी है।

इस संदर्भ में रोटेशन का उद्देश्य भ्रष्टाचार की संभावना को कम करना, अनियमितताओं को रोकना तथा प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना है। यह विशेष रूप से स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार का स्थानांतरण दंडात्मक नहीं है, बल्कि यह एक Routine Administrative Measure है।

अनुमोदन एवं नियंत्रण (Approval and Monitoring)

संवेदनशील पदों की पहचान, उनकी सूची का अनुमोदन तथा रोटेशन नीति का निर्धारण संबंधित विभागाध्यक्ष अथवा मंडल स्तर पर DRM द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में सतर्कता विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो समय-समय पर इस व्यवस्था की निगरानी करता है।

Railway Vigilance Manual के अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि संवेदनशील पदों की सूची अद्यतन रहे तथा रोटेशन नीति का निष्पक्ष एवं समान रूप से अनुपालन किया जाए।

प्रशासनिक औचित्य एवं प्रभाव

संवेदनशील पदों पर दीर्घकालीन तैनाती से प्रशासनिक प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे व्यक्तिगत प्रभाव, पक्षपात, हितों का टकराव तथा कार्यप्रणाली में अपारदर्शिता उत्पन्न होने की संभावना रहती है। अतः निश्चित अवधि के पश्चात रोटेशन को प्रशासनिक आवश्यकता के रूप में स्वीकार किया गया है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि आवधिक स्थानांतरण को सेवा की सामान्य शर्त माना जाता है और इसे किसी भी प्रकार से दंडात्मक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

व्यवहारिक दिशा-निर्देश (Practical Guidelines)

संवेदनशील पदों पर रोटेशन लागू करते समय यह अपेक्षित है कि कार्यकाल की गणना संबंधित पद/सीट के आधार पर की जाए, संवेदनशील पदों की सूची सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित एवं अद्यतन हो, तथा सभी कर्मचारियों पर समान रूप से नियम लागू किए जाएँ। रोटेशन प्रस्ताव पूर्व स्वीकृति के पश्चात ही लागू किया जाए तथा जहाँ आवश्यक हो, सतर्कता समन्वय सुनिश्चित किया जाए।

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